Invention Guru Rajender Kumar Nangia

Invention Guru Rajender Kumar Nangia Turning Ideas I

Founder – RTUAI™

Inventor | Innovation Mission | Public Awareness

Electrical • Electronics • Telecommunication • Computer Science • Mechanical Systems

Mission 100CR Citizens

Every Citizen Has The Right To Understand Before They Agree.

24/06/2026

क्या आपको भी कभी कोई सेवा, बीमा, बैंकिंग, निवेश या उत्पाद बेचते समय कुछ और समझाया गया हो और बाद में Terms & Conditions में कुछ और निकल आया हो?

❓ यदि कोई शर्त इतनी महत्वपूर्ण थी कि बाद में उसी के आधार पर आपका दावा, लाभ या अधिकार रोका जा सकता है, तो क्या उसे बेचते समय स्पष्ट उदाहरण सहित समझाना कंपनी का दायित्व नहीं होना चाहिए?

🎯 RIGHT TO UNDERSTAND AI (RTUAI) का उद्देश्य है कि हर नागरिक को सही, स्पष्ट और समझने योग्य जानकारी मिले।

💡 हमारा मानना है:

✔ ज्ञान से समझ बनती है
✔ समझ से विश्वास बनता है
✔ विश्वास से अवसर बनते हैं

🙏 यदि आप भी मानते हैं कि प्रत्येक नागरिक को समझने का अधिकार है, तो इस वीडियो को Share करें और अपनी राय Comment में लिखें।

24/06/2026
🚨 एक महत्वपूर्ण प्रश्न...❓ यदि कोई शर्त इतनी महत्वपूर्ण थी कि बाद में उसी के आधार पर आपका दावा, लाभ, पैसा या अधिकार रोका...
23/06/2026

🚨 एक महत्वपूर्ण प्रश्न...

❓ यदि कोई शर्त इतनी महत्वपूर्ण थी कि बाद में उसी के आधार पर आपका दावा, लाभ, पैसा या अधिकार रोका जा सकता है...

तो क्या उसे बेचते समय स्पष्ट रूप से और उदाहरण सहित समझाना कंपनी का दायित्व नहीं होना चाहिए?

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि—

✔ Insurance Policy बेचते समय कुछ और बताया गया हो?

✔ Investment Plan समझाते समय कुछ और कहा गया हो?

✔ Loan, Credit Card या FD लेते समय केवल फायदे बताए गए हों?

✔ बाद में Terms & Conditions का ऐसा अर्थ निकाल दिया गया हो जो आपने पहले कभी समझा ही न हो?

✔ किसी विवाद के समय वही शर्त दिखाई गई हो जिसे खरीदते समय कभी स्पष्ट नहीं किया गया था?

यदि ऐसा हुआ है, तो समस्या केवल एक व्यक्ति की नहीं है।

यह लाखों नागरिकों की समस्या है।

जब Product या Service बेची जाती है, तब हमें सुनहरे भविष्य के सपने दिखाए जाते हैं।

लेकिन जब लाभ, दावा या अधिकार की बात आती है, तब Terms & Conditions की ऐसी व्याख्या सामने आ जाती है जिसे आम नागरिक समझ ही नहीं पाता।

⚖️ RTUAI की मांग सरल है:

✅ महत्वपूर्ण शर्तों के साथ उदाहरण अनिवार्य हों

✅ जो समझाया जाए वही लिखित में हो

✅ Call Recording उपलब्ध कराई जाए

✅ एक शिकायत = एक Reference Number हो

✅ समझ के बिना सहमति को वैध न माना जाए

क्योंकि...

"यदि समझाना उनका दायित्व है,
तो समझना हमारा अधिकार है।"

RIGHT TO UNDERSTAND AI™

🌐 www.rtuai.in

📱 WhatsApp: 9999995656

Founder:
Invention Guru Rajender Kumar Nangia








23/06/2026
22/06/2026

क्या आपको भी इस सिस्टम ने इतना भटका दिया है कि अधिकार मांगना भी संघर्ष बन गया है?

हर नियम नागरिक के लिए।
हर समय-सीमा नागरिक के लिए।
हर शर्त नागरिक के लिए।

लेकिन जब जवाब मांगो तो मिलता है —
एक और शिकायत नम्बर,
एक और रेफरेंस नम्बर,
एक और प्रक्रिया।

RIGHT TO UNDERSTAND AI

समझ नहीं, तो सहमति नहीं।

🌐 www.rtuai.in

क्या आपको भी इस सिस्टम ने इतना भटका दिया है कि अधिकार मांगना भी संघर्ष बन गया है?एक शिकायत...फिर दूसरी शिकायत...फिर नया ...
22/06/2026

क्या आपको भी इस सिस्टम ने इतना भटका दिया है कि अधिकार मांगना भी संघर्ष बन गया है?

एक शिकायत...

फिर दूसरी शिकायत...

फिर नया रेफरेंस नंबर...

फिर नया विभाग...

फिर नया अधिकारी...

और अंत में वही जवाब —

"पहले नियम मानिए, फिर शिकायत कीजिए।"

लेकिन सवाल यह है...

जब नागरिक से हर नियम, हर समय-सीमा और हर शर्त का पालन करवाया जाता है,

तो क्या संस्थाओं, कंपनियों, बैंकों, बीमा कंपनियों, अस्पतालों और सरकारी विभागों की भी उतनी ही जवाबदेही नहीं होनी चाहिए?

क्या जानकारी केवल उपलब्ध होना ही पर्याप्त है, या उसका स्पष्ट, सरल और समझ में आने योग्य होना भी आवश्यक है?

RIGHT TO UNDERSTAND AI™

समझना आपका अधिकार है।

"जानकारी छिपी नहीं होनी चाहिए... समझ में आनी चाहिए।"

RIGHT TO UNDERSTAND AI™

समझना आपका अधिकार है।

क्या आपको भी इस सिस्टम ने इतना भटका दिया है कि अधिकार मांगना भी संघर्ष बन गया है?एक शिकायत...फिर दूसरी शिकायत...फिर नया ...
22/06/2026

क्या आपको भी इस सिस्टम ने इतना भटका दिया है कि अधिकार मांगना भी संघर्ष बन गया है?

एक शिकायत...

फिर दूसरी शिकायत...

फिर नया रेफरेंस नंबर...

फिर नया विभाग...

फिर नया अधिकारी...

और अंत में वही जवाब —

"पहले नियम मानिए, फिर शिकायत कीजिए।"

लेकिन सवाल यह है...

जब नागरिक से हर नियम, हर समय-सीमा और हर शर्त का पालन करवाया जाता है,

तो क्या संस्थाओं, कंपनियों, बैंकों, बीमा कंपनियों, अस्पतालों और सरकारी विभागों की भी उतनी ही जवाबदेही नहीं होनी चाहिए?

क्या जानकारी केवल उपलब्ध होना ही पर्याप्त है, या उसका स्पष्ट, सरल और समझ में आने योग्य होना भी आवश्यक है?

RIGHT TO UNDERSTAND AI™

समझना आपका अधिकार है।

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287, 2nd Floor
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