01/09/2026
नमस्ते दिव्या मैम।
मिर्ज़ापुर के लहुरीडीह गाँव में 75 साल बाद नल से पानी पहुँचाने से लेकर... उन सभी अधूरे पड़े प्रोजेक्ट्स को पूरा करने तक, जो सालों से अटके थे—आपने यह साबित किया कि जब नीयत साफ़ हो, तो प्रशासनिक सेवा का असल मतलब क्या होता है।
IIT, IIM और लंदन की जॉब छोड़कर जब आप देश वापस आई थीं, तब देश को आप जैसा अधिकारी मिला था। आपके काम ने हम जैसे न जाने कितने युवाओं को प्रेरित किया है।
आज जब आपके इस्तीफे (Resignation) की खबर आई, तो हर उस इंसान के मन में एक टीस उठी, जो ईमानदारी और समर्पण की कद्र करता है।
मैम, एक नागरिक के तौर पर मन में बस यही एक सवाल आता है—'देश को आप जैसे जांबाज़ और ईमानदार अधिकारियों की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है, फिर आपने यह पद छोड़ने का फैसला क्यों लिया?
हम जानते हैं कि प्रशासनिक पद आपके जीवन का एक अध्याय था, पूरा जीवन नहीं... और समाज के लिए आपका योगदान आगे भी जारी रहेगा। लेकिन आपके इस कार्यकाल की कमी हमेशा खलेगी।
आपके इस फैसले का हम सम्मान करते हैं, लेकिन देश आपसे इस सवाल का जवाब ज़रूर सुनना चाहता है।
भविष्य के आपके हर नए सफर के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ, मैम!
जय हिंद।
Divya Mittal 🙏