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✨ मुख्य द्वार वास्तु मास्टर सीरीज़ 🏡🚪Day – 8 : N–5 से N–8 पद (उत्तर दिशा का शुद्ध व संतुलित विश्लेषण)🧭 उत्तर दिशा = धन, ...
16/04/2026

✨ मुख्य द्वार वास्तु मास्टर सीरीज़ 🏡🚪
Day – 8 : N–5 से N–8 पद (उत्तर दिशा का शुद्ध व संतुलित विश्लेषण)

🧭 उत्तर दिशा = धन, अवसर और करियर वृद्धि
👉 कुबेर की दिशा – समृद्धि और अवसरों का मुख्य प्रवेश द्वार

🔍 पदों का सही व संतुलित विश्लेषण:

✔️ N–5 – “सोम पद” (Soma)

✔ धार्मिक प्रवृत्ति और शांत स्वभाव
✔ मानसिक शांति और संतुलन
✔ परिवार में सामंजस्य
💡 मुख्य द्वार के लिए अच्छा और सुरक्षित विकल्प

❌ N–6 – “भुजंग पद” (Bhujang)

❌ स्वभाव में कठोरता या असहयोग
❌ लोगों से मतभेद और दूरी
❌ पुत्र से विचारों में टकराव संभव
💡 मुख्य द्वार के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता

⚖️ N–7 – “अदिति पद” (Aditi)

✔ स्वतंत्र सोच और व्यक्तित्व विकास
❌ पारंपरिक मान्यताओं से अलग चलने की प्रवृत्ति
❌ परिवार में विचारों का टकराव संभव
💡 मिश्रित परिणाम – सावधानी से चयन करें

✔️ N–8 – “दिति पद” (Diti)

✔ धन संचय और बचत में वृद्धि
✔ आर्थिक स्थिरता
❌ अधिक भौतिकता की प्रवृत्ति
💡 मुख्य द्वार के लिए अच्छा विकल्प

🌟 निष्कर्ष (Expert Insight):

👉 उत्तर दिशा में हर पद समान फल नहीं देता

✔ Best Options:
👉 N–3, N–4, N–5

✔ Good Option:
👉 N–8

⚖️ Avoid / Careful:
👉 N–6, N–7

✨ अंतिम सत्य:

👉 सही पद = संतुलन + समृद्धि + स्थिरता
👉 गलत पद = मतभेद + तनाव + रुकावट

➡️ Next (Day – 9):
👉 पूर्व दिशा (E–1 से E–4 पद) का गहन विश्लेषण

👉 अगर यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो
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✍️ नेमीचंद गोविंदराम सैनी
🏡 वास्तु एवं भवन निर्माण सलाहकार

#मुख्यद्वार

16/04/2026

मेरी प्यारी नातिन सिद्धिका को तीसरे जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🎉🎂
तुम हमारे जीवन की सबसे अनमोल खुशी हो।
ईश्वर तुम्हें सदा सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु बनाए रखे।

ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद ❤️

नेमीचंद गोविंदराम सैनी
वास्तु एवं भवन निर्माण सलाहकार

14/04/2026

☀️🌿 गर्मी में दया का संदेश 🌿☀️

तपिया सूरज जेठ सा, वैशाख विकराल ।
परिंडा पाणी सूं भरो, जीव जंत खुशहाल ॥

🔥 वैशाख–जेठ की तपती गर्मी में जब सूरज आग बरसाता है,
तब बेबस पक्षी और छोटे जीव पानी के लिए तड़पते हैं...

💧 ऐसे समय में हमारा एक छोटा सा प्रयास —
घर के बाहर परिंडा (पानी का बर्तन) रखना —
कई जीवों के लिए जीवनदान बन सकता है 🙏

❤️ आइए संकल्प लें:
✔ रोज़ ताजा पानी भरेंगे
✔ पक्षियों और जानवरों का ध्यान रखेंगे
✔ प्रकृति के प्रति अपना कर्तव्य निभाएंगे

🌱 छोटी सेवा, बड़ा पुण्य 🌱

नेमीचंद गोविंदराम सैनी
वास्तु एवं भवन निर्माण सलाहकार

IndianSummer GoodDeeds KindnessMatters

✨ न्याय, समानता और प्रगति ✨ये केवल शब्द नहीं, बल्कि एक सशक्त और समरस समाज की आधारशिला हैं।ने अपने विचारों, संघर्ष और संव...
14/04/2026

✨ न्याय, समानता और प्रगति ✨
ये केवल शब्द नहीं, बल्कि एक सशक्त और समरस समाज की आधारशिला हैं।

ने अपने विचारों, संघर्ष और संविधान निर्माण के माध्यम से हमें एक ऐसी दिशा दी, जहाँ हर व्यक्ति को समान अधिकार, सम्मान और अवसर मिल सके। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा, आत्मसम्मान और दृढ़ संकल्प से हम किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं।

आज के इस पावन अवसर पर, आइए हम संकल्प लें कि उनके दिखाए मार्ग पर चलकर समाज में न्याय, समानता और भाईचारे को और मजबूत बनाएंगे।

🌼 अंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं! 🌼

— नेमीचंद गोविंदराम सैनी
वास्तु एवं भवन निर्माण सलाहकार 🏡

14/04/2026

🌹 वास्तु टिप्स: भोजन और स्वास्थ्य (Food & Health) 🌹
🧭 बैठकर भोजन करने का महत्व 💯

✨ दोहे का संदेश
धरती पर आसन बिछा, बैठो सुघड़ सुजान।
पाचन शक्ति प्रबल रहे, बढ़े तन का मान।।

👉 दोहे का गहरा अर्थ
भोजन करते समय जमीन पर आसन बिछाकर सुखपूर्वक बैठना चाहिए। यह हमारी परंपरा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

💡 क्या समझें?
✔ जमीन पर बैठकर भोजन करने से पाचन क्रिया बेहतर होती है
✔ शरीर का संतुलन और रक्त संचार सही रहता है
✔ यह मुद्रा (Posture) शरीर को सक्रिय और मजबूत बनाती है

🌿 वैज्ञानिक दृष्टि से लाभ:
👉 सुखासन में बैठकर भोजन करने से
✔ पेट पर हल्का दबाव बनता है, जिससे पाचन सुधरता है
✔ Mind-Body connection मजबूत होता है

✨ याद रखें:
“सही तरीके से किया गया भोजन ही असली पोषण देता है।”

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✍️ नेमीचंद गोविंदराम सैनी
🏡 वास्तु एवं भवन निर्माण सलाहकार

✨ मुख्य द्वार वास्तु मास्टर सीरीज़ 🏡Day – 7 : N–1 से N–4 पद (उत्तर दिशा का गहन विश्लेषण)🧭 उत्तर दिशा = धन, अवसर और करियर...
14/04/2026

✨ मुख्य द्वार वास्तु मास्टर सीरीज़ 🏡Day – 7 : N–1 से N–4 पद (उत्तर दिशा का गहन विश्लेषण)

🧭 उत्तर दिशा = धन, अवसर और करियर वृद्धि
👉 कुबेर की दिशा – आर्थिक प्रवाह और अवसरों को प्रभावित करती है

🔍 पदों का सरल व प्रभावी विश्लेषण:

❌ N–1 – “रोग पद”

❌ शत्रु परेशानी
❌ महिलाओं को घर से दूर रखता है
✔️ विदेश यात्रा के अवसर
💡 अस्थिर और नकारात्मक प्रभाव

❌ N–2 – “नाग पद”

❌ शत्रु वृद्धि
❌ भय और तनाव
❌ ईर्ष्या की भावना
💡 धीमी प्रगति और मानसिक दबाव

✔️ N–3 – “मित्र पद”

✔ धन का स्थिर आगमन
✔ करियर ग्रोथ
✔ पुत्र लाभ
💡 संतुलित और सकारात्मक ऊर्जा

✔️ N–4 – “भल्लाट पद” ⭐

✔ अचानक धन लाभ
✔ उत्तराधिकार संपत्ति
✔ मान-सम्मान व पहचान
💡 सबसे शुभ “गोल्डन एंट्री”

🌟 निष्कर्ष (Expert Insight):

👉 मुख्य द्वार का चयन केवल दिशा से नहीं, बल्कि
✔ दिशा + वास्तु चक्र + ब्रह्मस्थान + पद
👉 = सफलता का सही द्वार 🚪✨

✨ अंतिम सत्य:

👉 गलत द्वार = संघर्ष
👉 सही द्वार = सफलता

➡️ Next (Day – 8):
👉 N–5 से N–8 पद का गहन विश्लेषण

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✍️ नेमीचंद गोविंदराम सैनी
🏡 वास्तु एवं भवन निर्माण सलाहकार

#मुख्यद्वार

✨ मुख्य द्वार वास्तु मास्टर सीरीज़ 🏡🚪Day – 6: मुख्य द्वार निर्धारित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया (विस्तृत मार्गदर्शन)👉 अब...
13/04/2026

✨ मुख्य द्वार वास्तु मास्टर सीरीज़ 🏡🚪
Day – 6: मुख्य द्वार निर्धारित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया (विस्तृत मार्गदर्शन)

👉 अब तक आपने जो भी सीखा — दिशा, ब्रह्मस्थान, वास्तु चक्र और पद —
उन सभी का वास्तविक उपयोग इसी चरण में होता है।
यहीं से तय होता है कि आपका मुख्य द्वार वास्तव में शुभ है या नहीं।

✔ स्टेप-बाय-स्टेप निर्णय प्रक्रिया (गहराई से समझें):

1️⃣ दिशा निर्धारित करें

👉 सबसे पहले कम्पास या डिजिटल टूल से
✔ सटीक उत्तर दिशा (True North) निर्धारित करें

💡 ध्यान रखें:
गलत दिशा = पूरा विश्लेषण गलत

2️⃣ नक्शे को सेट करें

👉 आपके प्लॉट या भवन के नक्शे को
✔ सही दिशा के अनुसार align (स्थापित) करें

💡 यह आधार है —
अगर नक्शा सही सेट नहीं हुआ, तो आगे की सारी गणना बेकार हो जाएगी

3️⃣ ब्रह्मस्थान निर्धारित करें

👉 पूरे भवन का केंद्र बिंदु (Center Point) निकालें
✔ यही “ब्रह्मस्थान” होता है

💡 यही वह स्थान है जहाँ से
👉 पूरे घर में ऊर्जा का प्रवाह होता है

4️⃣ वास्तु चक्र लगाएं

👉 अब पूरे प्लान पर
✔ 8×8 = 64 भागों का वास्तु चक्र (Grid) लगाएं

💡 यह केवल बॉक्स नहीं हैं,
👉 हर भाग एक अलग ऊर्जा क्षेत्र (Energy Zone) है

5️⃣ 32 पदों की पहचान करें

👉 बाहरी परिधि (Outer Boundary) पर
✔ 32 द्वार पद (Door Positions) होते हैं

💡 हर पद का अपना प्रभाव होता है:
👉 कुछ पद धन, सफलता और अवसर देते हैं
👉 कुछ पद रोग, बाधा और तनाव ला सकते हैं

6️⃣ शुभ पद का चयन करें

👉 अब सबसे महत्वपूर्ण चरण:
✔ मुख्य द्वार के लिए सही (शुभ) पद चुनना

💡 ध्यान रखें:
👉 हर दिशा में कुछ अच्छे और कुछ खराब पद होते हैं
👉 इसलिए “उत्तर या पूर्व” ही देखना पर्याप्त नहीं है

💡 स्वर्ण नियम (Golden Rule):

👉 मुख्य द्वार हमेशा
✔ सकारात्मक ऊर्जा वाले पद (Auspicious Zone) में ही होना चाहिए

❌ केवल दिशा देखकर निर्णय लेना
👉 सबसे बड़ी और सामान्य गलती है

⚠️ सामान्य गलतियाँ (जो अक्सर लोग करते हैं):

❌ सिर्फ उत्तर या पूर्व देखकर दरवाजा बना लेना
❌ वास्तु चक्र लगाए बिना निर्णय लेना
❌ ब्रह्मस्थान को नजरअंदाज करना
❌ नक्शे को गलत दिशा में सेट करना

👉 ये छोटी गलतियाँ
👉 बड़े नकारात्मक परिणाम दे सकती हैं

📌 निष्कर्ष:

👉 “सही प्रक्रिया ही सही परिणाम देती है”

✔ वास्तु कोई अनुमान नहीं,
👉 यह एक वैज्ञानिक और चरणबद्ध प्रणाली (Systematic Science) है

✔ जब आप हर स्टेप को सही तरीके से अपनाते हैं,
👉 तब ही मुख्य द्वार वास्तव में शुभ और फलदायक बनता है

➡️ अगला भाग (Day – 7):
👉 दिशानुसार 32 पदों का गहन विश्लेषण
✔ कौन सा पद किस

✨ मुख्य द्वार वास्तु मास्टर सीरीज़ 🏡🚪Day – 5: पद विन्यास – वास्तु चक्र के अनुसार सही निर्माण👉 केवल 9×9 = 81 भागों में वि...
10/04/2026

✨ मुख्य द्वार वास्तु मास्टर सीरीज़ 🏡🚪
Day – 5: पद विन्यास – वास्तु चक्र के अनुसार सही निर्माण

👉 केवल 9×9 = 81 भागों में विभाजन करना ही पर्याप्त नहीं है
👉 उसे वास्तु चक्र के अनुसार सही दिशा और विधि से स्थापित करना अत्यंत आवश्यक है

✔ सही प्रक्रिया (Step-by-Step):

1️⃣ कम्पास से सटीक उत्तर दिशा निर्धारित करें
2️⃣ नक्शे को उसी दिशा के अनुसार सही रूप में सेट करें
3️⃣ निर्माण क्षेत्र (Plot/Building Area) को स्पष्ट रूप से चिन्हित करें
4️⃣ उसका सटीक ब्रह्मस्थान (Center Point) निर्धारित करें
5️⃣ अब उस पर वास्तु चक्र (Grid System) लागू करें
6️⃣ पूरे क्षेत्र को 9×9 = 81 समान भागों में विभाजित करें

📊 संरचना को समझें:

✔ मध्य के 9 भाग → ब्रह्मस्थान (Energy Center)
✔ बाहरी 32 पद → मुख्य द्वार एवं बाहरी ऊर्जा प्रवेश के प्रमुख क्षेत्र
✔ चारों मुख्य दिशाएँ → ऊर्जा का प्रवाह (Energy Flow)
✔ चारों कोने → ऊर्जा परिवर्तन बिंदु (Transformation Zones)

💡 महत्वपूर्ण नियम:

✔ सभी भाग समान आकार के हों
✔ ग्रिड सीधा और दिशानुसार हो
✔ केंद्र (ब्रह्मस्थान) बिल्कुल सटीक हो

❌ तिरछा, असमान या अनुमान आधारित ग्रिड न बनाएं

📌 निष्कर्ष:

👉 “सही पद विन्यास ही सही वास्तु निर्णय की कुंजी है”
👉 विशेषतः बाहरी 32 पद मुख्य द्वार निर्धारण में अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं

➡️ अगला भाग (Day – 6):
🔜 मुख्य द्वार निर्धारित करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया

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✍️ नेमीचंद गोविंदराम सैनी
🏡 वास्तु एवं भवन निर्माण सलाहकार

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