माँ भारती

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 #संत_रविदास_जयंतीआज माघ की पूर्णिमा है, आज ही के दिन 1398 ई. में धर्म की नगरी काशी में संत रविदास जी का जन्म हुआ था। रव...
10/02/2017

#संत_रविदास_जयंती

आज माघ की पूर्णिमा है, आज ही के दिन 1398 ई. में धर्म की नगरी काशी में संत रविदास जी का जन्म हुआ था। रविदास जी को रैदास जी के नाम से भी जाना जाता है। इनके माता-पिता चर्मकार थे। इन्होंने अपनी आजीविका के लिए पैतृक कार्य को अपनाया लेकिन इनके मन में भगवान की भक्ति पूर्व जन्म के पुण्य से ऐसी रची बसी थी कि, आजीविका को धन कमाने का साधन बनाने की बजाय संत सेवा का माध्यम बना लिया।
संत और फकीर जो भी इनके द्वार पर आते उन्हें बिना पैसे लिये अपने हाथों से बने जूते पहनाते। इनके इस स्वभाव के कारण घर का खर्च चलाना कठिन हो रहा था। इसलिए इनके पिता ने इन्हें घर से बाहर अलग रहने के लिए जमीन दे दिया। जमीन के छोटे से टुकड़े में रविदास जी ने एक कुटिया बना लिया। जूते बनाकर जो कमाई होती उससे संतों की सेवा करते इसके बाद जो कुछ बच जाता उससे अपना गुजारा कर लेते थे।
एक दिन एक ब्राह्मण इनके द्वार आये और कहा कि गंगा स्नान करने जा रहे हैं एक जूता चाहिए। इन्होंने बिना पैसे लिया ब्राह्मण को एक जूता दे दिया । इसके बाद एक सुपारी ब्राह्मण को देकर कहा कि, इसे मेरी ओर से गंगा मैया को दे देना। ब्राह्मण रविदास जी द्वारा दिया गया सुपारी लेकर गंगा स्नान करने चल पड़ा। गंगा स्नान करने के बाद गंगा मैया की पूजा की और जब चलने लगा तो अनमने मन से रविदास जी द्वारा दिया सुपारी गंगा में उछाल दिया। तभी एक चमत्कार हुआ गंगा मैया प्रकट हो गयीं और रविदास जी द्वारा दिया गया सुपारी अपने हाथ में ले लिया। गंगा मैया ने एक सोने का कंगन ब्राह्मण को दिया और कहा कि इसे ले जाकर रविदास को दे देना।
ब्राह्मण भाव विभोर होकर रविदास जी के पास आया और बोला कि आज तक गंगा मैया की पूजा मैने की लेकिन गंगा मैया के दर्शन कभी प्राप्त नहीं हुए। लेकिन आपकी भक्ति का प्रताप ऐसा है कि गंगा मैया ने स्वयं प्रकट होकर आपकी दी हुई सुपारी को स्वीकार किया और आपको सोने का कंगन दिया है। आपकी कृपा से मुझे भी गंगा मैया के दर्शन हुए। इस बात की ख़बर पूरे काशी में फैल गयी। रविदास जी के विरोधियों ने इसे पाखंड बताया और कहा कि अगर रविदास जी सच्चे भक्त हैं तो दूसरा कंगन लाकर दिखाएं।
विरोधियों के कटु वचनों को सुनकर रविदास जी भक्ति में लीन होकर भजन गाने लगे। रविदास जी चमड़ा साफ करने के लिए एक बर्तन में जल भरकर रखते थे। इस बर्तन में रखे जल से गंगा मैया प्रकट हुई और दूसरा कंगन रविदास जी को भेंट किया। रविदास जी के विरोधियों का सिर नीचा हुआ और संत रविदास जी की जय-जयकार होने लगी। इसी समय से यह दोहा प्रसिद्ध हो गया। 'मन चंगा तो कठौती में गंगा।'

साभार: #संस्कार

देश की गौरवशाली नायिका रानी पद्मिनी को प्रणाम
04/02/2017

देश की गौरवशाली नायिका रानी पद्मिनी को प्रणाम

20/10/2016

ा_चौघड़िया - 20 नवंबर 2016
चर - 08:11 - 09:29
लाभ - 09:29 - 10:48
अमृत - 10:48 - 12:07
शुभ - 13:25 - 14:44

20/10/2016

#सुविचार

लापरवाही अक्सर अज्ञानता से भी ज्यादा क्षति पहुंचाती है।

20/10/2016

ा_पंचांग:

दिनांक - 20 अक्टूबर 2016
दिन - बृहस्पतिवार
विक्रम संवत - 2073
शक संवत - 1938
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - शरद
मास - कार्तिक
पक्ष - कृष्ण पक्ष
तिथि - दोपहर 4:46 तक पंचमी तदुपरांत षष्ठी
नक्षत्र - मृगशिरा
योग - परिघ
दिशाशूल - दक्षिण, दक्षिण पूर्व
सूर्योदय - 06:28
सूर्यास्त 17:42
राहुकाल - 13:30-15:00
अभिजीतमुहूर्त - 11:43 - 12:28

18/10/2016

ा_चौघड़िया - 19 अक्टूबर 2016

लाभ - 06:28 - 07:53
अमृत - 07:53 - 09:17
शुभ - 10:41 - 12:06
चर - 14:55 - 16:19
लाभ - 16:19 - 17:43

18/10/2016

ा_सुविचार - मनुष्य एक सीढ़ी है। वह नीचे गिरकर पशु भी हो सकता है और ऊपर उठकर प्रभु भी।

18/10/2016

ा_पंचांग:
दिनांक - 19 अक्टूबर 2016
दिन - बुधवार
विक्रम संवत - 2073
शक संवत - 1938
अयन - दक्षिणायन
ऋतु - शरद
मास - कार्तिक
पक्ष - कृष्ण पक्ष
तिथि - सायं 7:32 तक चतुर्थी तदुपरांत पंचमी
नक्षत्र - रोहिणी
योग - व्यतिपात
दिशाशूल - उत्तर, उत्तर पूर्व
सूर्योदय - 06:28
सूर्यास्त 17:43
राहुकाल - 12:00-13:30
अभिजीतमुहूर्त - -

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