25/05/2026
बड़ा सच: देश का किसान कर्जदार नहीं है? बल्कि यह पूरी व्यवस्था किसान की देनदार है?
सालों से हमें यह नैरेटिव (झूठ) बताया जा रहा है? कि देश के किसान कर्ज में डूबे हैं?
और सरकारें उन पर 'कर्ज माफी' का अहसान करती हैं?
लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्था OECD की रिपोर्ट ने इस सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है?
हकीकत यह है कि कर्जदार किसान नहीं, बल्कि यह सिस्टम है?
📊 आइए समझते हैं
"किसान का असली गणित":
👉 व्यवस्था द्वारा लूटा गया पैसा? (कुल घाटा): ₹110 लाख करोड़ OECD की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2000 से 2025 के बीच सरकार की गलत नीतियों (अचानक निर्यात बैन लगाना, C2+50% के हिसाब से MSP न देना) के कारण देश के किसानों को ₹110 लाख करोड़ का भारी नुकसान हुआ है?। यह वो पैसा है जो किसान कमा सकते थे, लेकिन सिस्टम ने सोख लिया?।
👉 किसानों पर थोपा गया वर्तमान कर्ज: ₹33 लाख करोड़ आज सरकार कहती है कि किसानों पर बैंकों का ₹33 लाख करोड़ बकाया है?।
⚖️ हिसाब बराबर करने का न्याय (Doctrine of Set-off):
अगर बड़े कॉर्पोरेट घरानों का हिसाब 'सेट-ऑफ' (लेन-देन एडजस्ट करना) के जरिए हो सकता है, तो अन्नदाता का क्यों नहीं?
अगर सरकार का गणित सच्चा है, तो वह 110 लाख करोड़ के नुकसान में से अपने 33 लाख करोड़ का कर्ज खुद काट ले?!
💰 शुद्ध बकाया जो किसानों को मिलना चाहिए?: ₹77 लाख करोड़?! (110 - 33 = 77)
यह ₹77 लाख करोड़ रुपये कोई खैरात या कर्ज माफी नहीं है?!
यह किसानों का अपना कमाया हुआ पैसा है?। इसमें किसान के उस असीमित पारिवारिक श्रम और मानसिक प्रताड़ना का तो कोई मोल ही नहीं जोड़ा गया है?,
जो उन्होंने इन 25 सालों में झेली है?।
अब समय आ गया है कि सरकार 'लोन माफी' का झूठा अहसान जताना बंद करे।?
व्यवस्था अपना हिसाब चुकता करे और अन्नदाता को उसका हक़ तुरंत वापस दे?! इस कड़वे सच को हर देशवासी और हर किसान तक पहुँचाएं। इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और 'नैतिक न्याय' के लिए अपनी आवाज़ उठाएं! 📢🌾
#अन्नदाता_का_हिसाब