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Srote यह पत्रिका एकलव्य(www.eklavya.in) द्वारा प्रकाशित की जाती है।

चमकते मशरूम से रोशनी देने वाले पौधे बनाने का सफरकल्पना कीजिए, रात के घने अंधेरे में सड़क के किनारे लगे पेड़-पौधे बिना कि...
13/05/2026

चमकते मशरूम से रोशनी देने वाले पौधे बनाने का सफर
कल्पना कीजिए, रात के घने अंधेरे में सड़क के किनारे लगे पेड़-पौधे बिना किसी बिजली या तार के एक हल्की, सुकून देने वाली रोशनी बिखेर रहे हों। आधुनिक वनस्पति विज्ञान और जेनेटिक इंजीनियरिंग ने इस कल्पना को हकीकत में बदलना शुरू कर दिया है। यह जानना बेहद दिलचस्प होगा कि कैसे प्रयोगशालाओं में आज ‘बायोलुमिनेसेंट' (जैव-संदीप्त) पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जो भविष्य में हमारी ऊर्जा ज़रूरतों का एक हरा-भरा विकल्प बन सकते हैं।
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गैलीलियो की हस्तलिखित टिप्पणियों से एक विचार प्रक्रिया पर रोशनीहाल ही में हुई एक खोज से इस बात पर नई रोशनी पड़ी है कि गै...
12/05/2026

गैलीलियो की हस्तलिखित टिप्पणियों से एक विचार प्रक्रिया पर रोशनी
हाल ही में हुई एक खोज से इस बात पर नई रोशनी पड़ी है कि गैलीलियो गैलीली एक वैज्ञानिक क्रांति के अगुआ कैसे बने। यह खोज एक इतिहासकार इवान मलारा ने फ्लोरेंस स्थित इटली की नेशनल सेंट्रल लायब्रेरी में की है। मलारा उस पुस्तकालय में दुनिया की सबसे प्राचीन खगोल शास्त्रीय पुस्तक के पन्ने पलट रहे थे। यह पुस्तक थी क्लॉडियस टोलेमी द्वारा दूसरी शताब्दी में लिखी गई अल्माजेस्ट।
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वन्यजीव व्यापार से बढ़ता संक्रमण का खतराआंकड़ों से पता चलता है कि स्तनधारियों की ही 2000 से अधिक (वन्य) प्रजातियों का का...
10/05/2026

वन्यजीव व्यापार से बढ़ता संक्रमण का खतरा
आंकड़ों से पता चलता है कि स्तनधारियों की ही 2000 से अधिक (वन्य) प्रजातियों का कानूनी और गैर-कानूनी दोनों तरीकों से व्यापार किया जाता है। ज़ाहिर है इस व्यापार से वन्यजीवों का मनुष्य से संपर्क बढ़ा है। अब, एक हालिया अध्ययन में पता चला है कि वर्तमान में व्यापार किए जा रहे वन्य स्तनधारी जीवों में से लगभग आधे ऐसे हैं जिनमें कम से कम एक ऐसा रोगजनक है जो मनुष्यों को संक्रमित कर सकता है। यानी वन्यजीवों का व्यापार हमारी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। यह पहली बार है जब बड़े स्तर पर यह समझने की कोशिश की गई है कि वन्य-जीव व्यापार और तस्करी बीमारियों के फैलाव से कितने जुड़े हैं।
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चींटियों का एक अनूठा सम्बंधदिन-रात मेहनत करने वाली चींटियां एकता और परस्पर ताल-मेल बनाकर अपने समूह के साथ वफादारी से काम...
08/05/2026

चींटियों का एक अनूठा सम्बंध
दिन-रात मेहनत करने वाली चींटियां एकता और परस्पर ताल-मेल बनाकर अपने समूह के साथ वफादारी से काम करती हैं। उन्हें दूसरे समूह की दखलंदाज़ी बिल्कुल नहीं भाती — लगभग हर समय वे दूसरे समूह के प्रति आक्रामक बर्ताव ही करती हैं| हालांकि चींटियां माहू (पौधों का रस चूसने वाले कीट, जिसे तेला या चेपा भी कहते हैं) के साथ साझेदारी का सम्बंध रखती हैं, क्योंकि माहू चींटियों को शहद जैसा चिपचिपा अपशिष्ट पदार्थ ‘हनीड्यू’ भोजन के रूप में देते हैं, वहीं बदले में चींटियां गुबरैला जैसे शिकारियों से उनकी रक्षा करती हैं और अन्य भोजन के स्थानों तक पहुंचाती हैं; कभी तो सर्दियों में आवास भी देती हैं।
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नैनोप्लास्टिक हटाने में मदद करेंगे नैनोरोबोटप्लास्टिक कचरा खत्म नहीं होता। बल्कि यह धीरे-धीरे बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में...
06/05/2026

नैनोप्लास्टिक हटाने में मदद करेंगे नैनोरोबोट
प्लास्टिक कचरा खत्म नहीं होता। बल्कि यह धीरे-धीरे बहुत छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता जाता है, जिन्हें नैनोप्लास्टिक कहते हैं। ये कण नदियों, समुद्रों यहां तक कि मानव शरीर में भी मिल रहे हैं, जो कैंसरकारी भी हो सकते हैं। ये इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें हटाना बहुत मुश्किल काम रहा है। लेकिन अब एक नया चुंबक-चालित नैनोरोबोट तैयार किया गया है जो इस समस्या से निपटने में मदद कर सकता है।
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जन-आंदोलन के रूप में स्वास्थ्य सेवा: शहीद अस्पताल लौह अयस्क की लाल धूल से ढंकी हुई दल्ली राजहरा की सड़कों को देखकर ऐसा ल...
19/04/2026

जन-आंदोलन के रूप में स्वास्थ्य सेवा: शहीद अस्पताल

लौह अयस्क की लाल धूल से ढंकी हुई दल्ली राजहरा की सड़कों को देखकर ऐसा लगता है जैसे समय कहीं ठहर सा गया हो। इस छोटे से शहर में रहने और सांस लेने के कुछ ही पलों बाद एक अजीब से विलगाव का एहसास होना तय है। इसमें जब उस मज़दूर आंदोलन, जिसने लगभग आधी सदी से इस शहर को आकार दिया है, की कहानी जुड़ जाती है तो दंतकथा बनना तय है। इस इतिहास का जीता-जागता साक्षी है शहीद अस्पताल। यह अस्पताल, जिसे मज़दूरों ने मज़दूरों के लिए बनाया था, जिसकी एक-एक ईंट मज़दूरों के योगदान से आई थी, एक असाधारण दौर की याद दिलाता है।
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कुत्ते कब पालतू बने? चाहे गांव हो या शहर, ऐसा कोई गली-मोहल्ला नहीं होगा जहां कुत्ते दिखाई न दें। जहां-जहां मनुष्यों की आ...
17/04/2026

कुत्ते कब पालतू बने?

चाहे गांव हो या शहर, ऐसा कोई गली-मोहल्ला नहीं होगा जहां कुत्ते दिखाई न दें। जहां-जहां मनुष्यों की आबादी है, कुत्ते वहां-वहां दिख ही जाते हैं। आजकल तो ऐसी खबरें भी सुनने को मिलती हैं कि गली में घूमते कुत्ते कुछ ज़्यादा ही आक्रामक हो गए हैं, और लोग गली के कुत्तों से थोड़ा कतराने लगे हैं। लेकिन कभी कुत्ते मनुष्यों के लिए बहुत खास हुआ करते थे। सुरक्षा से लेकर रास्तों की पहचान तक में वे काम आते थे। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि आज कुत्तों का कोई महत्व नहीं रहा। लोग प्रेमवश उन्हें पालते हैं; पुलिस नशीले पदार्थों को ढूंढने में, लोगों की पहचान करने में, ढूंढने में कुत्तों की मदद लेती है; लोगों के सहायकों के रूप में भी वे काम आते हैं।

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आधुनिक टेक्नॉलॉजी के चालक: दुर्लभ मृदा तत्वमानव इतिहास में विभिन्न रासायनिक तत्व समय-समय पर महत्वपूर्ण रहे हैं। रासायनिक...
15/04/2026

आधुनिक टेक्नॉलॉजी के चालक: दुर्लभ मृदा तत्व

मानव इतिहास में विभिन्न रासायनिक तत्व समय-समय पर महत्वपूर्ण रहे हैं। रासायनिक तत्वों के अहम होने से पहले हम लकड़ी-पत्थर के औज़ारों पर निर्भर थे। उस काल को पाषाण युग कहते हैं। इसे भी पत्थरों के प्रकारों और उनके उपयोग के आधार पर पुरा-पाषाण और नव-पाषाण काल में विभाजित किया जाता है। पहली बार धातुओं का उपयोग शुरू हुआ था कांसे के साथ और यह कहलाया कांस्य युग। उसके बाद बाद आता है लौह युग। कांसा तांबे और टिन की मिश्रधातु यानी एलॉय है जबकि लोहा एक शुद्ध धातु है। कांसा और लोहा से बने औज़ारों ने खेती में क्रांति कर दी थी। इसके अलावा लोहा हथियारों में भी उपयोगी साबित हुआ।
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शराब कम करने में मददगार हार्मोन यूं तो किसी भी जश्न की जान होते हैं उससे जुड़े व्यंजन। लेकिन जश्न मनाने का एक चलन ‘पार्ट...
14/04/2026

शराब कम करने में मददगार हार्मोन

यूं तो किसी भी जश्न की जान होते हैं उससे जुड़े व्यंजन। लेकिन जश्न मनाने का एक चलन ‘पार्टी’ करने का भी है, जिसमें लोग शौकिया शराब पीते हैं। हज़ारों सालों से मद्यपान की प्रवृत्ति मनुष्य ने दिखाई है और यदा-कदा त्यौहारों या जश्न में शराब पी जाती है। जैसे होली, शिवरात्रि में भांग तो घोटी जाती है लेकिन आजकल शराब की ओर भी काफी रुझान है। ऐसा ही एक सामूहिक जश्न अक्टूबरफेस्ट जर्मनी में मनाया जाता है, जिसमें लोग कई दिनों तक छककर शराब पीते हैं। लेकिन पीने की भी एक हद होती है, जिसके बाद पीने वाला कहता है अब बस। लेकिन ऐसा किसी को पता कब और कैसे चलता है कि बस अब बहुत पी ली है, अब और नहीं?
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चांद पर आलू उगाने के प्रयास चंद्रमा पर फसल उगाने का विचार, जो पहले सिर्फ विज्ञान-कथाओं का विषय था, अब धीरे-धीरे सच के कर...
12/04/2026

चांद पर आलू उगाने के प्रयास

चंद्रमा पर फसल उगाने का विचार, जो पहले सिर्फ विज्ञान-कथाओं का विषय था, अब धीरे-धीरे सच के करीब आ रहा है। एक नए अध्ययन में पाया गया है कि आलू, जो बहुत आसानी से अलग-अलग परिस्थितियों में उग सकता है, चंद्रमा पर भी उग सकता है लेकिन इसके लिए पृथ्वी से कुछ मदद ज़रूरी होगी। इससे यह विश्वास पैदा होता है कि भविष्य में अंतरिक्ष यात्री लंबे मिशनों के दौरान अपना भोजन खुद उगा सकेंगे।
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पारंपरिक दवाओं की प्रभाविता पर जांच हालिया दिनों में चीन ने अपनी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को वैज्ञानिक तरीके से परखने क...
10/04/2026

पारंपरिक दवाओं की प्रभाविता पर जांच

हालिया दिनों में चीन ने अपनी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को वैज्ञानिक तरीके से परखने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। नए नियमों के तहत पारंपरिक चीनी चिकित्सा (TCM) के इंजेक्शन बनाने वाली कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उनके उत्पाद सुरक्षित हैं, असरदार हैं और उनका वैज्ञानिक आधार है। अगर ऐसा नहीं हो पाता, तो उनके उत्पाद बाज़ार से हटाए जा सकते हैं।
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