08/06/2024
ज़िंदगी में आके हर कोई काम कर रहा है ,
मै काम में अपनी ज़िंदगी तलाश रहा हूं.
लोग आंखों से दुनिया देख रहे हैं,
मै दुनिया में सिर्फ खुदको देख रहा हूं.
हर कोई यहां सवाल कर रहा है ,
मै उन सवालों के जवाब ढूंढ रहा हूं.
लोग मजहब के लिए औरों का गला काट रहे हैं,
मै तो अपना मजहब ढूंढ़ने में लगातार नाकाम हो रहा हूं.
सब दूसरे को गिराने के खेल में लगे हैैं ,
मै गिरकर संभलने का तरीका खोज रहा हूं.
आजकल किताबें डिजिटलाइज्ड हो रही हैं,
मै पुरानी किताबों से धूल झटक रहा हूं .
यहां इन्सान भगवान बनकर बैठें हैं,
मै इन्सान बनने की सोच रहा हूं.
सब बेहोश होके किसी मुकाबले में दौड़ रहे हैं ,
मै दूर खड़ा होके मुकाबले को समझने की कोशिश कर रहा हूं.