SNP Enviro Pvt. Ltd.

SNP Enviro Pvt. Ltd. SNP Enviro Pvt. Ltd. We are Mud House Contractor !

is into Construction of Mud house, Hobbit House, Wooden House , Bamboo House, Horticulture, Eco Tourism , Eco products, Total Farm House Development, Mud Eco Resorts !!

आज विश्व मृदा दिवस है । World Soil Day ! मिट्टी जो इस पूरे सृष्टि की जननी है ।  मिट्टी से ही हमें सब प्राप्त होता है । म...
05/12/2024

आज विश्व मृदा दिवस है ।
World Soil Day !
मिट्टी जो इस पूरे सृष्टि की जननी है । मिट्टी से ही हमें सब प्राप्त होता है ।
मिट्टी ही विभिन्न परिस्थितियों , वातावरण , दाब , तापमान से विकृत होकर विभिन्न धातुओं का निर्माण करती है ।
मिट्टी ही विभिन्न परिस्थितियों , वातावरण , दाब , तापमान से नियन्त्रित होकर भिन्न भिन्न प्रकार के पत्थरों , चट्टानों इत्यादि का निर्णाण करती है ।

जिसके पास यह मिट्टी है , उसके पास विश्व का समस्त अवयव उपलब्ध है ।
मिट्टी से आप सोना उगा सकते हैं । मिट्टी से ही धन धान्य की उपलब्धि होती है ।
विश्व का कोई ऐसा पदार्थ बतायें जो मिट्टी से न बना हो ।

पूरी पृथ्वी पर भिन्न भिन्न पदार्थ की मिट्टी पाई जाती है और प्रत्येक मिट्टी के गुण , धर्म , विशेषता अलग अलग है ।

मिट्टी के सम्पर्क में रहने वाले लोगों को कभी कोई बीमारी नहीं आती ।

मिट्टी चाहे सूखी हो या गीली , उसका किसी भी रोग प्रभावित अंग पर लेप करने से , वह उसके रोग को स्वयं अवशोषित कर लेती है ।

मिट्टी से जिनका संपर्क बना रहा , वह निरोगी रहेगा ।

मिट्टी से जिसका संपर्क टूटा , वह रोगी बना रहेगा और जीवन भर अशांत बना रहेगा ।

मिट्टी के पात्रों में भोजन बनाने वाले और करने वाले , आजीवन रोगों से बचे रहते हैं ।

मिट्टी से ही हम अन्न के द्वारा पोषण लेते हैं , जिससे वीर्य बनता है ,फिर जीव का निर्माण होता है और मृत्यु उपरांत फिर से सब कुछ मिट्टी में मिल जाता है ।

मिट्टी ही एक विचित्र प्राकृतिक मशीन जिन्हें हम पेड़ पौधे उत्पन्न करती है जो वातावरण, मिट्टी से लेकर सूर्य तक से ऊर्जा ग्रहण कर ( प्राकृतिक Solar Panel ) उसे विभिन्न पोषक तत्वों में फलों में पत्तों इत्यादि में डालकर हमारे लिए विभिन्न खाद्य पदार्थ बनाती है ।

मिट्टी के घरों में रहने वालों का जीवन रोगों से मुक्त हो जाता है ।
मिट्टी अपनी साँस लेती दीवारों से अंदर और बाहर दोनों वायु से जहरीले तत्वों ( Toxins ) को अवशोषित कर लेती है और Air Filter का कार्य करती है ।

मिट्टी के घरों में रहने वाले हमेशा Cool Cool रहते हैं । अंदर मानसिक स्थिति से भी और बाह्य वातावरण से भी ।

मिट्टी के घरों में रहने वाले ठंड़ीयों में भी Warm Warm रहते हैं । अंदर मानसिक स्थिति से भी और बाह्य वातावरण से भी ।
यही कारण है कि मिट्टी के घर लदाख जैसी ठंडी जगहों पर भी बनते हैं और राजस्थान की तपती गर्म जगहों पर भी मिट्टी के घर बनाये जाते हैं ।

सम्पूर्ण विश्व में एकमात्र मिट्टी ही ऐसा तत्व एवं पदार्थ है जिसका कोई EXPIRY DATE नहीं होती और इसका कोई Disintegration नहीं होता ।
क्योंकि विश्व का प्रत्येक तत्व मिट्टी से बना है और सब एक दिन disintegrate होकर मिट्टी ही बन जायेंगे ।

इसलिए आज भी लाखों वर्ष होने पर भी खुदाई में मृद भांड ( मिट्टी के बर्तन या उनसे बनी वस्तुएँ पाई जाती हैं )

सभी तत्व लोहा , सोना चाँदी से लेकर सभी धातुएँ जंग या उनका क्षरण होकर मिट्टी बन जायेगी लेकिन मिट्टी मिट्टी ही रहेगा , इसलिए मिट्टी अमर है ।

और किसी का हो न हो ,लेकिन मिट्टी में मिलकर मुझे बहुत कुछ प्राप्त हुआ है और मिट्टी ने मुझे सोना दिया है और मुझे भी सोना बना दिया है ।

लेकिन आज मृदा या मिट्टी में किसान , औद्योगिक लोगों ने ,मनुष्य ने अपने क्षणिक लाभ प्राप्त करने के लिए ज़हर डाल डाल कर इस अपनी ही माँ समान मिट्टी का वीभत्स बलात्कार कर रहा है ।

इस मिट्टी में इतना जहर , विष डाला जा रहा है कि आज विश्व का प्रत्येक जीव इसके दुष्परिणाम अनंत रोगों के माध्यम से भोग रहा है ।
सिर्फ बड़े बड़े और ज्यादा उत्पादन और चमकीले दिखने वाले फल सब्जियाँ अन्न जिसमें पोषक तत्व न के बराबर है , केवल उसके लिए मनुष्य इसका प्रतिदिन बलात्कार और हत्या कर रहा है ।
लेकिन इस मिट्टी की चीख पुकार किसी के कानों में नहीं सुनाई पड़ रही है ।

आज Chemical cement युक्त घरों ने , concrete के जंगलों से इस मिट्टी की साँसें घुट रही हैं ।

यह इसकी सांसें नहीं घुट रही हैं , यह सम्पूर्ण विश्व के प्रत्येक जीव की सांसें घुट रही हैं ।

यह प्रकृति देखते देखते जब नहीं सहन होगा तो हमारी इसी सभ्यता को जिसे आप विकसित कहते हैं ,लेकिन यह विकास नहीं विनाशकारी सभ्यता को मोहनजोदड़ों या मायन सभ्यता बनाने में समय नहीं लगाएगी ।

वह तो बस कातर दृष्टि और दया भाव से हमारी ओर निहार रही है कि ये मूर्ख अब संभल जायें तब सम्भल जायें , अगर नहीं सम्भले तो इस मिट्टी को पूरी पृथ्वी को मिट्टी में मिलाना आता है ।

बस ज्यादा नहीं , 2 minute का 12 रिचर स्केल का भूकम्प और सभी समुद्रों को एक होने की आज्ञा बस देनी है ।

इसलिए अपनी इस माँ के वस्त्रों अर्थात मिट्टी का सम्मान करना सीखिए , इसे विदीर्ण होने से बचाईये , अपनी मिट्टी से सम्पर्क बढ़ाइए , औरों को प्रेरित करिये कि वह मिट्टी से हर माध्यम से जुड़ें और इस मिट्टी का सम्मान , ताज़गी , वह शुचिता पुनः लौटाएँ ।

अरे यह मिट्टी नहीं सोना है सोना । हीरा मोती से लेकर जो आप चाहते हैं , सब इससे मिलेगा , बस इसका समुद्र मंथन की तरह मिट्टी मंथन करना होगा ।

मुझे तो मिट्टी ने सब कुछ दिया है । एक समय था जब मेरा जीवन अंधकारमय बन गया था , लेकिन मैंने अपनी माँ के आँचल ( मिट्टी ) का सहारा लिया और आज मुझे मिट्टी वह दे रही है जो अवर्णनीय है ।
बस इतना कहूँगा कि मिट्टी ने मुझे सोना बनाया है ।

आप भी मिट्टी से जुड़िये और स्वर्ण बनने की दिशा में प्रशस्त होईये ।

मिट्टी को बचाईये । विनम्र निवेदन है कि हर प्रकार से मिट्टी से जुड़िये ।

मिट्टी में वह शक्ति है जो आपको सोना हीरा मोती सब बना देगी ।

मृदा दिवस् की हार्दिक शुभकामनाएं ।

SNP Enviro Pvt. Ltd.
Contact us - 096432 52455

- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )

We construct and provide consultancy for Mud Houses, Eco Resorts, Farm Houses and Eco Living way of life. Hurry Up! Cont...
17/09/2024

We construct and provide consultancy for Mud Houses, Eco Resorts, Farm Houses and Eco Living way of life.

Hurry Up! Contact us at 096432 52455 ( Whatsapp )

Book your slots at the earliest !

We are into the construction of Mud Houses which are upcoming new trend in today's scenario.We construct as well as prov...
01/09/2024

We are into the construction of Mud Houses which are upcoming new trend in today's scenario.
We construct as well as provide consultancy of the Eco homes , Mud Houses or Earthern houses which is constructed with all the techniques like Cob , Adobe , Rammed Earth , Wattle and Daub and other modifying techniques.

Contact us at : 9643252455 ( Whatsapp ) for more details.
Hurry !!! Book your slots before the end of rainy season.

Know your Mitti and its construction technique organised by SNP Enviro Pvt. Ltd. SNP Enviro Pvt. Ltd. and Divine Archite...
17/12/2023

Know your Mitti and its construction technique organised by SNP Enviro Pvt. Ltd. SNP Enviro Pvt. Ltd. and Divine Architect on Vastu Shastra .

To know more about Eco Construction, Mud Construction , Mud Techniques, and much more !!

Book your slots asap !! Seats Limited.

https://forms.gle/rHfQmocfDi1kmoNHA

आज विश्व मृदा दिवस है । World Soil Day ! मिट्टी जो इस पूरे सृष्टि की जननी है ।  मिट्टी से ही हमें सब प्राप्त होता है । म...
05/12/2023

आज विश्व मृदा दिवस है ।
World Soil Day !
मिट्टी जो इस पूरे सृष्टि की जननी है । मिट्टी से ही हमें सब प्राप्त होता है ।
मिट्टी ही विभिन्न परिस्थितियों , वातावरण , दाब , तापमान से विकृत होकर विभिन्न धातुओं का निर्माण करती है ।
मिट्टी ही विभिन्न परिस्थितियों , वातावरण , दाब , तापमान से नियन्त्रित होकर भिन्न भिन्न प्रकार के पत्थरों , चट्टानों इत्यादि का निर्णाण करती है ।

जिसके पास यह मिट्टी है , उसके पास विश्व का समस्त अवयव उपलब्ध है ।
मिट्टी से आप सोना उगा सकते हैं । मिट्टी से ही धन धान्य की उपलब्धि होती है ।
विश्व का कोई ऐसा पदार्थ बतायें जो मिट्टी से न बना हो ।

पूरी पृथ्वी पर भिन्न भिन्न पदार्थ की मिट्टी पाई जाती है और प्रत्येक मिट्टी के गुण , धर्म , विशेषता अलग अलग है ।

मिट्टी के सम्पर्क में रहने वाले लोगों को कभी कोई बीमारी नहीं आती ।

मिट्टी चाहे सूखी हो या गीली , उसका किसी भी रोग प्रभावित अंग पर लेप करने से , वह उसके रोग को स्वयं अवशोषित कर लेती है ।

मिट्टी से जिनका संपर्क बना रहा , वह निरोगी रहेगा ।

मिट्टी से जिसका संपर्क टूटा , वह रोगी बना रहेगा और जीवन भर अशांत बना रहेगा ।

मिट्टी के पात्रों में भोजन बनाने वाले और करने वाले , आजीवन रोगों से बचे रहते हैं ।

मिट्टी से ही हम अन्न के द्वारा पोषण लेते हैं , जिससे वीर्य बनता है ,फिर जीव का निर्माण होता है और मृत्यु उपरांत फिर से सब कुछ मिट्टी में मिल जाता है ।

मिट्टी ही एक विचित्र प्राकृतिक मशीन जिन्हें हम पेड़ पौधे उत्पन्न करती है जो वातावरण, मिट्टी से लेकर सूर्य तक से ऊर्जा ग्रहण कर ( प्राकृतिक Solar Panel ) उसे विभिन्न पोषक तत्वों में फलों में पत्तों इत्यादि में डालकर हमारे लिए विभिन्न खाद्य पदार्थ बनाती है ।

मिट्टी के घरों में रहने वालों का जीवन रोगों से मुक्त हो जाता है ।
मिट्टी अपनी साँस लेती दीवारों से अंदर और बाहर दोनों वायु से जहरीले तत्वों ( Toxins ) को अवशोषित कर लेती है और Air Filter का कार्य करती है ।

मिट्टी के घरों में रहने वाले हमेशा Cool Cool रहते हैं । अंदर मानसिक स्थिति से भी और बाह्य वातावरण से भी ।

मिट्टी के घरों में रहने वाले ठंड़ीयों में भी Warm Warm रहते हैं । अंदर मानसिक स्थिति से भी और बाह्य वातावरण से भी ।
यही कारण है कि मिट्टी के घर लदाख जैसी ठंडी जगहों पर भी बनते हैं और राजस्थान की तपती गर्म जगहों पर भी मिट्टी के घर बनाये जाते हैं ।

सम्पूर्ण विश्व में एकमात्र मिट्टी ही ऐसा तत्व एवं पदार्थ है जिसका कोई EXPIRY DATE नहीं होती और इसका कोई Disintegration नहीं होता ।
क्योंकि विश्व का प्रत्येक तत्व मिट्टी से बना है और सब एक दिन disintegrate होकर मिट्टी ही बन जायेंगे ।

इसलिए आज भी लाखों वर्ष होने पर भी खुदाई में मृद भांड ( मिट्टी के बर्तन या उनसे बनी वस्तुएँ पाई जाती हैं )

सभी तत्व लोहा , सोना चाँदी से लेकर सभी धातुएँ जंग या उनका क्षरण होकर मिट्टी बन जायेगी लेकिन मिट्टी मिट्टी ही रहेगा , इसलिए मिट्टी अमर है ।

और किसी का हो न हो ,लेकिन मिट्टी में मिलकर मुझे बहुत कुछ प्राप्त हुआ है और मिट्टी ने मुझे सोना दिया है और मुझे भी सोना बना दिया है ।

लेकिन आज मृदा या मिट्टी में किसान , औद्योगिक लोगों ने ,मनुष्य ने अपने क्षणिक लाभ प्राप्त करने के लिए ज़हर डाल डाल कर इस अपनी ही माँ समान मिट्टी का वीभत्स बलात्कार कर रहा है ।

इस मिट्टी में इतना जहर , विष डाला जा रहा है कि आज विश्व का प्रत्येक जीव इसके दुष्परिणाम अनंत रोगों के माध्यम से भोग रहा है ।
सिर्फ बड़े बड़े और ज्यादा उत्पादन और चमकीले दिखने वाले फल सब्जियाँ अन्न जिसमें पोषक तत्व न के बराबर है , केवल उसके लिए मनुष्य इसका प्रतिदिन बलात्कार और हत्या कर रहा है ।
लेकिन इस मिट्टी की चीख पुकार किसी के कानों में नहीं सुनाई पड़ रही है ।

आज Chemical cement युक्त घरों ने , concrete के जंगलों से इस मिट्टी की साँसें घुट रही हैं ।

यह इसकी सांसें नहीं घुट रही हैं , यह सम्पूर्ण विश्व के प्रत्येक जीव की सांसें घुट रही हैं ।

यह प्रकृति देखते देखते जब नहीं सहन होगा तो हमारी इसी सभ्यता को जिसे आप विकसित कहते हैं ,लेकिन यह विकास नहीं विनाशकारी सभ्यता को मोहनजोदड़ों या मायन सभ्यता बनाने में समय नहीं लगाएगी ।

वह तो बस कातर दृष्टि और दया भाव से हमारी ओर निहार रही है कि ये मूर्ख अब संभल जायें तब सम्भल जायें , अगर नहीं सम्भले तो इस मिट्टी को पूरी पृथ्वी को मिट्टी में मिलाना आता है ।

बस ज्यादा नहीं , 2 minute का 12 रिचर स्केल का भूकम्प और सभी समुद्रों को एक होने की आज्ञा बस देनी है ।

इसलिए अपनी इस माँ के वस्त्रों अर्थात मिट्टी का सम्मान करना सीखिए , इसे विदीर्ण होने से बचाईये , अपनी मिट्टी से सम्पर्क बढ़ाइए , औरों को प्रेरित करिये कि वह मिट्टी से हर माध्यम से जुड़ें और इस मिट्टी का सम्मान , ताज़गी , वह शुचिता पुनः लौटाएँ ।

अरे यह मिट्टी नहीं सोना है सोना । हीरा मोती से लेकर जो आप चाहते हैं , सब इससे मिलेगा , बस इसका समुद्र मंथन की तरह मिट्टी मंथन करना होगा ।

मुझे तो मिट्टी ने सब कुछ दिया है । एक समय था जब मेरा जीवन अंधकारमय बन गया था , लेकिन मैंने अपनी माँ के आँचल ( मिट्टी ) का सहारा लिया और आज मुझे मिट्टी वह दे रही है जो अवर्णनीय है ।
बस इतना कहूँगा कि मिट्टी ने मुझे सोना बनाया है ।

आप भी मिट्टी से जुड़िये और स्वर्ण बनने की दिशा में प्रशस्त होईये ।

मिट्टी को बचाईये । विनम्र निवेदन है कि हर प्रकार से मिट्टी से जुड़िये ।

मिट्टी में वह शक्ति है जो आपको सोना हीरा मोती सब बना देगी ।

मृदा दिवस् की हार्दिक शुभकामनाएं ।

SNP Enviro Pvt. Ltd.

- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )

01/12/2023

सूरत , गुजरात में विजय लक्ष्मी हॉल में , वेसू में "Surat Exhibition" में SNP Enviro Pvt. Ltd. का stall लगा है जो प्राकृतिक निर्माण , Mud Houses , Eco Building से सम्बंधित है ।

आप यहाँ Visit कर सकते हैं ।।

यह Exhibition 1, 2 , 3 December तक रहेगा ।

मेरा पर्यावरण में योगदान :- 1. हमारे घर पर Air Conditioner का प्रयोग नहीं होता है । मेरी माँ का कहना है कि जिस दिन घर पर...
05/06/2023

मेरा पर्यावरण में योगदान :-

1. हमारे घर पर Air Conditioner का प्रयोग नहीं होता है । मेरी माँ का कहना है कि जिस दिन घर पर AC आएगा , उस दिन DOCTORS के पास आना जाना शुरू हो जाएगा ।

घर में तीन Floors हैं लेकिन सबमें एकमात्र पंखा ही चलता है । दो गर्मियों से तो हम लोग Cooler तक का प्रयोग नहीं कर रहे हैं , जरूरत ही नहीं पड़ती ।
मैं तो बिना पंखा के भी रह लेता हूँ, सुबह 12 बजे तक ।
पोस्ट लिखते समय भी Fan 3 point पर चल रहा है ।

अब शायद शरीर ने adapt कर लिया है। adaptation आ गया है शरीर में ।
माँ का कहना है जितना शरीर को तपाओगे उतना ही वह निखरेगा और बीमारियों से दूर रहेगा ।

उनका कहना है :-
" तन को बली बना लो ऐसा , सह ले सर्दी वर्षा घाम ।
मन को बली बना लो ऐसा , टेक न छाड़े आठों याम ।।

उनका कहना है कि Air Conditioner का प्रयोग करने वाले घोर स्वार्थी होते हैं जो अपने कमरे की गर्मी बाहर निकाल देते हैं जो पृथ्वी का तापमान बढाते हैं और सधारणी लोगों का जीवन मुश्किल कर देते हैं। उनको एकमात्र अपने सुख से मतलब है ।

इसी प्रकार ठंड़ीयों में न Heater का प्रयोग । हाँ Geyser का प्रयोग ठंड़ीयों में अवश्य होता है । बल्कि मेरी माँ तो यह भी कम ही प्रयोग करती हैं। बस हम लोगों से ठंडी नहीं सहन हो पाती ।

2. हमारे घर में बिजली का कम से कम प्रयोग होता है । कमरे से निकलते ही Lights और Fan off कर दिए जाते हैं भले ही एक minute बाद वापस ही क्यों न आया जाय।

इस मामले में हम सभी बड़े सचेत हैं , बच्चों को छोड़कर । अभी वह छोटे हैं तो ध्यान नहीं दे पाते लेकिन घर के संस्कार उनमें पड़ेंगे ही पड़ेंगे ।

इस हिसाब से हम देश का बहुत कोयला ( जिससे बिजली बनती है ) और अन्य संसाधन बचाते हैं । कोयला जलने से जो गर्मी बनती है वह पृथ्वी का तापमान बढ़ाती है और Mining से पृथ्वी का ecosystem ही प्रभावित होता है। तो हम इन सब चीजों को दूर करते हैं।

3. पानी कम से कम बहाया जाता है। Overhead Tanks भरने पर अगर दो minute भी ऊपर submersible चल गया तो घरवालों का पारा चढ़ जाता है।
उनका कहना है कि पानी को फालतू बहाना पानी की तरह पतला कर देगा अर्थात यश, समृद्धि ,श्री , लक्ष्मी इत्यादि से हाथ धोना पड़ेगा ।

4. घर में कम से कम Plastic का सामान लाया जाता है । जो बहुत आवश्यक है बस उन्हीं को घर में प्रवेश दिया जाता है।

5. घर में बाहर के खाद्य पदार्थ बिल्कुल नहीं आते । बाहर का भोजन हम लोग ज़हर के मानिंद समझते हैं । Packet बन्द या डिब्बा बन्द या processed food का हमारे घर में प्रवेश वर्जित है ।

इस कारण इन सब पदार्थों को बनने में जितनी industries लगती है , कोयला , बिजली और Logistics में जितना पेट्रोल diesel जलता है और गंदा और chemical युक्त पानी जमीन के अंदर डाला जाता है , जिससे नदियाँ दूषित होती हैं और नदियों का मछलियों सहित जो ecosystem गड़बड़ाता है , उसमें हमारा न्यूनतम योगदान रहता है ।

6. घर में तीन वाहन ( जिनमें दो गाड़ी , एक पेट्रोल और CNG BOTH की Hatchback , एक diesel SUV और एक 150 cc Bike ) होने के बावजूद भी गाड़ियों का कम से कम प्रयोग किया जाता है । वह इसलिए भी है कि चलाने वाला तीनों गाड़ियों को एकमात्र मैं ही हूँ ।

5 km के दायरे को तो मैं पैदल ही निबटाता हूँ । मुझे पैदल चलना बहुत ही अच्छा लगता है। बस वृन्दावन , दूर के सफर या Clients से मिलने के दौरान ही मैं अपनी गाड़ी का प्रयोग करता हूँ।

इस हिसाब से Petroleum industries को set up करने और fuel निकालने में जितना Carbon Emission होता है , उसमें मेरा योगदान न्यूनतम ही है ।

7. पेड़ पौधे , गमलों में , क्यारियों में हम हर प्रकार के पौधे हम लगाते हैं। कोई भी फल सब्जी खाएंगे तो वह dustbin न जाकर क्यारियों और गमलों में जाता है । छिलके खाद बन जाते हैं और बीजों से नए पौधे निकलते हैं जो भले कुछ दिन ही रहते हैं लेकिन Oxygen उत्सर्जन में उनका कुछ तो योगदान रहता ही है ।
यहाँ तक कि हम घास तक नहीं उखाड़ते और उसको भी लगाते हैं ताकि कुछ तो Oxygen निकलेगा ही भले ही वह Microns में ही क्यों न हो। 1 फुट में ही आपको 5 प्रकार की वनस्पतियां मिल जाएंगी ।

Hand rails तक पर हमने गमले लगाएं हैं।

8. IGL का Gas pipeline है kitchen में , लेकिन उसका भी प्रयोग बहुत ही rational और Judicious way में करते हैं । दाल , चावल या दूसरे देर से पकने वाले अन्न को पहले ही भिगो दिया जाता है।
रोटी सेंकते समय भी Burner का k**b ज्यादा या कम करते रहते हैं ।
भोजन पूरा बनता है , दाल चावल रोटी सब्जी दलिया दूध इत्यादि सब सम्पूर्ण भोजन , लेकिन मेरी माँ और पत्नी की समझदारी से BILL मात्र 500 से 600 Rs. Per month में निबट जाता है। पहले जब png का rate कम था तब 350 से 400 के आसपास बिल आता था ।

तो इस मायने में भी हम Fossil Fuel का कम से कम प्रयोग करते हैं और Carbon Emission में कम से कम योगदान करते हैं ।

9. बाज़ार के उत्पादों का कम से कम प्रयोग करना । ख़रीददारी भी कम से कम करना । जितना आवश्यक है और उपयोगी है एकमात्र उसी की ख़रीददारी की जाती है ।

इस तरह हम Industries set up होने में निकलने वाले प्रदूषण , गंदगी , Green house gases , logistics में होने जलने fuel से गर्मी , प्रदूषण इत्यादि में हमारा कम से कम योगदान रहता है।

10. हमारे घर में Allopathy दवाईयों का प्रयोग न के बराबर है , है ही नहीं ।
ईश्वर की कृपा से खान पान , नियम शैली इस प्रकार है कि हमारे घर में कोई रोग नहीं है । हम अपने रोगों को एकमात्र खान पान से और पेड़ पौधों से , या प्राकृतिक तरीकों से ठीक करते हैं।

इस तरह हम Pharma companies के set up होने में जो Carbon emission होता है , Chemicals जलीय तंत्र में मिलते हैं , प्रदूषण करते हैं , logistics में जलने वाले fuel से होने carbon emission में कम से कम योगदान है ।

11. ईश्वर की ऐसी कृपा है कि मेरे वस्त्र या कपड़े भी बहुत कम फटते हैं या खराब होते हैं । 15 वर्ष पुराना भी वस्त्र लगातार पहनता हूँ फिर भी पुराना नहीं लगता ।
तो मुझे वस्त्र खरीदे हुए ही कई कई वर्ष बीत जाते हैं ।
मेरी माँ जब तक मेरे वस्त्रों को जबर्दस्ती निकालकर गरीबो को नहीं बांट देती , तब तक वस्त्र चलते हैं । ( वह कहती हैं कि तुम्हारे कपड़ों को वर्षों से देखकर उबन सी आ जाती है )
और मैं वस्त्र भी धूप में उल्टा करके सुखाता हूँ , ज्यादा detergent का उपयोग नहीं ।

चूँकि मैं ज्यादा विवाह पार्टी attend नहीं करता ,न ही ज्यादा बाहर निकलता हूँ फालतू में तो वस्त्र खरीदने के झंझट से मुक्ति ।
रोज रोज दिखाने के झंझट से मुक्ति ।
तो इस तरह मैं इन वस्त्रों के निर्माण में लगने वाली इंडस्ट्रीज से जो Carbon Emission होता है , उसमें भी मेरा कम से कम योगदान रहता है , इस तरह प्रकृति को मैं कम से कम नुकसान पहुँचाता हूँ ।

12. बाकी का मेरे विषय में आप जानते ही हैं कि पर्यावरण को लेकर ही मैंने MNCs के अच्छे पद और 6 digit salary को छोड़कर पर्यावरण से सम्बंधित company खोली जिसमें मैं MUD House और प्राकृतिक घरों को बनाता हूँ और अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करता हूँ।
ऐसे सभी प्राकृतिक घरों में हम कोई भी ऐसे तत्व प्रयोग नहीं करते जिससे प्रकृति में प्रदूषण हो ,जल में प्रदूषण हो भूमि आकाश कहीं भी ।
इस तरह हम प्रकृति के रक्षक बनकर जितना हो सकता है उतना योगदान हम करते हैं ।

यह सब बहुत ही छोटी छोटी बातें हैं , और शायद मेरे करने से प्रकृति को नाम मात्र का भी अंतर नहीं पड़ेगा लेकिन मन में संतुष्टि का भाव आता है कि मैं अपनी प्रकृति माँ को कम से कम नुकसान पहूँचाता हूँ।

आप भी अगर सब मिलकर छोटी से छोटी बातों का ध्यान देने लगेंगे तो बूँद बूँद से घड़ा भरता है । एक छोटी सी चिंगारी बड़े से बड़ा आग पैदा कर देती है । आप करेंगे तो आपको देखकर दूसरे प्रेरित होंगे और इस तरह यह chain बनती और बढ़ती चली जायेगी ।

जय माँ प्रकृति ।

- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )

आईये जानते हैं पर्यावरण के विषय में और समझते हैं कि किस प्रकार के पर्यावरण के विषय में हमारे शास्त्रों में निरूपण है । प...
05/06/2023

आईये जानते हैं पर्यावरण के विषय में और समझते हैं कि किस प्रकार के पर्यावरण के विषय में हमारे शास्त्रों में निरूपण है ।

पर्यावरण : परि + आवरण अर्थात अपने आस पास के वातावरण जहां हम निवास करते हैं या वह परिवेश जिसका जीवन को जीने में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करे ! पर्यावास ( परि + आवास ) भी हम कह सकते हैं ! हमारे चारों ओर जो भी वस्तुएं परिस्थितियां एवं शक्तियां विद्यमान हैं, वे सब हमारे क्रियाकलापों को प्रभावित करती हैं और उसके लिए एक दायरा सुनिश्चित करती हैं। इसी दायरे को हम पर्यावरण कहते हैं। यह दायरा व्यक्ति, गांव, नगर, प्रदेश, महाद्वीप, विश्व अथवा संपूर्ण सौरमंडल या ब्रह्मांड हो सकता है।

साधारणतः लोग पर्यावरण का मतलब यही लगाते हैं कि वह भौतिक प्राकृतिक परिवेश जो हमें आँखों से दिखाई पड़ते हैं जैसे पेड़ पौधे , जल , नदियाँ , तालाब , भूमि , जीव जंतु इत्यादि !
परन्तु पर्यावरण तीन तरह के होते हैं :

1. भौतिक पर्यावरण या प्राकृतिक पर्यावरण :: जो हमें अपनी आँखों से दृष्टिगोचर होते हैं जैसे प्राकृतिक सभी संसाधन जिसमें जीव जंतु , पेड़ पौधे , भूमि , वायुमंडल इत्यादि ! भौतिक पर्यावरण प्राकृतिक उन सभी संसाधनों से सम्बंधित है जो स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए महत्वपूर्ण हैं !

2. मानवकृत पर्यावरण :: यह मनुष्यों द्वारा सामाजिक पर्यावरण या परिवेश होता है जिसमें आचार -विचार , रहन - सहन , संस्कृति , सभ्यता , आसपास का सामाजिक परिवेश एवं विचारधारा ! सांस्कृतिक या मानवकत पर्यावरण में आर्थिक क्रियाएं, धर्म अधिवास, आवासीय दशाएं एवं राजनीतिक परिस्थितियां आदि सम्मिलित हैं। मानवकृत पर्यावरण धार्मिक उन्नति से सम्बंधित है !

3. आंतरिक पर्यावरण :: यह मन और आत्मा को ढकने या प्रभावित करने वाला आवरण या पर्यावरण होता है ! जैसे आपके विचार , काम , क्रोध , लोभ , मोह , इर्ष्या , दुर्भावना , प्रेम इत्यादि ! आन्तरिक पर्यावरण आध्यात्मिक उन्नति से सम्बंधित है !

सबसे रोचक बात यह है कि यह तीनों पर्यावरण आपस में एक दुसरे के पूरक हैं ! और अगर हम आन्तरिक पर्यावरण को ठीक कर लेते हैं या उसको प्रदूषित होने से बचाते हैं तो स्वतः ही हम मानवकृत पर्यावरण और भौतिक पर्यावरण को संरक्षित और प्रदूषित होने से बचाते हैं !

अगर हम मानवकृत पर्यावरण को ठीक कर लेते हैं अर्थात अपनी संस्कृति और सभ्यता या सामाजिक परिवेश को सुदृढ़ और सुसभ्य करते हैं तो अपने आप आंतरिक और भौतिक पर्यावरण के संवर्धन और संरक्षण को पोषण मिलेगा !

यही एक लक्ष्य होना चाहिए कि तीनों पर्यावरण जिसमें भौतिक , मानवकृत एवं आन्तरिक पर्यावरण सम्मिलित है , उन सभी का पोषण , संरक्षण , और सुन्दर विचारों से विकास करना और जितने भी इन सभी को प्रदूषित करने वाले कारक और घटक हैं उनका विनाश करना ! वह कारक कोई भी हो सकता है जैसे :
भौतिक पर्यावरण के लिए ध्वनि प्रदुषण , जल प्रदुषण , वायु प्रदुषण , मृदा प्रदुषण इत्यादि !

मानवकृत पर्यावरण के लिए दूषित आचार विचार , दूषित संस्कृति , दूषित परिवेश , सामाजिक कुरीतियाँ , अन्धविश्वास , राजनैतिक प्रदुषण , धार्मिक विछोभ , सामजिक विसंगतियां , देशद्रोह , आर्थिक विसंगतियां इत्यादि !

आन्तरिक पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले कारक जैसे इर्ष्या , दुर्भावना , क्रोध , असमान भावनात्मकता , अशांति , लिप्सा , प्रमाद , अस्तेज इत्यादि ऐसे प्रदूषित तत्व जो आत्मा और मन का हनन करते हैं और अध्यात्मिक उन्नति में बाधा पहुंचाते हैं !

इन सभी प्रदूषित कारकों और विघटनकारी तत्वों का विनाश पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों में समाहित है !

पेड़ लगाना , जल संवर्धन करना , इत्यादि कार्य भौतिक पर्यावरण को पोषित करेगा !
सुसभ्य , सुसंस्कृति , सुविचारों , सामाजिक एवं आर्थिक संवर्धन , परिशोधित राजनीति , शस्त्र एवं शास्त्र का समयानुकूल उचित प्रयोग , वैज्ञानिक संवर्धन जैसे वृक्षारोपण भी हमें मानवकृत पर्यावरण हितार्थ करना होगा !
प्रेम , उदारता , विशालता , आत्मिक शांति , सात्विकता इत्यादि का वृक्षारोपण भी सबके ह्रदय स्थली में हमें करना होगा जिससे की उपरोक्त दोनों पर्यावरण को बल मिल सकें ।

- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )

आज विश्व गौरैया दिवस है , उसी  पर एक रचना :(विलुप्त होती गौरैया) *******************************कहाँ गयी वह नन्ही फुदकन ...
20/03/2023

आज विश्व गौरैया दिवस है , उसी पर एक रचना :
(विलुप्त होती गौरैया)
*******************************
कहाँ गयी वह नन्ही फुदकन , जो आँगन में आती थी !
मधुर मधुर कलरव वह करके , सबका मन हर्षाती थी !

कभी मुंडेर पर , कभी पेड़ पर , कभी मेंड़ पर जाती थी !
कभी घास पर , कभी बांस पर , फिर प्रवास कर जाती थी !

क्रीड़ा जिनकी देख देख कर , था मेरा बचपन बीता !
बिन कलरव अब उनके जाता , आज मेरा जीवन रीता !

गाढ़ी भूरी मटमैली सी , रेखा काली पंख जडैया !
ताल तलैया एक चिरैया , प्यारी छोटी सी गौरैया !

पोखर क़स्बा क्या गाँव शहर , हर नदी नहर हर डगर डगर !
रही निरंतर उर अभ्यंतर , बन परिचर मानव की सहचर !

चीं चीं चीं चीं कलरव करके , घर आंगन जिसने महकाया !
अवहेलित उपेक्षित करके , मनु ने इनका किया सफाया !

कहाँ गयी वह नित बागों की , मधु मोहक सी एक झनक !
कहाँ गयी वह नित आँगन की , अवगुंठित सी एक फुदक !

ढूंढ रहा मैं नित ही निरंतर , वह नन्हीं सी एक चिरैया !
फुदक फुदक कर चीं चीं करती ,प्यारी छोटी सी गौरैया !

- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )

17/03/2023

Two of my Student from our Natural Building Workshop at Kukma, Bhuj, Gujarat.

We are conducting continuous workshops on Natural Building.

For Natural Building Workshop , you can contact us at :- 9643252455 , 9898999970

यहाँ आपको प्रकृति से ही सम्बंधित बातें ही नहीं बल्कि नैतिक , धार्मिक एवं आध्यात्मिक तत्व सम्बंधित भी बातें बताई जाती हैं ।

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