Dream city gwalior

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Selective Appreciation: A Question of Fairness in Season 4, Episode 4Television shows thrive on talent, equality, and th...
19/01/2026

Selective Appreciation: A Question of Fairness in Season 4, Episode 4

Television shows thrive on talent, equality, and the spirit of fair recognition. However, Season 4, Episode 4 raised serious questions about these values when Sunil’s act was noticeably not appraised, while Krishna and Kiku received standing ovations and praise for their performances.

Sunil has consistently delivered impactful performances over the seasons. His timing, expressions, and ability to connect with the audience are undeniable. Ignoring such contribution, especially in an episode where appreciation was freely given to others, reflects selective acknowledgment that viewers cannot overlook.

This kind of behavior creates an uncomfortable perception of hypocrisy—where appreciation seems dependent not on performance, but on favoritism. When talent is evaluated inconsistently, it damages the credibility of the platform and disrespects both the artist and the audience.

Moreover, repeated patterns of exclusion raise deeper concerns. Whether intentional or not, such actions can feel like bias or discrimination, which has no place in creative spaces meant to celebrate diversity and merit. Audiences today are perceptive and vocal; they recognize when appreciation is uneven and when respect is selectively applied.

Art flourishes only where fairness exists. Every performer deserves equal acknowledgment based on effort and impact—not selective applause. Ignoring one artist while celebrating others on the same stage sends the wrong message and weakens the integrity of the show.

Recognition should never be a privilege—it should be a responsibility, exercised honestly and equally.





नए साल का संकल्प – भारत का युवा 🇮🇳क्या करें ✅ • माता-पिता, बड़ों और गुरुओं का सम्मान करें। • अपनी भारतीय संस्कृति, परंपर...
30/12/2025

नए साल का संकल्प – भारत का युवा 🇮🇳

क्या करें ✅
• माता-पिता, बड़ों और गुरुओं का सम्मान करें।
• अपनी भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों पर गर्व रखें।
• शिक्षा, कौशल और स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
• हर कदम सोच-समझकर उठाएँ — संस्कार और समझ दोनों ज़रूरी हैं।
• सोशल मीडिया का सही उपयोग करें, सीखने और सकारात्मकता फैलाने के लिए।
• सच, समानता और इंसानियत के साथ खड़े रहें।

क्या न करें ❌
• आधुनिक बनने के नाम पर अंधी नकल न करें।
• “कूल” दिखने के लिए संस्कृति का अपमान न करें।
• आज़ादी को बदतमीज़ी या गैर-ज़िम्मेदारी न समझें।
• गलत ट्रेंड्स के पीछे बिना सोचे न भागें।
• अपनी पहचान और जड़ों को कभी न भूलें।

याद रखें 🇮🇳
आधुनिक होना संस्कृति छोड़ना नहीं है।
परंपरावादी होना बदलाव से डरना नहीं है।
सच्चा युवा वही है जो सही और गलत में फर्क समझे और सही को चुने।

2025 का संकल्प:
दुनिया के साथ आगे बढ़ें, लेकिन संस्कारों से जुड़े रहें।

Sabalgarh Meri jaan Karayana Sanjay Singh Tomar Dream city gwalior

29/12/2025

New Year is coming!
Make this special day memorable with Karayana 🚗

Go for an outing, hire a self-drive car, stay safe from winter & fog, and enjoy the outdoors with your loved ones.

✨ Top New Year Destinations:
• Rishikesh
• Haridwar
• Mussoorie
• Dehradun

👉 Comfortable cars | Safe travel | Freedom to drive
👉 Perfect for friends & family trips

KARAYANA – Drive Your Way, Celebrate Your Way

29/12/2025

नया साल, नई शुरुआत ✨
ठंड, धुंध और रोज़मर्रा की भागदौड़ से थोड़ा ब्रेक लो।
सड़कें बुला रही हैं, पहाड़ इंतज़ार में हैं।

चाहे ऋषिकेश की शांति हो,
हरिद्वार की सुबह,
या मसूरी–देहरादून की ठंडी हवाएँ—
बस निकल पड़ो, बाकी सब अपने आप खूबसूरत हो जाएगा।

कुछ सफ़र मंज़िल के लिए नहीं,
खुद को महसूस करने के लिए होते हैं। Sanjay Singh Tomar

आज (17 दिसंबर 2025) की खबरों के अनुसार, बेंगलुरु में एक व्यक्ति को सड़क पर कार्डियक अरेस्ट आया और लोगों की उदासीनता (apa...
18/12/2025

आज (17 दिसंबर 2025) की खबरों के अनुसार, बेंगलुरु में एक व्यक्ति को सड़क पर कार्डियक अरेस्ट आया और लोगों की उदासीनता (apathy) के कारण उसकी जान चली गई, जहाँ उसकी पत्नी मदद के लिए गिड़गिड़ाती रही लेकिन किसी ने मदद नहीं की, जिससे इंसानियत पर सवाल उठने लगे हैं. इसी तरह की कई अन्य घटनाएँ भी सामने आ रही हैं जहाँ लोगों को अचानक हृदय गति रुकने (cardiac arrest) से मौत हो रही है और मदद न मिलने से दुःखद परिणाम सामने आ रहे हैं, जैसे कि यूपी के बिजनौर में एक महिला बीएलओ की मौत और एक बुजुर्ग की स्विमिंग पूल में मौत.
मुख्य घटना (बेंगलुरु):
क्या हुआ: बेंगलुरु में एक युवक को अचानक कार्डियक अरेस्ट आया और सड़क पर ही उसकी मौत हो गई.
विडंबना: घटना के समय उसकी पत्नी मदद के लिए गुहार लगाती रही, लेकिन भीड़ में किसी ने सहायता नहीं की.
परिणाम: इस घटना ने 'इंसानियत' पर सवाल खड़े कर दिए हैं और लोगों की संवेदनहीनता को दर्शाया है, जैसा कि AajTak पर बताया गया है.
अन्य संबंधित घटनाएँ:
बिजनौर, यूपी: एक महिला बीएलओ की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई.
अन्य मामले: एक 74 वर्षीय बुजुर्ग की स्विमिंग पूल में डूबने से मौत, जहाँ कार्डियक अरेस्ट की आशंका जताई गई.
कार्डियक अरेस्ट क्या है (संक्षेप में):
यह एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें हृदय की धड़कन अचानक रुक जाती है और शरीर के अंगों में रक्त की आपूर्ति बंद हो जाती है.

https://www.aajtak.in/amp/india/news/story/bengaluru-man-dies-cardiac-arrest-apathy-wife-pleads-no-help-lcla-rpti-2414760-2025-12-17?utm_source=atweb_story_share
https://app.aajtak.link/d/o5NdCLWag0

योग्यता नहीं, पहचान चल रही है—इसीलिए ईमानदारी हार रही है और सिस्टम मज़ाक बन चुका है।



आज की सबसे बड़ी बीमारी आरक्षण नहीं, बल्कि सिस्टम फेलियर है।
योग्यता की जगह जाति और पहचान के आधार पर रेखाएँ खींच दी गई हैं।
कई लोग आरक्षण का सहारा लेकर ऐसी रैंक और पदों पर बैठे हैं, जिनके वे वास्तव में योग्य नहीं हैं,
और जो योग्य हैं, वे पीछे धकेल दिए जाते हैं।

नतीजा यह है कि समाज में असंतोष बढ़ रहा है,
मेहनत और ईमानदारी का मज़ाक बन गया है।
कानून केवल कागज़ों तक सीमित रह गया है,
और भ्रष्टाचार हर क्षेत्र में सामान्य हो चुका है।

आज ईमानदार आदमी डर में जी रहा है,
पुलिस, सिस्टम और सत्ता से उसे सुरक्षा नहीं, बल्कि भय लगता है।
इंसानियत इसलिए मर रही है क्योंकि
इंसान जानता है—ईमानदार बनना अब सबसे बड़ा जोखिम है।

💔 Jo mard apni patni ki izzat nahi karte, unke saath naukrani jaisa bartav karte hain ya unse durvyavhaar karte hain — u...
25/08/2025

💔 Jo mard apni patni ki izzat nahi karte, unke saath naukrani jaisa bartav karte hain ya unse durvyavhaar karte hain — unhe apne aap ko ‘mard’ kehne ka haq hi nahi hai।

👉 Unhe sharm aani chahiye aur sochna chahiye:
• Kya unke ghar mein unke baap ne bhi unki maa ke saath aisa hi kiya tha?
• Kya wo khud dekh paayenge agar kal ko unki beti ke saath koi aisa vyavhaar kare?

💡 Izzat aur pyaar dena hi asli mardangi hai, na ki apni patni ko dukh dena।

घटना का सारांश और पीड़ित परिवार की आपबीती
• मुकदमे का हाल
28 वर्षीय निक्की भाटी को कथित रूप से दहेज की मांग पूरी न होने पर परिवार द्वारा प्रताड़ित कर ज़िंदा जला दिया गया। इस भयावह घटना के बाद पोस्टमार्टम के बाद मृत घोषित होने से पहले उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था। आरोपी पति विपिन, सास (दया), देवर (रोहित) और ससुर (सतवीर) पर इसमें संलिप्तता के आरोप हैं। अब सारे आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
• दहशतनाक सबूत
घटनास्थल पर निक्की को जिंदा जलाने और मारपीट करने के दृश्यों का वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उनका पाँच साल का बेटा भी मौजूद था और उसने बताया कि “कुछ डालकर फिर मम्मा को मारा और लाइटर से आग लगा दी”।
• बाहरी कार और नकदी की लालसा
निक्की और उनकी बहन कंचन की शादी के समय स्कॉर्पियो, बुलेट बाइक, सोना और नकदी दहेज में दी गई थी। लेकिन आरोपी पक्ष अधिक मांगते रहे — मर्सिडीज कार की मांग और ₹60 लाख अतिरिक्त की आशा उन्हें सौंपे गए सामान से पूरी नहीं हुई।
• नफरत भरे बयानों का असर
आरोपी विपिन ने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की—पुलिस ने चेतावनी के बाद गोली चलाई, जिससे उनकी टांग में चोट आई। इसके बाद उन्होंने कहा, “पति-पत्नी में ऐसी लड़ाई होना आम है”। इस तरह का बयान दर्शाता है कि अपराधी के मन में कोई पश्चाताप नहीं था।
• समाज और परिवार की प्रतिक्रिया
इस मामले ने महिलाओं की सुरक्षा और दहेज प्रथा के सामाजिक खतरों को उजागर कर दिया। महिला नेताओं ने सख्त कानून की मांग की है। निक्की का परिवार न्याय चाहता है—बेटे के सामने माँ को जलाए जाने की घटना की गूंज समाज में भय ला रही है।



छोड़ा संदेश

यह घटना केवल एक केस नहीं है—यह हमारे समाज की उस काली सच्चाई को उजागर करती है जहाँ बलात्कार, उत्पीड़न, और व्यवस्था-की-नपाक-रुचि एकसाथ खिलते हैं। निक्की और उसके मासूम बेटे की पीड़ा हमें न्याय और सामाजिक बदलाव के लिए उठ खड़ा होने की प्रेरणा देती है।
• दहेज या किसी भी अतिरिक्त माँग के लिए हिंसा कभी भी स्वीकार्य नहीं हो सकती।
• हर महिला को सम्मान और स्वतंत्रता का अधिकार है—और उसे डर या उत्पीड़न से सुरक्षित रहना चाहिए।
• समाज, कानून और परिवार — इस त्रिकोण में जिम्मेदारी है। हमें मिलकर न्याय, शिक्षा और जागरूकता से बदलाव लाना होगा।

• हर आदमी को अपनी प्रियजनों की अहमियत और क़ीमत समझनी चाहिए।
• झगड़े या बहस कभी-कभी उकसावे में हो जाते हैं, यह जीवन का हिस्सा है।
• लेकिन इन झगड़ों को हिंसा या अपराध की तरफ़ ले जाना बिल्कुल ग़लत है।

इसका मतलब ये है कि रिश्तों में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उन्हें संभालने का तरीका संवाद, धैर्य और समझदारी होना चाहिए — न कि हिंसा।

18/08/2025

🚨 टोल प्लाज़ा की गुंडागर्दी कब तक? 🚨

एक आर्मी जवान पर टोल कर्मचारियों का हमला सिर्फ़ एक व्यक्ति पर नहीं, पूरे राष्ट्र के सम्मान पर हमला है।
हर हफ़्ते कहीं न कहीं से ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं – ड्राइवरों को पीटना, यात्रियों से मारपीट, अब जवान तक सुरक्षित नहीं!

अब वक्त आ गया है कि सरकार और प्रशासन कड़ी कार्रवाई करे।
👉 टोल प्लाज़ा पर CCTV निगरानी
👉 सख़्त आचार संहिता
👉 दोषियों पर तत्काल कड़ी सज़ा

🇮🇳 जवान का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा।
























Dream city gwaliorSabalgarh Meri jaanPradhuman Singh TomarSanjay Singh TomarKarayanaPMO India National Military Family Association

“Stop scrolling! 📵 बाहर निकलो, असली मनोरंजन ज़िंदगी और लोगों में है, इंटरनेट की स्क्रीन में नहीं। हम सभी भारतीय हैं—जुड़...
15/08/2025

“Stop scrolling! 📵 बाहर निकलो, असली मनोरंजन ज़िंदगी और लोगों में है, इंटरनेट की स्क्रीन में नहीं। हम सभी भारतीय हैं—जुड़ो, अपनाओ, और किसी से नफ़रत मत करो। 🇮🇳”

📺 क्या ये है एक  ?Netflix और Prime Video जैसे बड़े ऐप्स में Aspect Ratio बदलने का ऑप्शन नहीं मिलता, और हमें लगता है कि स...
01/08/2025

📺 क्या ये है एक ?
Netflix और Prime Video जैसे बड़े ऐप्स में Aspect Ratio बदलने का ऑप्शन नहीं मिलता, और हमें लगता है कि स्क्रीन छोटी है — और फिर दिमाग कहता है: “बड़ा TV लो!”
ये इत्तेफ़ाक है या कोई चाल?
#बड़ाTVजाल

Sure! Here’s a list of 30 hashtags related to the same topic, separated by commas:

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📺 क्या ये है एक  ?Netflix और Prime Video जैसे बड़े ऐप्स में Aspect Ratio बदलने का ऑप्शन नहीं मिलता, और हमें लगता है कि स...
01/08/2025

📺 क्या ये है एक ?
Netflix और Prime Video जैसे बड़े ऐप्स में Aspect Ratio बदलने का ऑप्शन नहीं मिलता, और हमें लगता है कि स्क्रीन छोटी है — और फिर दिमाग कहता है: “बड़ा TV लो!”
ये इत्तेफ़ाक है या कोई चाल?
#बड़ाTVजाल

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If you truly want to win over addiction, your first move should be stepping away from the internet and TV. Today’s digit...
27/07/2025

If you truly want to win over addiction, your first move should be stepping away from the internet and TV. Today’s digital world constantly pushes triggers — from smoking to drinking to endless distractions — making it harder to escape the cycle. Protect your mind by changing your environment.

नशे से जीतना है तो सबसे पहले स्क्रीन से दूर हो जाओ।
टीवी और इंटरनेट वही दिखाते हैं, जिससे तुम बचना चाहते हो।

#नशेसेमुक्ति, #स्क्रीनसेदूर, #जागरूकभारत, #डिजिटलडिटॉक्स, , , , , , , , , , , , , , , , , #डिजिटलमुक्ति, #स्वस्थजीवन, , , , , , , , #नशेमुक्तभारतअभियान

28/06/2025

**“This kind of behaviour and threat is absolutely unacceptable. Such high rage and disrespect cannot be justified in any way. Immediate action must be taken against them to prevent any further escalation. If strict steps are not taken now, people will lose faith in the system — earlier, criminals faced encounters by the police, but if this continues, people will be forced to take the law into their own hands.

No one deserves to be treated like this. Please ensure this matter is addressed urgently and strictly, so that such threats and disrespectful acts are never repeated.”**

**“ऐसी हरकत और धमकी बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। इतना गुस्सा और बेइज्जती किसी भी हाल में सही नहीं ठहराई जा सकती। इनके खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि मामला और न बढ़े। अगर अभी सख्त कदम नहीं उठाए गए तो लोग सिस्टम से भरोसा खो देंगे — पहले अपराधियों का एनकाउंटर पुलिस करती थी, अब अगर ऐसे ही चलता रहा तो लोग खुद पुलिस का एनकाउंटर करने लगेंगे।

किसी के साथ ऐसा व्यवहार या धमकी किसी भी हालत में सही नहीं है। कृपया इस मामले को तुरंत और सख्ती से निपटाया जाए ताकि आगे से कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।”**

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