Mahadev Fertilizers & Chemicals

Mahadev Fertilizers & Chemicals सलाहकार: खेती से सम्बंधित सभी समस्याओ?

सभी राजनीतिक दलों से निवेदन है कि वे आगामी चुनावी रैलियों में भोजन के रूप में आलू की सब्ज़ी का वितरण कराएँ। इससे दोहरा ल...
19/04/2026

सभी राजनीतिक दलों से निवेदन है कि वे आगामी चुनावी रैलियों में भोजन के रूप में आलू की सब्ज़ी का वितरण कराएँ। इससे दोहरा लाभ होगा—रैली में आने वाले लोगों को पौष्टिक और भरपेट भोजन मिलेगा, तथा आलू उत्पादक किसानों की उपज की खपत बढ़ेगी, जिससे उन्हें उचित मूल्य मिल सकेगा।
कृपया किसानों को राहत देने में सहयोग करें।

विषय: आलू किसानों को उचित मूल्य दिलाने हेतु विनम्र निवेदनमाननीय महोदय,सविनय निवेदन है कि हमारे देश के आलू किसान इस समय भ...
19/04/2026

विषय: आलू किसानों को उचित मूल्य दिलाने हेतु विनम्र निवेदन

माननीय महोदय,

सविनय निवेदन है कि हमारे देश के आलू किसान इस समय भारी आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है—बीज, खाद, डीज़ल, मजदूरी और भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) का खर्च बहुत अधिक है—लेकिन बाजार में आलू का दाम किसानों को उनकी लागत से भी कम मिल रहा है। ऐसी स्थिति में किसान कर्ज़ के बोझ तले दबते जा रहे हैं और उनकी आजीविका पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि किसानों को उचित मूल्य दिलाने हेतु निम्न कदम उठाए जाएँ—

आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया जाए।

सरकारी एजेंसियों द्वारा सीधे किसानों से खरीद की व्यवस्था की जाए।

कोल्ड स्टोरेज शुल्क पर सब्सिडी दी जाए, ताकि किसान मजबूरी में सस्ते दाम पर फसल न बेचें।

निर्यात को बढ़ावा देकर और प्रोसेसिंग उद्योगों को प्रोत्साहित कर मांग बढ़ाई जाए।

मंडियों में बिचौलियों की भूमिका कम कर किसानों को सीधे बाजार से जोड़ा जाए।

हमें आशा है कि सरकार इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देगी और आलू किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।

धन्यवाद।

भवदीय
समस्त आलू उत्पादक किसान

आलू से सीधे कपड़ा नहीं बनता, लेकिन आलू के स्टार्च (starch) से फाइबर बनाकर उससे धागा और फिर कपड़ा बनाया जा सकता है। पूरी ...
19/04/2026

आलू से सीधे कपड़ा नहीं बनता, लेकिन आलू के स्टार्च (starch) से फाइबर बनाकर उससे धागा और फिर कपड़ा बनाया जा सकता है। पूरी विधि इस तरह है:

1. आलू से स्टार्च निकालना
आलू धोकर छील लें

कद्दूकस या ग्राइंड करें

पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं

कपड़े से छान लें

जो सफेद पदार्थ नीचे बैठता है वही आलू का स्टार्च है

इसे सुखा लें

2. स्टार्च से बायोपॉलिमर बनाना
सूखे स्टार्च में पानी मिलाएं

थोड़ा ग्लिसरीन/प्राकृतिक प्लास्टिसाइज़र मिलाएं

मिश्रण को गर्म करें (लगातार चलाते रहें)

गाढ़ा, लचीला जेल बन जाएगा

3. फाइबर (रेशा) बनाना
इस गर्म मिश्रण को पतली नोजल/छेद से दबाकर निकालें

ठंडे पानी या रासायनिक स्नान में डालें

पतले-पतले धागे जैसे फाइबर बन जाते हैं

इन्हें सुखाकर मजबूत करें

4. धागा बनाना
बने फाइबर को मोड़कर (twist) धागा बनाएं

स्पिनिंग मशीन या हाथ से कात सकते हैं

5. कपड़ा बुनना
तैयार धागे को करघे (loom) में डालें

बुनाई करें

फिनिशिंग (धोना, सुखाना, प्रेस) करें

पूरा प्रोसेस (Flow)
आलू → स्टार्च → बायोपॉलिमर → फाइबर → धागा → कपड़ा

इस तेज़ रफ्तार के बीच कहीं न कहीं पुरानी यादें भी दिल में बसती हैं। वह शांत सुबहें, पेड़ों की छाया, कच्ची सड़क की सादगी ...
18/04/2026

इस तेज़ रफ्तार के बीच कहीं न कहीं पुरानी यादें भी दिल में बसती हैं। वह शांत सुबहें, पेड़ों की छाया, कच्ची सड़क की सादगी और चौपाल की हँसी—ये सब अब सिर्फ स्मृतियों में रह गए हैं। विकास ने नई राहें दीं, पर पुराने दिनों की मिठास आज भी मन को छू जाती है।

सच यही है कि विकास अच्छा है, क्योंकि वह जीवन को आगे बढ़ाता है। लेकिन पुरानी यादें भी उतनी ही मधुर हैं, क्योंकि वे हमें हमारी जड़ों से जोड़ती हैं। आज हाईवे की चमक के साथ-साथ दिल में वह पुरानी पगडंडी भी बसती है, जो सादगी, अपनापन और सुकून की याद दिलाती रहती है।

बायोगैस प्लांट घर या खेत पर गोबर, किचन वेस्ट और जैविक कचरे से गैस (खाना बनाने/लाइट) और बढ़िया खाद बनाने के लिए लगाया जात...
17/04/2026

बायोगैस प्लांट घर या खेत पर गोबर, किचन वेस्ट और जैविक कचरे से गैस (खाना बनाने/लाइट) और बढ़िया खाद बनाने के लिए लगाया जाता है। नीचे आसान तरीका दिया है:

1. क्या-क्या चाहिए
गाय/भैंस का गोबर या किचन वेस्ट

पानी

एक डाइजेस्टर टैंक (गड्ढा/टंकी)

इनलेट पाइप (कचरा डालने के लिए)

आउटलेट (खाद निकलने के लिए)

गैस पाइप + चूल्हा

गैस स्टोरेज (डोम/ड्रम)

2. छोटा घरेलू बायोगैस प्लांट (सबसे आसान तरीका)
स्टेप-by-स्टेप
गड्ढा खोदें

1–2 m³ के लिए: लगभग 1.5 मीटर गहरा, 1.5 मीटर चौड़ा

टंकी बनाएं

ईंट + सीमेंट से गोल टैंक बनाएं (लीकेज नहीं होना चाहिए)

इनलेट लगाएं

ऊपर से पाइप जहां से गोबर-पानी डालेंगे

आउटलेट बनाएं

दूसरी तरफ खाद निकलने के लिए

गैस पाइप लगाएं

ऊपर डोम से पाइप चूल्हे तक

ड्रम/डोम फिट करें

यही गैस जमा करेगा

3. रोज कैसे चलाएं
20–25 किलो गोबर + बराबर पानी मिलाएं

इनलेट से डाल दें

10–15 दिन बाद गैस बनना शुरू

रोज डालेंगे तो रोज गैस मिलेगी

4. कितना गैस मिलेगा
2 गाय का गोबर → 2–3 घंटे खाना बन सकता है

4–5 गाय → पूरे दिन का खाना

5. फायदे
LPG की बचत

मुफ्त जैविक खाद

बदबू कम

पर्यावरण के लिए अच्छा

6. लागत (छोटा प्लांट)
1–2 घन मीटर: ₹18,000 – ₹35,000

सब्सिडी के बाद कम भी हो सकता है

आप बताएं:

आपके पास कितनी गाय/भैंस हैं?

दुनिया में कुछ देशों के किसान ज़्यादा खुशहाल माने जाते हैं — जैसे Netherlands, Israel, United States, Canada और Australi...
17/04/2026

दुनिया में कुछ देशों के किसान ज़्यादा खुशहाल माने जाते हैं — जैसे Netherlands, Israel, United States, Canada और Australia। इन देशों के किसान खुशहाल क्यों हैं, समझिए सरल भाषा में:

1. Netherlands (नीदरलैंड) – कम जमीन, ज्यादा कमाई
बहुत छोटी जमीन पर भी हाई-टेक खेती

ग्रीनहाउस, ड्रिप सिंचाई, ऑटोमेशन

सरकार और रिसर्च का मजबूत सहयोग

फसल का सीधा एक्सपोर्ट → अच्छा दाम

👉 इसलिए कम जमीन वाला किसान भी अमीर बन सकता है।

2. Israel (इज़राइल) – पानी कम, तकनीक ज़्यादा
ड्रिप इरिगेशन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल

हर पौधे को मापकर पानी-खाद

आधुनिक खेती + सरकारी सहायता

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से पक्का दाम

👉 रेगिस्तान में भी किसान लाभ में।

3. United States (अमेरिका) – बड़े खेत, बड़ी मशीनें
हजारों एकड़ की खेती

पूरी तरह मशीनों से खेती

बीमा और सब्सिडी मजबूत

फसल का न्यूनतम जोखिम

👉 लागत कम, उत्पादन ज्यादा।

4. Canada (कनाडा)
सरकारी सपोर्ट और फसल बीमा

आधुनिक स्टोरेज और सप्लाई चेन

किसान को MSP जैसा सुरक्षा तंत्र

5. Australia (ऑस्ट्रेलिया)
बड़े फार्म, कम जनसंख्या

एक्सपोर्ट-आधारित खेती

पानी और मौसम का वैज्ञानिक प्रबंधन

इन देशों के किसान खुशहाल होने के मुख्य कारण
✔ फसल का पक्का दाम

✔ सरकार की मजबूत सहायता

✔ आधुनिक मशीनें

✔ कम बिचौलिये

✔ एक्सपोर्ट की सुविधा

✔ स्टोरेज और प्रोसेसिंग

भारत में किसान क्यों पीछे रह जाता है?

छोटी जमीन

दाम तय नहीं

स्टोरेज की कमी

बिचौलिये ज्यादा

लागत ज्यादा

आलू के कम दाम का असर केवल किसान की आय पर ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार पर पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, कर्ज ...
16/04/2026

आलू के कम दाम का असर केवल किसान की आय पर ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार पर पड़ता है। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च, कर्ज की किस्त—सब प्रभावित होते हैं। कई किसान कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं और उन्हें अगली फसल के लिए भी धन जुटाना मुश्किल हो जाता है। यह स्थिति किसानों को मानसिक तनाव और निराशा की ओर भी धकेलती है।

इस समस्या के समाधान के लिए सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था पर विचार करना चाहिए, साथ ही सस्ती भंडारण सुविधाएँ उपलब्ध करानी चाहिए। किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देना, प्रसंस्करण उद्योग स्थापित करना और बाजार तक सीधी पहुँच देना भी जरूरी है।

अंततः, यदि किसान को उसकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलेगा, तो कृषि क्षेत्र कमजोर होगा और इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। इसलिए आवश्यक है कि आलू के गिरते दामों से प्रभावित किसानों की समस्या को गंभीरता से लिया जाए और उन्हें राहत प्रदान की जाए।

दयाल छप्पन कद्दू - हाइब्रिड कद्दू बीज - इस वर्ष कद्दू की फसल से बम्पर पैदावार लेने हेतु आज ही प्रयोग करें📲 अधिक जानकारी ...
27/02/2026

दयाल छप्पन कद्दू - हाइब्रिड कद्दू बीज - इस वर्ष कद्दू की फसल से बम्पर पैदावार लेने हेतु आज ही प्रयोग करें
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भारत विश्व के प्रमुख आलू उत्पादक देशों में से एक है। देश के कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, पंजाब और ...
17/02/2026

भारत विश्व के प्रमुख आलू उत्पादक देशों में से एक है। देश के कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, बिहार, पंजाब और गुजरात में बड़े पैमाने पर आलू की खेती होती है। उत्पादन अधिक होने के कारण कई बार घरेलू बाजार में कीमतें गिर जाती हैं। ऐसे में निर्यात (Export) किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकता है।

भारतीय आलू मुख्य रूप से पड़ोसी देशों जैसे नेपाल और बांग्लादेश में निर्यात किया जाता है। इन देशों में भारतीय आलू की मांग अधिक रहती है क्योंकि परिवहन लागत कम होती है और आपूर्ति तेजी से की जा सकती है। इसके अलावा श्रीलंका भी भारत से आलू आयात करता है।

खाड़ी देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, कतर और सऊदी अरब में भी भारतीय आलू की मांग है। इन देशों में भारतीय समुदाय की बड़ी आबादी है, जिससे भारतीय कृषि उत्पादों की खपत बनी रहती है। मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे कुछ एशियाई देशों में भी अवसर उपलब्ध हैं।

हालांकि निर्यात करने के लिए कुछ आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन करना पड़ता है। किसान को सीधे निर्यात करने के लिए एपीडा (APEDA) में पंजीकरण, गुणवत्ता प्रमाणपत्र (फाइटोसैनिटरी सर्टिफिकेट), उचित ग्रेडिंग और पैकेजिंग की आवश्यकता होती है। छोटे किसान किसान उत्पादक संगठन (FPO) या निर्यातक कंपनियों के माध्यम से भी अपने उत्पाद को विदेश भेज सकते हैं।

यदि सरकार और किसान मिलकर गुणवत्ता सुधार, भंडारण सुविधा और निर्यात नेटवर्क को मजबूत करें, तो भारतीय आलू किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से बेहतर मूल्य मिल सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और घरेलू बाजार पर दबाव भी कम होगा।

आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !
01/01/2026

आप सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ !

✅ उत्तर प्रदेश में कौन-कौन से मशरूम उगाए जा सकते हैं?बटन मशरूम (Button Mushroom)ठंडे मौसम में (नवंबर–फरवरी) सबसे अच्छा उ...
20/11/2025

✅ उत्तर प्रदेश में कौन-कौन से मशरूम उगाए जा सकते हैं?
बटन मशरूम (Button Mushroom)

ठंडे मौसम में (नवंबर–फरवरी) सबसे अच्छा उत्पादन देता है।

ऑयस्टर मशरूम (Oyster/ढींगरी मशरूम)

कम से कम व्यवस्था में भी उग जाता है।

लगभग पूरे साल उत्पादन संभव।

मिल्की मशरूम (Milky Mushroom)

गर्मी में (अप्रैल–सितंबर) उगाया जा सकता है।

नमी और गर्म तापमान पसंद करता है।

✅ उगाने के लिए क्या चाहिए?
साफ और हवादार कमरा

तापमान नियंत्रित व्यवस्था

70–80% नमी

गेहूँ/धान के भूसे का सब्सट्रेट

स्वच्छ वातावरण

✅ क्या UP में प्रशिक्षण मिलता है?
हाँ, कई कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), कृषि विश्वविद्यालय, और निजी संस्थान मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग देते हैं।

25/10/2025

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Sarai Prayag Near Police Chowki
Kannauj
209735

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