बड़े बुज़ुर्ग हमेशा से एक बात बताते रहे है, सस्ता रोये बार बार, महँगा रोये एक बार। यह ज़माने पुरानी बात, आज भी कई मायनों में खरी उतरती है।
आपको पान मसाले की लाइन में ऐसे अनेक लोग मिल जाएंगे जो कुछ लाख रुपये लेकर आपको मसाले की खुश्बू से लेकर पान मसाला बनाने का तरीका तक बतला सकते है, लेकिन हुजूर ये ज़रूरी नहीं है कि हर सुगंध पान मसाले मे सही बैठ जाए, और मसाला कोई भी विधि से बनाने से जनता को मज़ा आ जाए।
पान मसाले की खुश्बू विकसित करना भी अपने मे एक कला है। ऐसा नहीं है कि बस केवड़ा, गुलाब और संदल, को घोल दिया और मसाले की सुगंध तैयार हो गई ।
सुगंध विकसित करने मे अतुल्य ग्यान के साथ हर छोटी छोटी वस्तु की तासीर, और उन वस्तुओं का अन्य दूसरी वस्तुओं के साथ ताल-मेल बैठाना भी अपने मे एक महीन कारीगरी करने से कम नहीं है।
खुशबु विकसित करना एक छोटे बच्चे का स्वभाव ढालने जैसा है। कभी बच्चा गुस्सा करेगा, तो कभी वह गलत हरकत करेगा, तो कभी समझाने पे भी, वह नहीं मानेगा।लेकिन फिर भी हम उसे बार बार बार, बिना धीरज खोए, समझा के उसको अनुशासित कर ही देते है, ताकि वह जहां भी जाए, जिससे भी मिले, उसे हर जगह प्रसंशा ही मिले।
बिल्कुल उसी प्रकार, सुगंध विकसित करने मे भी कभी, पर्फ्यूम से मनचाही खुश्बू नहीं आती, तो कभी कोई दूसरी वस्तु किसी अन्य वस्तु की वस्तु को दबा देती है तो कभी अन्य वस्तुओं के साथ मिल कर एक नया अवतार धारण कर लेती है जो ज़रूरी नहीं है सबको भाये।
अब हर एक प्राकृतिक वस्तु का चयन करके, दूसरी वस्तुओं के साथ उसका सही ताल-मेल बैठा कर, मन चाही खुश्बू उन सब वस्तुओं को मिलाकर उत्सर्जित करने की कला, हम इतना कह सकते है कि बस वही निकाल सकता है जिसे दशको का तजुर्बा और ग्यान हो., यह काम काम से कम, कोई हलवा पूरी तो नहीं है, जो कि गैस चढ़ाई और झट से आधे घंटे मे तैयार हो जाए।
नए पान मसाले विकसित करते करते और आपको पान मसाला बनाने की विधि सिखाते सिखाते, आपकी एच आर एजेंसीज़ प्राइवेट लिमिटेड को साठ वर्ष हो गए।
अपने पूर्वजो से प्रेरणा लेकर, वही पान मसाले के काम को और लगन और जज़बे से नयी पीढी नें जिस तरह आगे बढ़ाया है, वह तारीफ के काबिल है। विदेश से तालीम लेकर और पचासो लाख सालाना का पैकेज छोड़ के वापिस स्वदेश लौट कर अपने पुरखों द्वारा स्थापित व्यापार को आगे बढ़ाने वाले बच्चे आज के ज़माने मे आपको कम ही मिलेंगे। और तो और, जुनून इतना कि घर पे भी उम्दा क्वालिटी के पान मसाले की सुगंधे विकसित करने के लिए लैब बनवाना, एक काम को लेकर लगन और गंभीरता दर्शाता है।
बस यू समझिए तीसरी पीढ़ी नें, अपनी विदेश से प्राप्त शिक्षा के माध्यम से सिर्फ उन चीज़ों मे कुछ सुधार रूपी बदलाव किए है, जो बदलते वक़्त के साथ ज़रूरी हो जाते हैं। आज भी परिवार की नयी पीढ़ी, अपने पूर्वजो द्वारा स्थापित नियम और तारीको को प्रेरणा का श्रोत मान कर , नयी नयी खुश्बूएँ विकसित करती आ रही है और पान मसाले का स्वाद और रूप वही, जो आप 60, 70, 80 और 90 के सुहाने दौर में खाकर आनंद उठाया करते थे।
आज भी हम, जब कोई नया पान मसाला अपनी 60 वर्ष पुरानी विधि द्वारा विकसित करते है, तो एक ऐसा बेहतरीन स्वाद और ऐसी मोहक सुगंध का जन्म होता है, जो लोगों के बीच अपनी उम्दा क्वालिटी और स्वाद के दम पर धूम मचा देता है।
नया पान मसाला फॉर्मूलेट करने से लेकर आपका उद्योग स्थापित करने तक के सब साधन मुहैया कराते है हम, जिसमें सरकारी विभागों की सब फ़ार्मलिटीज, ब्रांड रजिस्ट्रेशन, प्लांट एंड मशीनरी सेटअप, पाउच डिजाइनिंग, पाउच प्रिंटिंग, मार्केटिंग और प्लांट चलाने हेतु टेक्निशियन तक उपलब्ध करवाते है, ताकि आपका ध्यान सिर्फ जनता तक बेहतरीन क्वालिटी का पान मसाला पहुचाने का और अपने ब्रांड को नयी ऊँचाइयों तक पहुचाने का रह जाए।
पान मसाले से संबंधित किसी भी तरह की राय लेने के लिए निसंकोच पधारे, और हमारे दशको के तजुर्बे और ग्यान का भरपूर फायदा उठाए।
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