11/09/2026
सोशल मीडिया पर चल रहे AI ट्रेंड्स (जैसे 80s/90s रेट्रो लुक, विंटेज ईयरबुक या फोटो जनरेटर) का इस्तेमाल करते समय कई गंभीर डिजिटल और प्राइवेसी जोखिम जुड़े होते हैं:
डेटा और फेशियल प्राइवेसी का खतरा: AI ऐप्स पर असली चेहरा अपलोड करने से बायोमेट्रिक फेशियल डेटा थर्ड-पार्टी सर्वर पर स्टोर हो जाता है। कई ऐप्स की प्राइवेसी पॉलिसी में यह डेटा अन्य कंपनियों के साथ साझा करने की अनुमति छिपी होती है।
डीपफेक और पहचान की चोरी (Identity Theft): हाई-क्वालिटी फेशियल एंगल्स उपलब्ध होने से साइबर अपराधी आसानी से डीपफेक फोटो या वीडियो तैयार कर सकते हैं, जिसका इस्तेमाल वित्तीय धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग या सोशल इंजीनियरिंग में किया जा सकता है।
AI ट्रेनिंग में डेटा का अनधिकृत उपयोग: अधिकतर मुफ्त या वायरल AI प्लेटफॉर्म यूजर के अपलोड किए गए चेहरों का इस्तेमाल अपने मशीन लर्निंग मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए बिना अतिरिक्त सहमति या रॉयल्टी के करते हैं।
संदेहास्पद ऐप्स और मालवेयर: वायरल ट्रेंड के दौरान ऐप स्टोर्स पर कई क्लोन और फर्जी ऐप्स आ जाते हैं, जो फोटो एक्सेस के बहाने डिवाइस के कॉन्टैक्ट्स, स्टोरेज और लोकेशन की गैर-जरूरी परमिशन लेकर जासूसी या मालवेयर इंस्टॉल कर सकते हैं।
कॉपीराइट और बौद्धिक संपदा के अधिकार: ऐप की 'Terms of Service' में अक्सर लिखा होता है कि आपके द्वारा जनरेट की गई इमेज पर ऐप डेवलपर्स का पूरा अधिकार होगा, जिससे यूजर का अपने ही चेहरे से बनी आर्ट पर कंट्रोल खत्म हो जाता है।
इन ट्रेंड्स का इस्तेमाल करते समय हमेशा ऐप की 'Terms & Privacy Policy' जांचें, किसी भी थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म को गैलरी का फुल एक्सेस देने से बचें और काम पूरा होने के बाद अकाउंट व डेटा डिलीट करने का विकल्प चुनें।