Army real hero

Army real hero

17/05/2026

साथियों गर्मी से बचाव करें धूप में बाहर ना निकलने देवे बड़े बुजुर्ग को ओर खुद भी घर पर रहे ये महीना बहुत खराब निकलने वाला हैं सब के लिए हर जगह हार्ट अटैक की घटनाएं सुनने में आ रही हैं 😭😭

11/04/2024

Very nice
18/01/2024

Very nice

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पूनम के पति फौज में थे, एक दिन पूनम के पास सन्देश आया, कि वह नहीं रहे, देश की रक्षा करते हुए वह वीरगति को प्राप्त हो गए।...
12/09/2023

पूनम के पति फौज में थे, एक दिन पूनम के पास सन्देश आया, कि वह नहीं रहे, देश की रक्षा करते हुए वह वीरगति को प्राप्त हो गए।तब से पूनम प्रतिदिन अपने पति की समाधी पर फूल चढ़ाने जाया करती है। एक दिन पूनम ने देखा, कि एक गरीब बच्चा अपने पिता की समाधी पर बस्ता फेक कर शिकायत कर रहा है, और कह रहा था "उठो ना पापा टीचर ने कहा है" कल फीस लेकर आना।

पापा आपको टीचर ने बुलाया है, अगर मैंने कल फीस जमा नहीं की तो वह मुझे स्कूल से निकाल देंगे, उठो ना पापा अब आपको कल स्कूल चलना ही होगा। बच्चे के इन शब्दों ने पूनम के ह्रदय को छलनी कर दिया, थोड़ी देर बाद पूनम उसके पास गई, और पूनम ने पैसे बच्चे के हाथ में रख दिए और कहा,बेटा ये पैसे लो, यह पैसे तुम्हारे पापा ने भेजे है। कल स्कूल में जमा कर देना, और साथ ही आपके पापा ने यह नंबर भी भेजा है। जब कभी भी पैसों की जरूरत हो तो इस नंबर पर फ़ोन कर लेना, आपके पापा पैसे भिजवा देंगे।

31/07/2022

Proud on indian army

अनेको युद्धों में अपना परचम फहराने वाली “गंगा रिसाला” के सैनिक। ( वर्ष 1903 ई.)1889 में गठित यह फ़ौज 131 साल बाद आज भी अ...
29/06/2022

अनेको युद्धों में अपना परचम फहराने वाली “गंगा रिसाला” के सैनिक। ( वर्ष 1903 ई.)

1889 में गठित यह फ़ौज 131 साल बाद आज भी अस्तित्व में है।भारतीय सेना ने गंगा रिसाला को 13 ग्रेनेडियर गंगा रिसाला का नया नाम दिया।

26/01/2022

जय हिंद

23/01/2022

1947 में पाकिस्तानी आक्रांताओं के हमले से कश्मीर को संरक्षित करने का और आक्रांताओं को खदेड़ने का दायित्व 1 सिख और 4 कुमाऊ...
07/11/2021

1947 में पाकिस्तानी आक्रांताओं के हमले से कश्मीर को संरक्षित करने का और आक्रांताओं को खदेड़ने का दायित्व 1 सिख और 4 कुमाऊँ को दिया गया। 4 कुमाऊँ की D कम्पनी मेजर सोमनाथ शर्मा के नेतृत्व में बड़गाम में तैनात थी जहाँ परिस्तिथि को वे नियंत्रित रख रहे थे। क्षेत्र के निरिक्षण के दौरान उन्होंने गाँव के समीप कबायलियों की हरकत देखी। मेजर सोमनाथ शर्मा का अनुमान सही था कि वे अवश्य एक भीषण हमले की फ़िराक में हैं। देखते ही देखते मेजर सोमनाथ शर्मा की टुकड़ी तीन तरफ से कबायलियों से घिर गयी और उनकी संख्या उनकी टुकड़ी में सैनिकों की संख्या से सात गुना अधिक थी। मेजर सोमनाथ शर्मा को भान था कि यदि उन्होंने कबायलियों का सामना नहीं किया तो श्रीनगर और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हवाई हड्डा भारत के हाथ से निकल जायेगा। इसका अर्थ होता पूरा कश्मीर भारत के हाथ से निकलना।
मेजर सोमनाथ शर्मा ने फिर जो किया जिससे भारतीय सेना की वीरता की परम्परा स्थापित हुई। उन्होंने अपने साथी सैनिकों को ललकारा और देश के लिए निश्चित मृत्यु का आलिंगन करने के लिए सबको प्रेरित किया। भीषण गोलाबारूद झेलते हुए भी दुश्मन को ऐसा प्रत्युत्तर दिया जिसकी पाकिस्तानियों ने कल्पना भी नहीं की थी। जैसी अपेक्षा थी, अपरिहार्य हमले से उनकी टुकड़ी की संख्या क्षीण होती जा रही थी। परन्तु उन्होंने मोर्चा छोड़ने का विचार भी अपने पास नहीं फटकने दिया।
HQ को भेजा हुआ उनका अंतिम सन्देश था - "दुश्मन हमसे 50 गज दूर है। वे हमसे कई गुना अधिक संख्या में हैं। पर मैं यहाँ से पीछे नहीं हटूँगा। अंतिम सैनिक, अन्तिम गोली तक।"
इस लड़ाई में आखिरकार मेजर सोमनाथ शर्मा अपनी अधिकाँश टुकड़ी के समेत शहीद हो गए। परन्तु दुश्मन के प्रलयकारी अग्रगति को वे 6 घण्टे रोकने में सफल रहे जिससे भारतीय सेना को अपनी रक्षापंक्ति को पुनर्गठित करने का अमूल्य अवसर मिला। उन्हें उनके अदम्य साहस एवं अतिमानवीय नेतृत्व के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से अलंकृत किया गया।
मेजर सोमनाथ शर्मा को उनकी शहीदी दिवस पर मेरा सलाम।
जय हिन्द! जय हिन्द की सेना!!

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