Er. Mukesh Kumar Yadav

Er. Mukesh Kumar Yadav Change is the law of the world. In a moment, you become the owner of millions. In another, you become

एक आदमी ने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की से शादी की। शादी के बाद दोनो की ज़िन्दगी बहुत प्यार से गुजर रही थी। वह उसे बहुत चाहता ...
31/05/2024

एक आदमी ने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की से शादी की। शादी के बाद दोनो की ज़िन्दगी बहुत प्यार से गुजर रही थी। वह उसे बहुत चाहता था और उसकी खूबसूरती की हमेशा तारीफ़ किया करता था। लेकिन कुछ महीनों के बाद लड़की चर्मरोग (skinDisease) से ग्रसित हो गई और धीरे-धीरे उसकी खूबसूरती जाने लगी। खुद को इस तरह देख उसके मन में डर समाने लगा कि यदि वह बदसूरत हो गई, तो उसका पति उससे नफ़रत करने लगेगा और वह उसकी नफ़रत बर्दाशत नहीं कर पाएगी।

इस बीच एकदिन पति को किसी काम से शहर से बाहर जाना पड़ा। काम ख़त्म कर जब वह घर वापस लौट रहा था, उसका accident हो गया। Accident में उसने अपनी दोनो आँखें खो दी। लेकिन इसके बावजूद भी उन दोनो की जिंदगी सामान्य तरीके से आगे बढ़ती रही। समय गुजरता रहा और अपने चर्मरोग के कारण लड़की ने अपनी खूबसूरती पूरी तरह गंवा दी। वह बदसूरत हो गई, लेकिन अंधे पति को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था। इसलिए इसका उनके खुशहाल विवाहित जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

वह उसे उसी तरह प्यार करता रहा। एकदिन उस लड़की की मौत हो गई। पति अब अकेला हो गया था। वह बहुत दु:खी था. वह उस शहर को छोड़कर जाना चाहता था।

उसने अंतिम संस्कार की सारी क्रियाविधि पूर्ण की और शहर छोड़कर जाने लगा. तभी एक आदमी ने पीछे से उसे पुकारा और पास आकर कहा, “अब तुम बिना सहारे के अकेले कैसे चल पाओगे? इतने साल तो तुम्हारी पत्नितुम्हारी मदद किया करती थी.” पति ने जवाब दिया, “दोस्त! मैं अंधा नहीं हूँ। मैं बस अंधा होने का नाटक कर रहा था। क्योंकि यदि मेरी पत्नि को पता चल जाता कि मैं उसकी बदसूरती देख सकता हूँ, तो यह उसे उसके रोग से ज्यादा दर्द देता।

इसलिए मैंने इतने साल अंधे होने का दिखावा किया. वह बहुत अच्छी पत्नि थी. मैं बस उसे खुश रखना चाहता था.” .. ...

सीख-- खुश रहने के लिए हमें भी एक दूसरे की कमियो के प्रति आखे बंद कर लेनी चाहिए.. और उन कमियो को नजरन्दाज कर देना चाहिए...
आप लोगों को यह कहानी कैसी लगी मित्रों जवाब जरूर दीजिएगा।

गजब का लिखा है , भावुक कर दिया । चाहे तो आप भी पढिये बशर्ते अंधभक्त न हो , इन्सांन हो तो --आपने देखा है न उन्हें !! चौड़ा...
03/05/2024

गजब का लिखा है , भावुक कर दिया । चाहे तो आप भी पढिये बशर्ते अंधभक्त न हो , इन्सांन हो तो --

आपने देखा है न उन्हें !!

चौड़ा माथा, गहरी आंखे, लम्बा कद.. और वो मुस्कान। जब मैंने भी उन्हें पहली बार देखा- तो बस देखते रह गयी। साथी से पूछा- कौन है ये खूबसूरत लड़का। हैंडसम!! हैंडसम कहा था मैंने,

साथी ने बताया वो इंडियन है। पण्डित नेहरू की फैमिली से है। मैं देखती रही .. पंडित नेहरू की फैमिली के लड़के को।

कुछ दिन बाद, यूनिवर्सिटी कैंपस के रेस्टोरेन्ट में लंच के लिए गयी। बहुत से लड़के थे वहां। मैंने दूर एक खाली टेबल ले ली। वो भी उन दूसरे लोगो के साथ थे। मुझे लगा, कि वह मुझे देख रहे है। नजरें उठाई, तो वे सचुच मुझे ही देख रहे थे। क्षण भर को नजरे मिली, और दोनो सकपका गए। निगाहें हटा ली, मगर दिल जोरो से धड़कता रहा।

अगले दिन जब लंच के लिए वहीं गयी, वो आज भी मौजूद थे। कहीं मेरे लिए इंतजार ...!!! मेरी टेबल पर वेटर आया, एक वाइन को बॉटल लेकर.. और साथ मे एक नैपकिन, जिस पर एक कविता लिखी थी। "द वन"...

वो पहली नजर का प्यार था। वो दिन खुशनुमा थे। वो स्वर्ग था। हम साथ घूमते, नदियों के किनारे, कार में दूर ड्राइव, हाघो में हाथ लिए सड़कों पर घूमना, फिल्में देखना। मुझे याद नही की हमने एक दूसरे को प्रोपोज भी किया हो। जरूरत नही थी, सब नैचुरल था, हम एक दूसरे के लिए बने थे। हमे साथ रहना था। हमेशा ..

उनकी मां प्रधानमंत्री बन गयी थी। जब इंग्लैंड आयी तो राजीव ने मिलाया। हमने शादी की इजाजत मांगी। उन्होंने भारत आने को कहा।

भारत ... ?? ये दुनिया के जिस किसी कोने में हो। राजीव के साथ कहीं भी रह सकती थी। तो आ गयी। गुलाबी साड़ी, खादी की, जिसे नेहरू ने बुना था, जिसे इंदिरा ने अपनी शादी में पहना था, उसे पहन कर इस परिवार की हो गयी। मेरी मांग में रंग भरा, सिन्दूर कहते हैं उसे। मैं राजीव की हुई, राजीव मेरे, और मैं यही की हो गयी।

--

दिन पंख लगाकर उड़ गए। राजीव के भाई नही रहे। इंदिरा को सहारा चाहिए था। राजीव राजनीति में जाने लगे। मुझे नही था पसंद, मना किया। हर कोशिश की, मगर आप हिंदुस्तानी लोग, मां के सामने पत्नी की कहां सुनते है। वो गए, और जब गए तो बंट गये। उनमें मेरा हिस्सा घट गया।

फिर एक दिन इंदिरा निकलीं। बाहर गोलियों की आवाज आई। दौड़कर देखा तो खून से लथपथ। आप लोगों ने छलनी कर दिया था। उन्हें उठाया, अस्पताल दौड़ी, उन खून से मेरे कपड़े भीगते रहे। मेरी बांहों में दम तोड़ा। आपने कभी इतने करीब से मौत देखी है?

उस दिन मेरे घर के एक नही, दो सदस्य घट गए। राजीव पूरी तरह देश के हो गए। मैंने सहा, हंसा, साथ निभाया। जो मेरा था... सिर्फ मेरा, उसे देश से बांटा। और क्या मिला। एक दिन उनकी भी लाश लौटी। कपड़े से ढंका चेहरा। एक हंसते, गुलाबी चेहरे को लोथड़ा बनाकर लौटा दिया आप सबने।

उनका आखरी चेहरा मैं भूल जाना चाहती हूं। उस रेस्टोरेंट में पहली बार की वी निगाह, वो शामें, वो मुस्कान ... बस वही याद रखना चाहती हूं।

इस देश मे जितना वक्त राजीव के साथ गुजारा है, उससे ज्यादा राजीव के बगैर गुजार चुकी हूं। मशीन की तरह जिम्मेदारी निभाई है। जब तक शक्ति थी, उनकी विरासत को बिखरने से रोका। इस देश को समृद्धि के सबसे गौरवशाली लम्हे दिए। घर औऱ परिवार को संभाला है। एक परिपूर्ण जीवन जिया है। मैंने अपना काम किया है। राजीव को जो वचन नही दिए, उनका भी निबाह मैंने किया है।

राजनीति है, सरकारें आती जाती है। आपको लगता है कि अब इन हार जीत का मुझ पर फर्क पड़ता है। आपकी गालियां, विदेशी होने की तोहमत, बार बाला, जर्सी गाय, विधवा ... इनका मुझे दुख होता है। किसी टीवी चैनल पर दी जा रही गालियों का दुख होता है, ट्विटर और फेसबुक पर अनर्गल ट्रेंड का दुख होता है?? नही, तरस जरूर आता है।

याद रखिये, जिससे प्रेम किया हो, उसकी लाश देखकर जो दुख होता है। इसके बाद दुख नही होता। मन पत्थर हो जाता है। मगर आपको मुझसे नफरत है, बेशक कीजिये। आज ही लौट जाऊंगी। बस, राजीव लौटा दीजिए।

औऱ अगर नही लौटा सकते , तो शांति से, राजीव के आसपास, यहीं कहीं इसी मिट्टी में मिल जाने दीजिए। इस देश की बहू को इतना तो हक मिलना चाहिए शायद..

 #चीतों के भोजन के लिए 1500 चीतल नरसिंहगढ (राजगढ़) से और 500 चीतल पेंच से भेजे जाएंगे । #चीतल की व्यथा पर पत्रकार आशीष पा...
20/09/2022

#चीतों के भोजन के लिए 1500 चीतल नरसिंहगढ (राजगढ़) से और 500 चीतल पेंच से भेजे जाएंगे । #चीतल की व्यथा पर पत्रकार आशीष पाठक का लेख

एक चीतल हिरण की व्यथा-

आप लोग ठीक कह रहे हैं कि मैं एक जानवर हूँ और मुझे जंगल में शिकारी जीवों के बीच ही जीवन की जद्दोजहद करनी है, लेकिन मैं अभी जिस जंगल में रहता हूँ वहां के शिकारी जानवरों के साथ मेरे पूर्वज भी जिए मरे।

मैं उनके शिकार के तौर-तरीकों से वाकिफ हूँ और कभी-कभी मेरे दुर्भाग्य से मैं उनका शिकार भी बनता हूँ, लेकिन प्रकृति ने कभी भी मेरे साथ भेदभाव नहीं किया मुझे भी इस जंगल में अपनी जान बचाने का पूरा अवसर है, लेकिन अचानक से धरती का सबसे तेज दौड़ने वाला शिकारी जानवर जिससे कभी मेरे पूर्वजों का भी पाला नहीं पड़ा उसके सामने तुम इंसानों ने मुझे फेंक दिया।

जबकि मैंने कभी उस शिकारी के दांव नहीं देखे और ना ही उससे बचने का कोई उपाय सीखा जो कि प्रकृति ने मुझे पैदा होते समय दिया था। आज मैं तुम सबसे पूछ रहा हूँ मेरे प्राकृतिक अधिकारों को छीनकर मुझे असहाय करके पृथ्वी के सबसे खतरनाक शिकारी के आगे क्यों रख दिया? मुझसे क्या गलती हुई? क्या मैं दिखने में सुंदर नहीं हूँ? क्या मैं मेरे परिवार के साथ हरे-भरे जंगल में जब ऊँची-ऊंची कुलांचे मारते हुए दौड़ता हूँ तब तुम्हें अच्छा नहीं लगता?

क्या तुम मुझे छू नहीं सकते और तुम्हारे प्यार से छूते ही मैं तुम्हारी गोद में नहीं सिमट जाता? आज तुम मेरे जीवन के अधिकार को छीनकर एक ऐसे शिकारी को सौंप रहे हो जिसको छूना तो दूर देखने भी लौहे के पिंजरे में सवार होकर जाओगे। जरा सोचना मेरे प्राकृतिक अधिकारों के बारे में इंसानों जिन्हें तुम छीन रहे हो।

यह याद रखना, जो दे रहे हो, वो ही लौटकर तुम तक फिर आएगा।

90 का  #दूरदर्शन और हम :1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर टीवी के सामने बैठ जाना2." #रंगोली"में शुरू में पुराने फिर नए गानों क...
28/08/2022

90 का #दूरदर्शन और हम :

1.सन्डे को सुबह-2 नहा-धो कर
टीवी के सामने बैठ जाना

2." #रंगोली"में शुरू में पुराने फिर
नए गानों का इंतज़ार करना

3." #जंगल-बुक"देखने के लिए जिन
दोस्तों के पास टीवी नहीं था उनका
घर पर आना

4." #चंद्रकांता"की कास्टिंग से ले कर
अंत तक देखना

5.हर बार सस्पेंस बना कर छोड़ना
चंद्रकांता में और हमारा अगले हफ्ते
तक सोचना

6.शनिवार और रविवार की शाम को
#फिल्मों का इंतजार करना

7.किसी नेता के मरने पर कोई #सीरियल
ना आए तो उस नेता को और गालियाँ
देना

8.सचिन के आउट होते ही टीवी बंद
कर के खुद बैट-बॉल ले कर खेलने
निकल जाना

9." #मूक- #बधिर"समाचार में टीवी एंकर
के इशारों की नक़ल करना

10.कभी हवा से #ऐन्टेना घूम जाये तो
छत पर जा कर ठीक करना

बचपन वाला वो ' #रविवार' अब नहीं
आता, दोस्त पर अब वो प्यार नहीं
आता।

जब वो कहता था तो निकल पड़ते
थे बिना #घडी देखे,

अब घडी में वो समय वो वार नहीं
आता।

बचपन वाला वो ' #रविवार' अब नहीं
आता...।।।

वो #साईकिल अब भी मुझे बहुत याद
आती है, जिसपे मैं उसके पीछे बैठ
कर खुश हो जाया करता था। अब
कार में भी वो आराम नहीं आता...।।।

#जीवन की राहों में कुछ ऐसी उलझी
है गुथियाँ, उसके घर के सामने से
गुजर कर भी मिलना नहीं हो पाता...।।।

वो ' #मोगली' वो ' #अंकल Scrooz',
' #ये जो है जिंदगी' ' #सुरभि' ' #रंगोली'
और ' #चित्रहार' मुस्सदिल लाल , अब नहीं आता...।।।

#रामायण, #महाभारत, कृष्णा , जय हनुमान , #चाणक्य का वो
चाव अब नहीं आता, बचपन वाला वो
'रविवार' अब नहीं आता...।।।

रेडियो बिबित भारती पर यूनुस खान , FM गोल्ड , FM Rainbow पर OP rathor , कांतिपुर FM , BBC पर रूपा झा, मणिकांत ठाकुर और संजय बनर्जी की आवाज जो दिल की धड़कन बढ़ा देता था अब वो समय कहा आता बचपन वाला वो रविवार कहाँ आता !

वो #एक रुपये किराए की साईकिल
लेके, दोस्तों के साथ गलियों में रेस
लगाना!

1.50 रुपये के पेपर को काट कर पतंग बना के उड़ाना फिर उसी पतंग को 2 रुपये में बेचना , बहुत याद आता है

दोस्त से दिल की
बात का इज़हार नहीं हो पाता।
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं
आता...।।।

अब हर वार 'सोमवार' है
काम, ऑफिस, बॉस, बीवी, बच्चे;
बस ये जिंदगी है। दोस्त से दिल की
बात का इज़हार नहीं हो पाता।
बचपन वाला वो 'रविवार' अब नहीं
आता...।।।

बचपन वाला वो ' #रविवार' अब नही
आता...।।।

🙂🙏

23/08/2022

किसानों को गाली देते BJP मंत्री का वीडियो वायरल_Ajay Mishra Teni statement on Rakesh Tikait देशनीति भारत का सर्वश्रेष्ठ राजनीति...

17/08/2022
15/08/2022

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