16/06/2026
सुझाव: PMEGP एवं लघु उद्योगों के लिए पूर्व सूचना एवं मार्गदर्शन व्यवस्था अनिवार्य की जाए
महोदय,
मैं एक PMEGP लाभार्थी एवं लघु उद्यमी के रूप में अपना अनुभव साझा करते हुए यह सुझाव देना चाहता हूँ, ताकि भविष्य में किसी अन्य नए उद्यमी को उन कठिनाइयों का सामना न करना पड़े जिनका सामना आज मुझे करना पड़ रहा है।
मैं लगभग 10 वर्षों से अलमीरा निर्माण कार्य से जुड़ा रहा हूँ। स्वरोजगार एवं भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के उद्देश्य से मैंने PMEGP योजना के अंतर्गत अपना उद्योग स्थापित करने का निर्णय लिया। इसके लिए मैंने जिला उद्योग केंद्र (DIC), बैंक एवं अन्य संबंधित विभागों द्वारा बताए गए सभी दस्तावेज़ जैसे आधार, पैन, परियोजना प्रतिवेदन, Udyam Registration, GST, EDP Training, Panchayat NOC, Rent Agreement, बैंक दस्तावेज़, बिजली कनेक्शन आदि पूरे किए। इसके बाद मुझे ऋण एवं अनुदान प्राप्त हुआ और मैंने अपनी इकाई स्थापित की।
मेरे अनुभव में पूरी प्रक्रिया के दौरान मुझे यह स्पष्ट रूप से जानकारी नहीं दी गई कि मेरे उद्योग के लिए Consent to Establish (CTE) अथवा Consent to Operate (CTO) की आवश्यकता हो सकती है। यदि प्रारंभिक चरण में ही इस विषय में स्पष्ट मार्गदर्शन मिलता, तो मैं समय रहते आवश्यक अनुपालन पूरा कर सकता था।
इसी कारण मेरा सुझाव है कि:
PMEGP अथवा किसी भी सरकारी स्वरोजगार योजना के अंतर्गत ऋण स्वीकृत होने से पहले एक अनिवार्य अनुपालन सूची (Compliance Checklist) दी जाए।
DIC, बैंक एवं संबंधित विभाग संयुक्त रूप से यह स्पष्ट करें कि संबंधित उद्योग के लिए कौन-कौन सी वैधानिक अनुमतियाँ आवश्यक हैं।
प्रत्येक नए उद्यमी को "उद्योग शुरू करने से पहले आवश्यक अनुमति एवं अनुपालन" विषय पर लिखित मार्गदर्शन दिया जाए।
प्रथम बार गलती करने वाले और अनुपालन करने के इच्छुक लघु उद्यमियों को सुधार का अवसर एवं उचित समय दिया जाए।
लघु, सीमित उत्पादन एवं स्वरोजगार आधारित इकाइयों के लिए मार्गदर्शन एवं सहायता तंत्र विकसित किया जाए ताकि वे अनजाने में नियमों के उल्लंघन की स्थिति में न पहुँचें।
मैं यह नहीं कहता कि नियमों का पालन आवश्यक नहीं है। मेरा केवल यह निवेदन है कि जो व्यक्ति शून्य से शुरुआत कर रहा है, सीमित संसाधनों के साथ स्वरोजगार स्थापित कर रहा है और सीखते हुए आगे बढ़ रहा है, उसे प्रारंभिक स्तर पर सही जानकारी एवं मार्गदर्शन अवश्य मिलना चाहिए।
मेरा विश्वास है कि यदि ऐसी व्यवस्था विकसित की जाती है तो अनेक नए उद्यमी अनावश्यक तनाव, आर्थिक संकट, ऋण भार एवं प्रशासनिक कठिनाइयों से बच सकेंगे तथा सरकार की स्वरोजगार योजनाओं का उद्देश्य और अधिक सफल होगा।
मेरा यह सुझाव केवल अपने लिए नहीं, बल्कि उन सभी वर्तमान एवं भविष्य के छोटे उद्यमियों के लिए है जो कौशल, परिश्रम एवं आत्मनिर्भरता के आधार पर अपना व्यवसाय स्थापित करना चाहते हैं।
भवदीय,
Santosh Kumar
Proprietor – Shivam Steel Almira Fabrication
Dharphari, Paroo, Muzaffarpur, Bihar – 843120