गौ रक्षक युवा संघ

गौ रक्षक युवा संघ Namo Devyai Maha Devyai
Surabhyai Cha Namo Namah|
Gavam Bheeja Swaroopaaya
Namaste Jagad Ambike|| Note the swastikas in the foreground (center photo).

Kamadhenu (Sanskrit: कामधेनु Kāmadhenu), also known as Surabhi (सुरभि Surabhī), is a divine bovine-goddess described in Hindu mythology as the mother of all cows. She is a miraculous “cow of plenty” who provides her owner whatever he desires and is often portrayed as the mother of other cattle as well as the eleven Rudras. In iconography, she is generally depicted as a white cow with a female head

and breasts or as a white cow containing various deities within her body. All cows are venerated in Hinduism as the earthly embodiment of the Kamadhenu. As such, Kamadhenu is not worshipped independently as a goddess, and temples are not dedicated to her honor alone; rather, she is honored by the veneration of cows in general throughout the observant Hindu population
Kamadhenu, the sacred cow which grants all wishes and desires, is an integral part of Hindu mythology. This divine cow, which lives in swargalok (heaven), emerged from the ocean of milk (kshira-sagar) at the time of samudra-manthan (the great churning of the ocean by the gods (suras) and demons (asuras). It was presented to the seven sages by the Gods, and in course of time came into the possession of Sage Vasishta. Kamadhenu, the “cow of wishes or desires,” has a bovine body, a female head, polychromatic wings like a tropical bird, and a peacock’s tail. Her milk is streaming over a Shiva linga, only to be channelled by the yoni to become a sacrificial oblation in the sacred fire. Various brahmins in the foreground (center photo) pour ghee (clarified butter), another common offering, into the fire. The spiritual significance of the cow is readily apparent in the use of milk, butter, and ghee in vedic ritual ceremonies. Shiva and Pravati look on from above, surrounded by waves of light, making gestures of blessing, protection and assurance. The word “Svastika” in Sanskrit (su-astika) means “auspicious mark”. It is an old solar symbol (sun cross) and is found widely on temples in India and throughout Asia. Kamadhenu’s complexion is like the white clouds. Every part of cow’s body has a religious significance. Its four legs symbolize the four Vedas, and its teats the four Purusharthas. Its horns symbolize the gods, its face symbolize the sun and the moon, its shoulders Agni (the god of fire), and its legs the Himalayas

।। वन्दे गौ मातरम् ।।भारत में गाय की ३७ प्रकार की शुद्ध नस्लें ( शुद्ध देशी गाय )  पायी जाती है ,  रामायण में वर्णित - म...
21/06/2019

।। वन्दे गौ मातरम् ।।

भारत में गाय की ३७ प्रकार की शुद्ध नस्लें ( शुद्ध देशी गाय ) पायी जाती है , रामायण में वर्णित - मृगनयनी , कपिला , महाभारत में वर्णित मयूरपंखी , शंखवार , बाग्ला , रथी , देवली , मेवाती , मालवी , नागौरी , थारपकड़ , ककरौल , हरियाणवी , अंगौल , धन्नी , पहाड़ी , श्यामा , मंसूरी लंबे सींगों वाली , अमृत महाल ( मैसूर ) हल्दीकर , कंगायम , खिलकरी , बलगुड़ ( कोयंबटूर ) , कृष्णावेली ( मुंबई , हैदराबाद दक्षिणी भारत ) आदि जिनमें सबसे ज्यादा दूध देने वाली

१ - सौराष्ट्र काठियानाड जूनागढ़ ( गुजरात ) चौड़े माथा वाली ' गिर ' गाय - ( सालाना - २००० - ६००० लीटर दूध )

२ - साहिवाल ( अब पाकिस्तान ) हरियाणा , पंजाब उत्तर प्रदेश पायी जाने वाली ' साहिवाल ' गाय - ( सालाना २००० - ४००० लीटर दूध )

३ - सिंध ( अब पाकिस्तान ) से पूरे भारत मे फैली ' लाल सिंधी ' गाय ( सालाना २००० - ४००० लीटर दूध )

४ - राजस्थान , हरियाणा , पंजाब मे पायी जाने वाली ' राठी ' गाय ( सालाना - २००० - ३५०० लीटर दूध )

५ - कच्छ , जोधपुर , जैसमलेर , सिन्ध मे पायी जाने वाली ' थरपार्कर ' गाय ( सालाना - १८०० - ३००० लीटर दूध )

६ - उत्तरी गुजरात एवं राजस्थान मे पायी जाने वाली ' कांक्रेज ' गाय ( सालाना १५०० - ४००० लीटर दूध )

देशी भारतीय गाय शोधपूर्ण सच्चाई :

ब्राजील देश ने हमारी देशी गायों का आयात कर अब तक ६५ लाख गायों की संख्या कर ली है और इससे भी दोगुनी उन लोंगो ने दूसरे देशों में निर्यात भी की है | ( संदर्भ - google - indian cow - in brazil )

ब्राजील वालों ने दिल से हमारी देशी गायों ( सांडो सहित ) की सेवा कर आज औसतन एक गाय से दिनभर में करीब ४० लीटर दूध पाने की शानदार स्थिति बना ली है । ब्राजील इस दूध से पाउडर बना कर ऑस्ट्रेलिया , डेनमार्क जैसे देशों को निर्यात करता है , जबकि डैनमार्क जैसे देश मे आदमी से अधिक गाय है लेकिन डेनमार्क वाले अपने स्वंय के देश की गाय का दूध नहीं पीते क्योंकि वहाँ ' milk is white poison ' वाली बात प्रचलित है ।

महत्वपूर्ण बात तो यह है कि ऑस्ट्रेलिया, डैनमार्क आदि सपंन्न देश अपनी जर्सी - होलस्टीन युवान ( जिन्हें हम गाय कहते नहीं थकते - जब कि वे गाय न हो कर जानवर है ) के दूध का पाउडर , क्रीम , बटर आईल बना कर हमारे भारत देश को भेजते हैं ( ९०% बज़ारों मे मिलने वाली आईसक्रीम इन्हीं आयतित क्रीम की बनी होती हैं ) जब कि यहीं उत्पाद इन के स्वंय के देशों मे प्रतिबन्धित है । वे सिर्फ ब्राजील के दूध कापाउडर को ही उपयोग में लाते हैं |

अस सब का मुख्य कारण है - ऑस्ट्रेलिया , डैनमार्क आदि देशो की गायों के दूध से डायबिटीज़ , कैंसर जैसी भयंकर बीमारीयां फैलती है । इसी के चलते आज हमारा भारत डायबिटीज़ व कैंसर की बीमारी की विश्व राजधानी बनता जा रहा है । भारत की प्रत्येक डेयरी में हुए सम्पूर्ण दूध में से फेट ( क्रीम-मक्खन ) निकालकर उसमे इस आयातित दूषित ऑस्ट्रेलियन , डैनमार्क दूध पाउडर को मिलाकर प्रोसेस कर थैलियों के माध्यम से हमारी रसोई तक पहुंचाया जाता है ।

दुष्चक्र कुछ इस प्रकार है कि भारत की देसी गाय जाती हैं ब्राजील - वहाँ से उच्च गुणवत्ता वाला दूध एवं पाउडर जाता है ऑस्ट्रेलिया , डेनमार्क जैसे देशों मे और वहां का निम्न स्तरीय दूषित दूध पाउडर भारत मे आयात होता है - और फिर होता है वहीं से इनकी संबंधित दवाइयों का भी आयात ।

थैली के निम्न स्तरीय दूषित दूध ( देशी गाय के अतिरिक्त ) का प्रयोग तुरन्त बन्द होना चाहिये देशी गायों का संरक्षण कर उनका प्रचार प्रसार होना चाहिये । देशी गायों के दूध को किसी भी कीमत पर प्राप्त कर स्वास्थ्य का संवर्धन किया जाना चाहिये । वैज्ञानिक भाषा मे देशी गाय के दूध में और विदेशी ( जर्सी , हालेस्टियन आदि ) दोनों के दूध मे जमीन आसमान का अन्तर है जिसकी सैंकड़ों रिसर्च विदेशो मे हो चुकी है । विदेशी गाय जर्सी, हाले स्टियन आदि पर रिसर्च करने पर यह जानकारी मिली है कि Commerciaion के चलते इन्हे सूअर से artificial insemination कर के विकसित किया गया है ।

शास्त्रो और पुराणों मे हमारी देशी गाय को माँ का दर्जा दिया गया है जिसे भारतीय ऋषि मुनियों ने सोच समझ कर ' गौ मातरम् ' कहा है । यह हम सभी का नैतिक कर्तव्य भी है कि हम देशी गाय के दूध का महत्व समझे अन्य लोगो को समझाएँ । विदेशी गाय ( पूतना भगवान कृष्ण को मरने आई थी ) का दूध ना पियें । भारतीय देशी गायों की नस्लों का संरक्षण आज की आवश्यकता है

हमारे मूर्ख नीति निर्धारकों ने दूध की मात्रा को गौमाता की उपयोगिता का मापदंड बना दिया है भारतीय संस्कृति का इससे बड़ा अपमान क्या हो सकता है , हमने अपनी कमियों को सुधारने की बजाय अपनी गौमाता पर ही कम दूध देने का लांछन लगा दिया ? जब कि असी भारत वर्ष मे दूध का कभी आभाव नही रहा । बुज़ुर्ग आशीर्वाद देते थे ' दूधो नहाओ पूतो फलो ' ।

दूध के अतिरिक्त गौ माता जीवन के पहले दिन से अंतिम दिन तक गोबर और गौ मूत्र देती है जिससे हमारी खाना पकाने हेतु ईँधन , गैस , दवाई आदि भी बनती है - रसोई गैस का सिलंडर चलता है - गाड़ी भी चलती है ।

LINK :- https://www.youtube.com/watch?v=Y1kq_mm9az8

।। वन्दे गौ मातरम् वन्दे गौ भारतम् ।।

29/10/2016
01/08/2016

वर्तमान में गायों की प्रमुख नस्लें : ------
भारत में आजकल गायों की प्रमुख 30 नस्लें पाई जाती हैं। गायों की यूं तो कई नस्लें होती हैं, लेकिन भारत में मुख्‍यत: साहीवाल (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तरप्रदेश, बिहार), गिर (दक्षिण काठियावाड़, गुजरात), थारपारकर (जोधपुर, जैसलमेर, कच्छ), करन फ्राइ (राजस्थान), सिन्धी (सिन्ध का कोहिस्तान, बलूचिस्तान), कांकरेज (कच्छ की छोटी खाड़ी से दक्षिण-पूर्व का भू-भाग), मालवी (मध्यप्रदेश, ग्वालियर), नागौरी (जोधपुर के आसपास), पंवार (पीलीभीत, पूरनपुर तहसील और खीरी), भगनाड़ी (नाड़ी नदी का तटवर्ती प्रदेश), दज्जल (पंजाब के डेरा गाजी खां जिला), गावलाव (सतपुड़ा की तराई, वर्धा, छिंदवाड़ा, नागपुर, सिवनी तथा बहियर), हरियाणा (रोहतक, हिसार, सिरसा, करनाल, गुडगांव और जींद), अंगोल या नीलोर (तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, गुंटूर, नीलोर, बपटतला तथा सदनपल्ली), निमाड़ी (नर्मदा घाटी), देवनी (दक्षिण आंध्रप्रदेश, हिंसोल) आदि हैं।

08/06/2016

🙏🙏 #गौ_माता_की_पूजन_विधि 🙏🙏
गाय एक ऐसा प्राणी है, जिसमें भगवान का वास माना गया है। शास्त्रों के अनुसार गाय माता में सुरभि नामक लक्ष्मी निवास करती है। सुरभि का अर्थ है- बहुत ही सुंदर आभा प्रदान करने वाली देवी। गाय से प्राप्त होने वाली हर वस्तु दूध गोबर गौ मुत्र घी दही सभी जीवन उपयोगी है। गाय के सिर से बहने वाला पसीना जिसे गोरोचन कहा जाता है। गोरोचन में लक्ष्मी प्राप्ति करा देने की क्षमता होती है। यही कारण है कि जिस घर में गाय को निवास कराया जाता है। उस घर में 33 कोटि देवता प्रसन्न रहते हैं। वहां किसी भी प्रकार का वास्तुदोष बगैर किसी उपाय को करें स्वतः ही दूर हो जाता है।

🙏🙏 #गाय_की_सेवा_करने_से_मिलता_है_तीर्थदर्शन_करने_का_पुण्य 🙏🙏

शास्त्रों में गाय का अपमान करने वाले की घोर निंदा की गई है। गाय का मांस खाने वाले से बड़ा पापी इस जगत में कोई नहीं हो सकता है। ग्रंथों में स्पष्ट कहा गया है कि गौ माता का वध करना ऐसा पाप है, जिसका कोई प्रायश्चित्त ही नहीं है। जो पुण्य तीर्थ दर्शन करके या अनेक यज्ञों को करके बटोरा जाता है, वहीं सारा पुण्य केवल गौ माता की सेवा करने से ही प्राप्त हो जाता है।

🙏🙏 #गाय_से_जुड़े_शुभ_शकुन 🙏🙏

गाय का दरवाजे पर आकर रंभाना, दरवाजे को चांटना ये सभी शुभदायक होते हैं। यात्रा पर जाते समय गाय का दर्शन हो जाना शुभकारक होता है। घर के आंगन में बनी रंगोली पर गाय का पैर रखना बहुत शुभ माना गया है। गाय को रोज भोजन देने से नवग्रहों की शांति होती है।

#ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार गौ के पैरों में समस्त तीर्थ का वास माना गया है। गौ माता के पैरों में लगी मिट्टी का जो व्यक्ति नित्य तिलक लगाता है, उसे किसी भी तीर्थ में जाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि उसे सारा फल उसी समय वहीं प्राप्त हो जाता है।

#पुराणों में भी इसका उल्लेख मिलता हैकि गाय की पूँछ छूने मात्र से मुक्ति का मार्ग खुल जाता है।
जो व्यक्ति सुबह जागने के बाद नित्य गौ माता के दर्शन करता है, उसकी अकाल मृत्यु कभी नहीं हो सकती, यह बात महाभारत में बहुत ही प्रामाणिकता के साथ कही गई है।

ंत्र_के_साथ_गौ_माता_को_प्रणाम_करना_चाहिए। 🙏🙏

सर्वदेवमये देवि सर्वदेवैरलंकृते।
मातर्ममाभिलषितं सफलं कुरु नन्दिनि।।
गौ माता में हैं 33 कोटि देवताओं का निवास

#वैदिक_साहित्य के अनुसार जिन देवताओं का पूजन हम मंदिरों व तीर्थों में जाकर करते हैं। वे सारे देवता समूह रूप से गौ माता में विराजमान है। इसलिए पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ किसी भी कार्य की सिद्धि के लि नित्य गौ माता की सेवा करनी चाहिए। महाभारत में कहा गया है-

यत्पुण्यं सर्वयज्ञेषु दीक्षया च लभेन्नरः।
तत्पुण्यं लभते सद्यो गोभ्यो दत्वा तृणानि च।।

#अर्थात् सारे यज्ञ करने में जो पुण्य है। सारे तीर्थ नहाने का जो फल मिलता है। वह फल गौ माता को चारा डालने से ही प्राप्त हो जाता है।

🙏🙏 #रोज_खिलाना_चाहिए_गाय_को_रोटी 🙏🙏

#विष्णुधर्मोत्तरपुराण के अनुसार किसी भी अनिष्ट के नाश के लिए गौ माता के पूजन किया जाना चाहिए। जो इंसान रोेज गाय की सेवा करता है या फिर रोज गाय के लिए चारे या रोटी का दान करता है। उसकी कोई भी परेशानी अपने आप रास्ता बदल लेती है।
जो इसंान स्वयं के भोजन करने से पहले गाय को भोजन अर्पित करता है। वह श्री, विजय और ऐश्वर्य को प्राप्त करता है।

ौ_माता_को_रोटी_दें_तो_इस_मंत्र_का_उच्चारण_करें-

त्वं माता सर्वदेवानां त्वं च यज्ञस्य कारणम्।
त्वं तीर्थं सर्वतीर्थानां नमस्तेऽस्तु सदानघे।।

#नवग्रहों की पीड़ा में राहत पाने के लिए प्रत्येक वार को खिलाएं
#अलग-अलग #अन्न

#सूर्य_ग्रह के शुभ प्रभाव के लिए
#रविवार को रोटी के ऊपर थोड़ा सा गुड़ रखकर लाल गाय को खिलाएं।
#चंद्र_ग्रह के शुभ प्रभाव के लिए
#सोमवार को रोटी के ऊपर हल्का से घी लगाकर गाय को खिलाएं। कच्चे या पके चावल को दुध में भिगोकर सफेद गाय को खिलाएं।
#मंगल_ग्रह के शुभ प्रभाव के लिए
#मंगलवार को रोेटी पर गुड़ रखकर लाल गाय को खिलाएं। कोई भी मीठा पदार्थ गाय को खिलाने से मंगल ग्रह की प्रसन्नता प्राप्त होती है।
#बुध_ग्रह के शुभ प्रभाव के लिए
#बुधवार के दिन साबूत मूंग के दाने रखकर सफेद गाय को खिलाएं। बुध की #प्रसन्नता के लिए हरा चारा गाय माता को अवश्य खिलाएं।
#गुरु_ग्रह के शुभ प्रभाव के लिए
#गुरूवार को घी व हल्दी चुपड़कर पीली गाय को खिलाए। चने की दाल और गुड़ मिलाकर खिलाने से गुरु ग्रह के शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है।
#शुक्र_ग्रह के शुभ प्रभाव के लिए
#शुक्रवार को दही चावल खिलाने से शुक ग्रह की अनुकूलता में वृद्धि होती है। यह उपाय लक्ष्मी कारक है। केवल चावल भी खिलाया जा सकता है।
शनि, राहु, केतु के शुभ प्रभाव के लिए
#शनिवार को सरसों का तेल चुपड़कर तिल के कुछ दाने रोटी पर रखकर #चितकबरी या #काली गाय को खिलाएं। उड़द और चावल की बनी नमकीन #खिचड़ी खिलाने से द्ररिद्रता दूर होती हैं।

।। अमृत ।।                                यक्षगीता मे यक्ष ने युधिष्ठर से कई प्रश्न किये जिसमे एक प्रश्न यह भी था ' किमम...
03/04/2016

।। अमृत ।।

यक्षगीता मे यक्ष ने युधिष्ठर से कई प्रश्न किये जिसमे एक प्रश्न यह भी था ' किममृतम् ' - अमृत क्या है ? जिस पर युधिष्ठर ने उत्तर दिया ' गवामृतम् ' - गोदुग्ध ही अमृत है । आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार गो दुग्ध स्निग्ध , मधुर , शीतल , एवं समस्त रोगों का नाशक है जिसमे पौष्टिक तत्त्वों का भण्डार है - ४% प्रोटीन , ५% शर्करा , ४% वसा , ८७% जल तथा १-२% अन्य तत्त्वों के अलावा ११ प्रकार के विटामिन्स एवं ८ प्रकार के प्रोटीन , ३ प्रकार की दुग्ध गैस तथा १२ प्रकार के पिगमेंटस भी पाये जाते हैं । गौ दुग्ध मे पाया जाने वाला सेरिव्रोसाइस मस्तिष्क और स्मरण शक्ति के विकास मे सहायक होता है व स्ट्रानटाइन अणु विकारों का प्रतिरोधक होता है , MDGI प्रोटीन के कारण रक्त कोशिकाओं मे कैंसर प्रवेश नही करता तथा गाय के दूध से कोलेस्ट्राल भी नही बनता ।

भैंस के दूध की तुलना मे गाय के दूध मे केरोटीन १० गुना ज़्यादा पाया जाता है जबकि विटामिन ' ए ' सिर्फ गाय के दूध मे ही पाया जाता है किसी भी अन्य के दूध मे नही । भैंस के दूध को गरम करने पर उसके पोषक तत्त्व मर जाते है जब कि गाय के दूध मे एैसा नही होता । ममतामयी एवं सात्त्विक होने के कारण गौमाता का दूध भी सात्त्विक , पतला एवं सुपाच्य होता है । गाय के दूध का कोई विकल्प नही है , विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार माँ के दूध के बाद गाय का दूध ही मानव के लिये श्रेष्ठ है । दुर्भाग्य से आधुनिकता के चलते भैंस का दूध पी पी कर आधुनिक मानव की बुद्धि भी भैंस जैसी जड़ हो गयी है ।

गौ माता हमेशा स्वच्छ एवं स्वच्छ मे ही रहना भी पसंद करती है , वे कभी भी कीचड़ या अन्य गंदगी मे नही रहती हैं । मजबूरीवश उन्हे रहना पड़े यह एक अलग बात है । अगर आप को रोड क्रास करती हुयी गाय दिखेगी तो वे हार्न बजाने पर तुरंत आगे चली जायेंगीं जबकि भैंस को हार्न देने पर भी - भैंस या तो सुनेगी नही या फिर जड़ बुद्धि धीरे धीरे जायेगी । गौ माता का नवजात बछड़ा दूध पी कर हिरण की तरह कुलाँचे भरेगा जबकि भैंस का पाडा इधर उधर डोलेगा । भैंस पशु है जिसका दूध बहुत ही कम देशों मे सेवन किया जाता है ।

सऊदी अरब के अलखिराज मे अलशफीज ( मेहरबान- कृपालु ) मे ३५ हज़ार गायें है जिसमे ५ हज़ार भारतीय नस्ल की गायें है । इन गायों को वहाँ काटा नही जाता है अपितु इनका दूध रियाद स्थित शाही महल मे जाता है , शाही परिवार को भारतीय नस्ल की गायों का दूध ही पसंद आता है । वैज्ञानिकों की मान्यता है १० ग्राम घी जलाने से १ टन आक्सीजन पैदा होती है तथा वायुमण्डल मे एटामिक रेडिएशन का प्रभाव कम हो जाता है ।

सभी गाय जैसी दिखने वाली गौमाता नही होती हैं , सिर्फ भारतीय नस्ल की गायें जिनके पीठ पर गुंबद ( शिवलिंग ) होता है वही गौमाता कहलाती हैं । इसी रीढ़ की हड्डी मे सुर्यकेतु नाड़ी होती है जो सूर्य की किरणों को ग्रहण करती है और इसके क्रियाशील होने पर वह पीले रंग का पदार्थ - ' स्वर्णाक्षर ' छोड़ती है जिसके कारण देशी गाय का दूध , मक्खन , घी ( पीला ) स्वर्णकान्ति युक्त होता है और इसीलिये गौ माता हमेशा सूर्य के प्रकाश मे ही रहना पंसद करती हैं ।

देशी गाय की रंगो के अनुसार दूध के गुण भी बदल जाते है , लाल रंग की गाय का दूध - पित्तनाशक होता है , सफ़ेद रंग की गाय का दूध कफनाशक होता है , काले रंग की गाय का दूध पित्तनाशक होता है । दोपहर मे पिया जाने वाला गौ दुग्ध - बलवर्धक , कफ पित्तनाशक होता है तथा रात मे पिया जाने वाला गौ दुग्ध - दुर्बलता , बुढ़ापा दूरवकरने वाला होता है । चरकसंहिता अनुसार

स्वादु शीतं मृदु स्निग्धं बहलं श्लक्ष्णपिच्छलम् ।
गुरु मन्दं प्रसन्नं च गव्यं दशगुणं पय: ।।

गौ दुग्ध के दस गुण बताये गये हैं - स्वादिष्ट , शीतल , कोमल , चिकना , गाढ़ा , सौम्य , लसदार , भारी , बाहरी प्रभाव को विलम्ब से ग्रहण करने वाला तथा मन को प्रसन्न करने वाला होता है । इसी तरह सुश्रुतसंहिता अनुसार गाय के दूध के दही को भी स्निग्ध , विपाक मे मधुर , पाचक , बलवर्धक , वातनाशक , शुद्ध एवं रुचिकारक कहा गया है ।

स्निग्धं विपाके मधुरं दीपनं बलवर्धनम् ।
वातापहं पवित्रं च दधि गव्यं रुचिप्रदम् ।।

।। वन्दे गौ मातरम् ।।

।। वन्दे गौ मातरम् ।।१ - गौ माता जिस जगह खडी रहकर आनंद पूर्वक चैन की सांस लेती है वहाँ वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं ।२ ...
17/02/2016

।। वन्दे गौ मातरम् ।।

१ - गौ माता जिस जगह खडी रहकर आनंद पूर्वक चैन की सांस लेती है वहाँ वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं ।
२ - गौ माता मे तैतीस कोटि देवी देवताओं का वास है ।
३ - गौ माता के खुशी से रभांने मे समस्त देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं ।
४ - गौ माता के गले मे घंटी जरूर बांधे , गाय के गले मे घंटी बजने से गौ आरती होती है ।
५ - जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है , उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती हैं ।
६ - गौ माता के खुर मे नागदेवता का वास होता है ।गौ माता की विचरण स्थली मे सांप बिच्छू नही आते हैं ।
७ - गौ माता के गोबर मे लक्ष्मी जी का वास होता है ।

८ - गौ मूत्र मे गंगाजी का वास होता है ।
९ - गौ माता के गोबर से बने उपलो ( कण्डे ) का रोजाना घर , दुकान , मंदिर परिसरो पर धूप करने से वातावरण शुद्ध हो सकारात्मक ऊर्जा मिलती है ।
१० - गौ माता की एक आँख मे सूर्य एवं दूसरी आँख मे चन्द्र देव का वास होता है ।
११ - गौ धरती पर साक्षात प्रत्यक्ष देवता हैं ।
१२ - गौ माता अन्नपूर्णा देवी - कामधेनु , मनोकामना पूर्ण करने वाली हैं ।
१३ - गौ माता के दूध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगो की क्षमता को कम कर शरीर की प्रतिरोधात्मक शक्ति बढ़ाता है ।
१४ - गौ माता की पूँछ मे हनुमानजी का वास होता है , बुरी नजर लगने पर गौ माता की पूछ का झाडा लगाने से नजर उतर जाती है ।

१५ - गौ माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबंड होता है ( सिर्फ देशी गौ मे ही पाया जाता है ) इस कुबंड मे सूर्य केतु नाडी होती है । रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबंड हाथ फेरने से रोगो का नाश होता है ।
१६ - गौ माता का दूध अमृत है ।
१७ - गौ माता धर्म की धुरी हैं , गौ माता के बिना धर्म कि कल्पना नही हो सकती ।
१८ - गौ माता जगत जननी है ।
१९ - गौ माता पृथ्वी का रूप है ।
२० - गौ माता सर्वो देवमयी सर्वोवेदमयी है , इनके बिना देवों - वेदों की पूजा अधूरी है ।
२१ - मात्र एक गौ माता को चारा खिलाने से तैतीस कोटि देवी - देवताओ को भोग लग जाता है ।

२२ - गौ माता से ही मनुष्यो के गोत्र की स्थापना हुई है ।
२३ - समुद्र मंथन पश्चात निकले चौदह रत्नो मे से गौ माता एक रत्न है ।
२४ - गौ माता साक्षात माँ भवानी का रूप हैं ।
२५ - गौ माता के पंचगव्य के बिना पूजा पाठ हवन सफल नही होते हैं ।
२६ - गौ माता के दूध - घी - मख्खन - दही - गोबर गोमूत्र से बने पंचगव्य हजारो रोगो की दवा है , जिसके सेवन से असाध्य रोग भी मिट जाते हैं ।
२७ - गौ माता को घर पर रखकर सेवा करने वाला सुखी आध्यात्मिक जीवन जी अकाल मृत्यु से बच जाता है ।
२८ - तन , मन , धन से जो मनुष्य गौ सेवा करता है वो वैतरणी गौ माता की पूछ पकड कर पार कर गौ लोक धाम मे वास करता है ।

२९ - गौ माता के गोबर से ईंधन तैयार होता है ।
३० - गौ माता सभी देवी , देवताओं , मनुष्यो की आराध्य - इष्ट देव हैं ।
३१ - साकेत , स्वर्ग , इन्द्र लोक से भी उच्च गौ लोक धाम है ।
३२ - गौ माता के बिना संसार की रचना अधूरी है

३३ - गौ माता मे दिव्य शक्तिया होने से संसार का संतुलन बना रहता है ।
३४ - गौवंशो से जुती भूमि - खेती सर्वश्रेष्ट खेती होती है ।
३५ - गौ माता जिन्हें जननी से भी उच्च दर्जा दिया गया है जीवन भर दूध पिलाने वाली माता है ।

३६ - जहां गौ माता निवास करती है ,वह स्थान तीर्थ धाम बन जाता है ।
३७ - गौ माता कि सेवा परिक्रमा करने से सभी तीर्थो के पुण्यो का लाभ मिलता है ।
३८ - जिस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो यदि वह व्यक्ति अपनी हथेली मे गुड को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये तो गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खोल देती हैं ।
३९ - गौ माता के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है ।
४० - गाय माता जहाँ आनंद पूर्वक सासें लेती - छोडती है वँहा वातावरण शुद्ध होता है - नकारात्मक ऊर्जा भाग सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है ।
४१ - गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान एवं धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे ।
४२ - गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं । भगवान श्री कृष्ण का एक नाम ' गोपाल ' गौ माता की सेवा के चलते ही मिला है ।

४३ - जब गौ माता बछडे को जन्म देती हैं तब उनका पहला दूध बांध स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन खत्म होता है ।
४४ - स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र रोजाना दो तोला सात पट कपडे मे छानकर सेवन करने से सारे रोग मिटते हैं ।
४५ - गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखती है - उनके उपर गौकृपा होती है ।
४६ - गौ माता ही इस संसार का प्राण है ।
४७ - काली गाय ( श्यामा ) की पूजा करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं । धर्म पूर्वक गौ पूजन से शत्रु दोषो से निवृत्ति मिलती है ।
४८ - गाय धार्मिक - आर्थिक व सांस्कृतिक आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वगुण संपन्न हैं ।
४९ - गाय एक चलता फिरता मंदिर है जिसमे सनातन धर्म के तैतिस कोटि देवी देवता विराजमान है प्रतिदिन तैतीस कोटि देवी देवताओं के दर्शन के अभाव मे मात्र गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते है ।

५० - बार बार अटके हुये शुभ कार्य जो प्रयत्न करने पर भी सफल न हो पा रहे हों , गौ माता के कान मे कहने से - रूके शुभ कार्य अवश्य सफल होते हैं ।
५१ - गौ माता सर्व सुखों की दातार हैं ।
५२ - मोक्ष प्राप्ति एवं गौ लोक धाम के लिये गौ व्रती अवश्य बनना चाहिए ।


।। वन्दे मातरम् - वन्दे गौ मातरम् ।।

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05/01/2016

कितने हिन्दु ओनलाइन है [[168836883325952]] ,,, कृप्या लाईक (y) (y) करें:- www.fb.com/bhagwamerishaanbhagwameripehchan (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) (y) "उनको सदा ही शीश झुकाओ जो सीमा पर तैनात हैं, जिनके कारण सुरक्षित हम और आप हैं। वो अपने परिवार से दूर डयूटी पर तैनात हैं, जिसके कारन हम अपने परिवार के साथ हैं। देह को जलाने वाली गर्मी हो या बर्फिली रात हो, या बिजली की गड़गड़ाहट के साथ घनघोर बरसात हो, उन देशभक्त सैनिकों के लिए सब कुछ एक समान है। उनको सदा ही शीश झुकाओ जो सीमा पर तैनात हैं। चाहे तोपो की गोलावारी हो या रायफिल और बमबारी हो, वो मुश्किलों में डटे हुए हैं इसलिए सुरक्षित हम बने हुए हैं, वो हरदम हमारे साथ है और हमकों उनपर विश्वास है। उनको सदा ही शीश झुकाओ जो सीमा पर तैनात हैं। मौत की उनको परवाह नहीं देश का शत्रु उनसे बचा नहीँ, देश की रक्षा की खातिर वो मरने को भी तैयार है, ऐसे महान देशवीरों को मेरा कोटि कोटि प्रणाम है। उनको सदा ही शीश झुकाओ जो सीमा पर तैनात हैं।"

 #महौषधि_है_गौमूत्रगौमूत्र मनुष्य जाति तथा वनस्पति जगत को प्राप्त होने वाला अमूल्य अनुदान है। यह धर्मानुमोदित, प्राकृतिक...
03/01/2016

#महौषधि_है_गौमूत्र
गौमूत्र मनुष्य जाति तथा वनस्पति जगत को प्राप्त होने वाला अमूल्य अनुदान है। यह धर्मानुमोदित, प्राकृतिक, सहज प्राप्य हानिरहित,
कल्याणकारी एवं आरोग्यरक्षक रसायन है। गौमूत्र- योगियों का दिव्यपान है। इससे वे दिव्य शक्ति पाते
थे। गौमूत्र में गंगा ने वास किया है। यह सर्वपाप नाशक है। अमेरिका में अनुसंधान से सिध्द हो गया है कि विटामिन
बी गौ के पेट में सदा
ही रहता है। यह
सतोगुणी रस है व विचारों में सात्विकता लाता है। 6 मास लगातार
पीने से
आदमी
की प्रकृति
सतोगुणी हो
जाती है। यह रजोगुण व तमोगुण का नाशक है।
शरीरगत विष
भी पूर्ण रूप से मूत्र,
पसीना व मलांश के द्वारा बाहर निकलता है। यह मनोरोग नाशक है। विष को शमन करने में गौमूत्र पूर्ण समर्थ
है। आयुर्वेद की बहुत
सी
विषैली
जड़ी-बूटियों व विष के पदार्थ गौमूत्र से
ही शुध्द किये जाते हैं।
गौ क्या है ? गौ मूत्र क्या है ?- गौ में सब देवताओं का वास है। यह कामधेनु का स्वरूप है।
सभी नक्षत्र कि किरणों का यह
रिसीवर है, अतएव सबका प्रभाव
इसी में है। जहां गौ है, वहां सब नक्षत्रों का प्रभाव रहता है। गौ
ही ऐसा दिव्य
प्राणी है,
जिसकी
रीढ़
की
हड्डी में अंदर सूर्यकेतु
नाड़ी
होती है इसलिये दूध, मक्खन,
घी, स्वर्ण आभा वाला है, क्योंकि सूर्यकेतु
नाड़ी सूर्य
की किरणों के द्वारा रक्त में स्वर्णक्षार
बनाती है।
यही स्वर्णक्षार गौ रस में विद्यमान है।
गौमूत्र : गौ के रक्त में प्राणशक्ति होती है। गौमूत्र रक्त का गुर्दों द्वारा छना हुआ भाग
है। गुर्दे रक्त को छानते हैं। जो भी तत्व इसके रक्त में होते हैं
वही तत्व गौमूत्र में है।
गौमूत्र का चमत्कारिक प्रभाव…
1. कीटाणुओं से होने
वाली
सभी प्रकार
की
बीमारियां गौमूत्र से नष्ट
होती है।
2. गौमूत्र शरीर में लिवर को
सही कर स्वच्छ खून बनाकर
किसी
भी रोग का विरोध करने
की शक्ति प्रदान करता है।
3. गौमूत्र में ऐसे सभी तत्व हैं जो हमारे
शरीर के आरोग्यदायक तत्वों
की
कमी को पूरा करते हैं।
4. गौमूत्र को मेघ और हृघ कहा है। यह मस्तिष्क एवं हृदय को शक्ति प्रदान करता है। मानसिक कारणों से होने वाले आघात से हृदय
की रक्षा
होती है।
5. शरीर में
किसी
भी औषधि का अति प्रयोग हो जाने से तत्व
शरीर में रहकर
किसी प्रकार से उपद्रव पैदा करते हैं। उनको गौमूत्र
अपनी विषनाशक शक्ति से नष्ट कर
रोगी को निरोग करता है।
6. गौमूत्र रसायन है। यह बुढ़ापा रोकता है।
7. शरीर में पोषक तत्वों
की
कमी होने पर गौमूत्र
उसकी आपूर्ति करता है।
8. गौमूत्र- मानव शरीर
की रोग
प्रतिरोधी शक्ति को बढ़ाकर रोगों को नाश करने
की शक्ति प्रदान करता है।
रसायन मतानुसार गौमूत्र में निम्न रासायनिक तत्व पाये जाते हैं..
नाइट्रोजन, सल्फर, गंधक, अमोनिया, कापर, आयरन, ताम्र, यूरिया, यूरिक ऐसिड, फास्फेट, सोडियम, पोटेशियम,
मैग्नीज, कार्बोलिक एसिड, कैल्शियम, साल्ट, विटामिन
ए,बी,स
क्रियाटिनिन, स्वर्णक्षार
श्री गोपाल गौशाला चितौड़गढ़ के राजवैद्य रेवा शंकर शर्मा के अनुसार-
20 मिली गौमूत्र प्रात: सायं
पीने से निम्न रोगों में लाभ होता है।
1. भूख की
कमी, 2.
अजीर्ण, 3. हर्निया, 4.
मिर्गी, 5. चक्कर आना, 6.
बवासीर, 7. प्रमेह, 8.मधुमेह, 9.कब्ज, 10.
उदररोग, 11. गैस, 12. लू लगना,
13.पीलिया, 14.
खुजली, 15.मुखरोग, 16.ब्लडप्रेशर, 17.कुष्ठ रोग,
18. जांडिस, 19. भगन्दर, 20. दन्तरोग, 21. नेत्र रोग, 22. धातु
क्षीणता, 23. जुकाम, 24. बुखार, 25. त्वचा
रोग, 26. घाव, 27. सिरदर्द, 28. दमा, 29.
स्त्रीरोग, 30. स्तनरोग,
31.छिहीरिया, 32. अनिद्रा।
गौमूत्र प्रयोग का ढंग..
1. उसी गाय का मूत्र प्रयोग करें, जो वन
की घास
चरती हो और स्वच्छ जल
पीत
हो।
2. देशी गाय का
ही गोमूत्र लें,
जरसी गाय का
नहीं।
3. रोगी,
गर्भवती गाय का मूत्र प्रयोग न करें।
4. बिना व्याही गाय का मूत्र अधिक अच्छा है।
5. ताजा गौमूत्र प्रयोग करें।
6. मिट्टी, कांच,
स्टील के बर्तन में रखे ..

 #गौमाता_में_हैं_समस्त_तीर्थ :--गाय, गोपाल, गीता, गायत्री तथागंगा धर्मप्राण भारत के प्राण हैं, आधार हैं।इनमें मैं गौमाता...
03/01/2016

#गौमाता_में_हैं_समस्त_तीर्थ :--
गाय, गोपाल, गीता, गायत्री तथा
गंगा धर्मप्राण भारत के प्राण हैं, आधार हैं।
इनमें मैं गौमाता को सर्वोपरि महत्व है।
पूजनीय गौमाता हमारी ऐसी माँ है
जिसकी बराबरी न कोई देवी-देवता कर
सकता है और न कोई तीर्थ। गौमाता के
दर्शन मात्र से ऐसा पुण्य प्राप्त होता है
जो बड़े-बड़े यज्ञ दान आदि कर्मों से भी
नहीं प्राप्त हो सकता।
जिस गौमाता को स्वयं भगवान कृष्ण नंगे
पाँव जंगल-जंगल चराते फिरे हों और
जिन्होंने अपना नाम ही गोपाल रख
लिया हो, उसकी रक्षा के लिए उन्होंने
गोकुल में अवतार लिया। शास्त्रों में कहा
है सब योनियों में मनुष्य योनी श्रेष्ठ है। यह
इसलिए कहा है कि वह गौमाता की
निर्मल छाया में अपने जीवन को धन्य कर
सकते हैं। गौमाता के रोम-रोम में देवी-
देवताओं का एवं समस्त तीर्थों का वास है।
गोमाता को एक ग्रास खिला दीजिए
तो वह सभी देवी-देवताओं को पहुँच
जाएगा। इसीलिए धर्मग्रंथ बताते हैं समस्त
देवी-देवताओं एवं पितरों को एक साथ
प्रसन्न करना हो तो गोभक्ति-गोसेवा से
बढ़कर कोई अनुष्ठान नहीं है।
भविष्य पुराण में लिखा है गोमाता कि
पृष्ठदेश में ब्रह्म का वास है, गले में विष्णु का,
मुख में रुद्र का, मध्य में समस्त देवताओं और
रोमकूपों में महर्षिगण, पूँछ में अन्नत नाग,
खूरों में समस्त पर्वत, गौमूत्र में गंगादि
नदियाँ, गौमय में लक्ष्मी और नेत्रों में सूर्य-
चन्द्र हैं।
भगवान भी जब अवतार लेते हैं तो कहते हैं-
‘विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।’

http://www.bbcbharat.com/cow-in-higher-education-syllabus/ #वंदेगौमातरम्  #जयगौभक्तोकीसेना
13/12/2015

http://www.bbcbharat.com/cow-in-higher-education-syllabus/
#वंदेगौमातरम्
#जयगौभक्तोकीसेना

New Delhi: गोमाता अब विद्यार्थियों के सेलेबस में शामिल होने जा रही हैं, आप कहेंगे भला इसमें क्या नया, गोमाता पर तो हम बचपन से निबंध लिखते आए हैं और गोमाता के आशीर्वाद से परीक्षाएं भी पास करते आए हैं… तो आपके सवाल का जवाब ये है कि अब गाय सिर्फ निबंध भर के लिए …

जैविक खेती पर्यावरण के लिए खतरा नही बल्कि लाभकारी -------कुछ दिनों पहले मैंने समाचार पत्र के माध्यम से सुना की कुछ बैज्ञ...
06/12/2015

जैविक खेती पर्यावरण के लिए खतरा नही बल्कि लाभकारी -------
कुछ दिनों पहले मैंने समाचार पत्र के माध्यम से सुना की कुछ बैज्ञानिकों ने जैविक को रासायनिक खेती की तरह ही दर्जा दे डाला हमार देश के विशेषज्ञ वही बात ही बोल रहे है जो कुछ समय पहले अमेरिका ने कहा था मुझे ये समझ नही आता है की हमारे विशेषज्ञ अपना परीक्षण करने के बजाय पश्चिमी देशो द्वारा दिया गया त्थ्थों को क्यों दोहराते है
अमेरिका ने कहा है तो सत्य ही होगा ऐसी अबधारना हमारे ऊपर हाबी हो चुकी है
पिछले हफ्ते मैंने पाल्वेकर साहब से फोन पर बात की तो उन्होंने भी जैविक पर अपनी ऐसी ही टिप्पणी दी और पर्यावरण के लिए खतरा है जैसे मानों की अमेरिका के शब्द पुनः दोहराए गए हो पाल्वेकर जी प्राकृतिक खेती के पक्ष धर है लेकिन ऐसी बातें ...............जोकि मेरे समझ नही आई

आप सभी लोग जानते हैं कि आज हर कोई मौसम में बदलाव के खतरे से डरा हुआ है। लेकिन समाधान की तरफ नहीं सोंचा जा रहा है, समस्या हमने पैदा की है तो समाधान भी हमारे ही हाथों में है और वह समाधान है जैविक खेती

जलवायु परिवर्तन खेतीबारी के विकास में एक बड़ी समस्या बन कर उभर रहा है। आज दुनिया के 50 से ज्यादा देश अनाज संकट से गुजर रहे हैं। जिससे खाद्यान्न सुरक्षा का संकट खडा हो गया है।

एक अनुमान के मुताबिक अगर कार्बन डाईआक्साइड जैसी ग्रीन हाउस गैसों का निकलना इसी तरह जारी रहा तो इस सदी के आखिर तक हमारी आबोहवा में 4 डिगरी सेल्सियस तापमान बढ़ सकता है। तापमान में इस इजाफे से धरती के उत्तरी भागेां में जहां फसलों के मुताबिक सही मौसम में इजाफे से पैदावार बढ़ेगी, वहीं मैदानी और गरम इलाकों में फसलों की पैदावार घटेगी।

जलवायु परिवर्तन के चलते गेहूं की पैदावार में 4-5 क्विटंल प्रति हेक्टेयर कमी आ सकती है।

खेती में संकर किस्मों के इस्तेमाल के साथ केमिकलों के लंबे समय तक इस्तेमाल से लगातार अच्छे नतीजे नहीं मिल पर रहे हैं। पिछले 5 सालों में कृषि विकास दर 2 फीसदी के आसपास रही है। जो अर्थव्यवस्था के विकास के लिए अच्छी नहीं है।

खेती में जलवायु परिवर्तन के खतरे का सामना करने के लिए उत्पादन तकनीक में बदलाव लाने की जरूरत है। देश में हरित क्रांति से अनाज की पैदावार तो बढ़ी है। लेकिन जलवायु परिवर्तन में मददगार ग्रीनहाउस गैसों में भी इजाफा हुआ है। क्योंकि फसलों में केमिकल खादों, कीटनाशकों का इस्तेमाल इसके लिए मददगार है।

इसी तरह के आंकड़े थाइलैंड में भी देखने को मिलें हैं। जहां केमिकल खादों के इस्तेमाल में 25 फीसदी और केमिकल कीटनाशकों में 50 फीसदी इजाफे के बाद पैदावार में केवल 6.5 फीसदी की बढ़वार दर्ज की गई है।

वैज्ञानिक मानते है। कि जलवायु परिर्वन के कारण बढ़ते तापमान का असर के पैदावार पर ही नहीं पडे़गा बल्कि फसलों पर नए कीटों व बीमारियों का भी ज्यादा हमला हो सकता है। जिससे पैदावार पर और ज्यादा बुरा असर पडेगा।

खेती में जलावायु परिवर्तन के खतरे को कम करने के लिए जैविक खेती एक अच्छा रास्ता है। जिससे ग्रीनहाउस गैसों का निकलना कम होगा और पैदावार में भी इजाफा होगा। दुनिया भर में केमिकल खादों और कीटनाशकों पर आधारित खेती के लिए नाइट्रोजन खाद बनाने के लिए 9 करोड टन खनिज तेल या कुदरती गैस का इस्तेमाल हो रहा है। जिससे 25 करोड़ टन कार्बन डाइआक्साइड गैस हवा में मिलती है। इसी तरह केमिकल कीटनाशकों से भी ग्रीनहाउस गैसें निकलती है।

अकेले भारत में ही तकरीबन 47 हजार टन केमिकल कीटनाशकों का इस्तेमाल होता है। जैविक खेती में पौधों के पोषक के लिए केमिकल खादों की जगह गोबर की खाद, हरी खाद, कंपोस्ट खाद, वर्मी कम्पोस्ट, नीलाहरा शैवाल, सूक्ष्म जीवाणुओं जैसे राइजोवियम ऐजोटाबैक्टर माइक्रोराजा और माइक्रोइाहजा पर आधारित खादों का इस्तेमाल होता है। जिसने ग्रीनहाउस गैसें नहीं निकलती है। जैविक खेती में कीटों और बीमारियों की रोकथाम के लिए केमिकलों के स्थान पर जैविक कीटनाशकों का इस्तेमाल होता है। ये कीटनाशक नीम, करंज, क्राईजैथेमम युकेलिप्टस जैसे कई पेड़ों से हासिल होते है। और इसके साथ ट्राईकोडर्मा फफूंद और म्यूडोमोनास जैसे जीवाणुओं से भी जैविक कीटनाशक बनते है।

वैज्ञानिकों के स्विटजरलैंड, आस्ट्रेलिया और जरमनी में किये गये तजरबों से यह पता चलता है कि मिट्टी में जैविक खेती से हवा की 575 से 7 सौ किलोग्राम तक कार्बन डाइआक्साइड गैस प्रति हेक्टेयर सोख ली जाती है। इस तरह जैविक खेती में इस्तेमाल किये गये किसी भी जैविक अंश से ग्रीनहाउस गैसें पैदा नही होती हैं। बल्कि वायुमंडल की कार्बन डाइआक्साइड भी सोख ली जाती है।

जैविक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी में पानी को सोखने की ज्यादा कूबत होती है। जिससे इस पर उगाई गयी फसलों में सूखा सहने की ज्यादा ताकत होती । कृषि एवं खाद्य संगठन से कराए गए एक सर्वे के अनुसार जैविक विधि से उगाई गयी फसलों में ज्यादा पैदावार पाई गई है।

इस सर्वे में बोलबिया में आलू में प्रति हेक्टेयर 4 से 15 टन की बढोत्तरी दर्ज की गई। पाकिस्तान में आम की पैदावार में 6 से 30 टन प्रति हेक्टेयर, क्यूबा में सब्जियों में 2 गुणा और कीनिया में पक्के के उत्पादन में 2 से 9 टन का इजाफा पाया गया है।

भारत कुदरती संसाधनों से संपन्न देश है। जहां जैविक खेती के सभी संसाधन अच्छी मात्रा में मौजूद है इस तरह की खेती से जहां खेती की लागत में कमी आएगी। खेती फायदेमंद होगी। पर्यावरण भी साफ होगा और और इस तरह की खेती से उपजे उत्पाद क्वालिटी में अच्छे और सेहत के लिए भी फायदेमंद होगें।

कुदरती संसाधनों का प्रयोग ही हमारी पृथ्वी को बचा सकता है मेरा अनुरोध है समस्या का समाधान जैविक का प्राचर प्रसार करें अफबाहें न फैलाएं

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