21/06/2019
।। वन्दे गौ मातरम् ।।
भारत में गाय की ३७ प्रकार की शुद्ध नस्लें ( शुद्ध देशी गाय ) पायी जाती है , रामायण में वर्णित - मृगनयनी , कपिला , महाभारत में वर्णित मयूरपंखी , शंखवार , बाग्ला , रथी , देवली , मेवाती , मालवी , नागौरी , थारपकड़ , ककरौल , हरियाणवी , अंगौल , धन्नी , पहाड़ी , श्यामा , मंसूरी लंबे सींगों वाली , अमृत महाल ( मैसूर ) हल्दीकर , कंगायम , खिलकरी , बलगुड़ ( कोयंबटूर ) , कृष्णावेली ( मुंबई , हैदराबाद दक्षिणी भारत ) आदि जिनमें सबसे ज्यादा दूध देने वाली
१ - सौराष्ट्र काठियानाड जूनागढ़ ( गुजरात ) चौड़े माथा वाली ' गिर ' गाय - ( सालाना - २००० - ६००० लीटर दूध )
२ - साहिवाल ( अब पाकिस्तान ) हरियाणा , पंजाब उत्तर प्रदेश पायी जाने वाली ' साहिवाल ' गाय - ( सालाना २००० - ४००० लीटर दूध )
३ - सिंध ( अब पाकिस्तान ) से पूरे भारत मे फैली ' लाल सिंधी ' गाय ( सालाना २००० - ४००० लीटर दूध )
४ - राजस्थान , हरियाणा , पंजाब मे पायी जाने वाली ' राठी ' गाय ( सालाना - २००० - ३५०० लीटर दूध )
५ - कच्छ , जोधपुर , जैसमलेर , सिन्ध मे पायी जाने वाली ' थरपार्कर ' गाय ( सालाना - १८०० - ३००० लीटर दूध )
६ - उत्तरी गुजरात एवं राजस्थान मे पायी जाने वाली ' कांक्रेज ' गाय ( सालाना १५०० - ४००० लीटर दूध )
देशी भारतीय गाय शोधपूर्ण सच्चाई :
ब्राजील देश ने हमारी देशी गायों का आयात कर अब तक ६५ लाख गायों की संख्या कर ली है और इससे भी दोगुनी उन लोंगो ने दूसरे देशों में निर्यात भी की है | ( संदर्भ - google - indian cow - in brazil )
ब्राजील वालों ने दिल से हमारी देशी गायों ( सांडो सहित ) की सेवा कर आज औसतन एक गाय से दिनभर में करीब ४० लीटर दूध पाने की शानदार स्थिति बना ली है । ब्राजील इस दूध से पाउडर बना कर ऑस्ट्रेलिया , डेनमार्क जैसे देशों को निर्यात करता है , जबकि डैनमार्क जैसे देश मे आदमी से अधिक गाय है लेकिन डेनमार्क वाले अपने स्वंय के देश की गाय का दूध नहीं पीते क्योंकि वहाँ ' milk is white poison ' वाली बात प्रचलित है ।
महत्वपूर्ण बात तो यह है कि ऑस्ट्रेलिया, डैनमार्क आदि सपंन्न देश अपनी जर्सी - होलस्टीन युवान ( जिन्हें हम गाय कहते नहीं थकते - जब कि वे गाय न हो कर जानवर है ) के दूध का पाउडर , क्रीम , बटर आईल बना कर हमारे भारत देश को भेजते हैं ( ९०% बज़ारों मे मिलने वाली आईसक्रीम इन्हीं आयतित क्रीम की बनी होती हैं ) जब कि यहीं उत्पाद इन के स्वंय के देशों मे प्रतिबन्धित है । वे सिर्फ ब्राजील के दूध कापाउडर को ही उपयोग में लाते हैं |
अस सब का मुख्य कारण है - ऑस्ट्रेलिया , डैनमार्क आदि देशो की गायों के दूध से डायबिटीज़ , कैंसर जैसी भयंकर बीमारीयां फैलती है । इसी के चलते आज हमारा भारत डायबिटीज़ व कैंसर की बीमारी की विश्व राजधानी बनता जा रहा है । भारत की प्रत्येक डेयरी में हुए सम्पूर्ण दूध में से फेट ( क्रीम-मक्खन ) निकालकर उसमे इस आयातित दूषित ऑस्ट्रेलियन , डैनमार्क दूध पाउडर को मिलाकर प्रोसेस कर थैलियों के माध्यम से हमारी रसोई तक पहुंचाया जाता है ।
दुष्चक्र कुछ इस प्रकार है कि भारत की देसी गाय जाती हैं ब्राजील - वहाँ से उच्च गुणवत्ता वाला दूध एवं पाउडर जाता है ऑस्ट्रेलिया , डेनमार्क जैसे देशों मे और वहां का निम्न स्तरीय दूषित दूध पाउडर भारत मे आयात होता है - और फिर होता है वहीं से इनकी संबंधित दवाइयों का भी आयात ।
थैली के निम्न स्तरीय दूषित दूध ( देशी गाय के अतिरिक्त ) का प्रयोग तुरन्त बन्द होना चाहिये देशी गायों का संरक्षण कर उनका प्रचार प्रसार होना चाहिये । देशी गायों के दूध को किसी भी कीमत पर प्राप्त कर स्वास्थ्य का संवर्धन किया जाना चाहिये । वैज्ञानिक भाषा मे देशी गाय के दूध में और विदेशी ( जर्सी , हालेस्टियन आदि ) दोनों के दूध मे जमीन आसमान का अन्तर है जिसकी सैंकड़ों रिसर्च विदेशो मे हो चुकी है । विदेशी गाय जर्सी, हाले स्टियन आदि पर रिसर्च करने पर यह जानकारी मिली है कि Commerciaion के चलते इन्हे सूअर से artificial insemination कर के विकसित किया गया है ।
शास्त्रो और पुराणों मे हमारी देशी गाय को माँ का दर्जा दिया गया है जिसे भारतीय ऋषि मुनियों ने सोच समझ कर ' गौ मातरम् ' कहा है । यह हम सभी का नैतिक कर्तव्य भी है कि हम देशी गाय के दूध का महत्व समझे अन्य लोगो को समझाएँ । विदेशी गाय ( पूतना भगवान कृष्ण को मरने आई थी ) का दूध ना पियें । भारतीय देशी गायों की नस्लों का संरक्षण आज की आवश्यकता है
हमारे मूर्ख नीति निर्धारकों ने दूध की मात्रा को गौमाता की उपयोगिता का मापदंड बना दिया है भारतीय संस्कृति का इससे बड़ा अपमान क्या हो सकता है , हमने अपनी कमियों को सुधारने की बजाय अपनी गौमाता पर ही कम दूध देने का लांछन लगा दिया ? जब कि असी भारत वर्ष मे दूध का कभी आभाव नही रहा । बुज़ुर्ग आशीर्वाद देते थे ' दूधो नहाओ पूतो फलो ' ।
दूध के अतिरिक्त गौ माता जीवन के पहले दिन से अंतिम दिन तक गोबर और गौ मूत्र देती है जिससे हमारी खाना पकाने हेतु ईँधन , गैस , दवाई आदि भी बनती है - रसोई गैस का सिलंडर चलता है - गाड़ी भी चलती है ।
LINK :- https://www.youtube.com/watch?v=Y1kq_mm9az8
।। वन्दे गौ मातरम् वन्दे गौ भारतम् ।।