25/02/2024
क्यों मनाया जाता है भगोरिया -
मान्यता के अनुसार भगोरिया की शुरुआत राजा भोज के समय से हुई थी। उस समय दो भील राजाओं कासूमरा और बालून ने अपनी राजधानी में भगोर मेले का आयोजन शुरू किया था। इसके बाद दूसरे भील राजाओं ने भी अपने क्षेत्रों में इसका अनुसरण शुरू कर दिया। उस समय इसे भगोर कहा जाता था। वहीं, स्थानीय हाट और मेलों में लोग इसे भगोरिया कहने लगे। इसके बाद से ही आदिवासी बाहुल्य इलाकों में भगोरिया उत्सव मनाया जा रहा है।
महत्व:
आदिवासी लोक संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया उत्सव में आदिवासी लोकसंस्कृति के रंग चरम पर नजर आते हैं । भगोरिया की तारीख घोषित होने के साथ ही आदिवासी इलाकों में भगोरिया हाट को लेकर तैयारियां शुर हो जाती हैं । जिसमें आदिवासी संस्कृति और आधुनिक जीवन का अलबेला संगम देखने को मिलता हैं। भगोरिया हाटों के उत्सव की शुरूआत होलीका दहन के सात दिवस पूर्व हो जाती हैं। भगोरिया एक हाट है जहां हम सब मिलते हैं। व्यापार-व्यवसाय के साथ उल्लास मनाते हैं। यह जीवन और प्रेम का उत्सव है जो संगीत, नृत्य और रंगों के साथ मनाया जाता है। इस दौरान मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाकों में कई मेले लगते हैं और हजारों की संख्या में नौजवान युवक-युवतियां सज-संवरकर पारंपरिक वस्त्रों में इन मेलों में शिरकत करते हैं।
नाचते-गाते उत्सव मनाते हैं आदिवासी:
भगोरिया मेलों में आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। आदिवासी लोगों की अलग-अलग टोलियां मेले में बांसुरी, ढोल और मांदल बजाते नजर आते हैं। इस दौरान आदिवासी लड़कियां भी मेले में सजधज कर आती हैं। वह पूरी तरह से पारंपरिक वेश-भूषा में होती हैं। साथ ही मेले में हाथों पर टैटू गुदवाती हैं।
मेले में खाने के लिए अलग-अलग चीजें:
वहीं, भगोरिया मेले के दौरान खाने के लिए भी अलग-अलग चीजें मिलती हैं। विशेष रूप से गुड़ की जलेबी, भजिया, पान और ताड़ी की डिमांड ज्यादा होती है। मेले में आए लोग अलग-अलग आदिवासी व्यंजनों का लुत्फ उठाते हैं।
रिश्ते भी होते हैं तय:
भगोरिया मेले में आदिवासी युवक और युवतियों के रिश्ते भी तय होते हैं। मेले में आदिवासी युवतियां पारंपरिक वेश-भूषा में आती हैं। इसके साथ ही वह नृत्य भी प्रस्तुत करती हैं। परिवारों की सहमति से भगोरिया मेले में आदिवासी युवक और युवतियों के रिश्ते भी तय होते हैं। कहा जाता है कि इस मेले में युवतियां अपनी पसंद से लड़कों का चुनाव करती हैं। इसके बाद परिवार के लोग उसी के साथ शादी कराते हैं।
पान के जरिए होता है प्यार का इजहार:
भगोरिया मेले में युवक-युवतियां अपने जीवनसाथी को भी ढूंढने आते हैं। एक-दूसरे को पसंद हैं या नहीं, इसका तरीका भी बहुत निराला है। अगर किसी लड़के को कोई लड़की पसंद आ जाए तो वह उसे पान खाने के लिए देता है। अगर लड़की पान खा लेती है तो इसे हां समझी जाती है। इसके बाद लड़का भगोरिया मेले से लड़की को लेकर निकल जाता है और दोनों शादी कर लेते हैं।
इसके साथ ही भगोरिया मेले को लेकर एक और कहानी प्रचलित है। अगर लड़का और लड़की एक-दूसरे के गाल गुलाबी रंग लगा दें तो इसे भी प्यार का इजहार समझा जाता है। हालांकि बदलते वक्त के साथ भगोरिया मेले का रिवाज भी बदल रहा है। अब मेले पर आधुनिकता ज्यादा हावी हो रहा है।