08/05/2023
*भारत मे सनातन धर्म का झंडा बुलंद करने के लिये पूर्ण शराबबंदी अति आवश्यक :-विजय गोयल रायपुर*
• अगर शराब अमृत है तो हर माता पिता अपने टीन ऐजर व युवा बच्चे को इससे क्यो दूर रखना चाहता है .........?????
• कभी न कभी देश मे पूर्ण शराब बंदी की शुरुआत तो करनी पड़ेगी अभी से इस दिशा में पहल क्यो नहीं......???
• आज पिछले 15 वर्षों में पूरे विश्व मे सिगरेट के नशे में काफी कमी दर्ज की गई है।लगातार लंबे समय तक एक एग्रेसिव जनजागृति अभियान सरकार , युवाओं, NGO ,व धर्म गुरुओं के माध्यम से चलाने की जरूरत है ।
गंभीरता से विचार कर शराबबंदी को एक चुनौती के रूप में लिया जावे तो सब संभव है ......
(1) *शराब व नशे के कारोबार पर सरकार अगर ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनावे तो हमारे टीन ऐजर व युवा पीढ़ी को आसानी से नशा खोरी की लत से बचाया जा सकता है ।*
(2) *देश में शराब सहित अन्य नशे के कारोबार आसान सरकारी राजस्व की आड़ /नाम पर राजनैतिक व अधिकारी वर्ग की आय सरकारी राजस्व से करीब दो गुना है । इस कारण से देश मे शराब बन्दी नही हो पा रही है ।*
(3) घरेलू हिंसा, बालात्कार व हत्या ,अधिकांशतः शराब खोरी व सूखे नशे (ड्रग्स)की देन है । भारत मे ड्रग्स का नशा बहुत तेजी से युवा पीढ़ी को अपनी ग्रिफ्त में ले रहा है
(4) छत्तीसगढ़ में शराब के उपयोग करने वालो की संख्या 35.6% होना यह एक स्पष्ट संकेत है कि यहां मानव श्रम का कितना नुकसान हो रहा है । व उधोगो में स्थानीय लोगो का नियोजन कितना खतरनाक साबित हो सकता है ।
व हमारा प्रदेश क्यो विकसित राज्यो की श्रेणी में नही शामिल हो पा रहा है इस एक मूल कारण शराब खोरी भी है आपको प्रायः हर शराब ठेको पर प्रतिदिन मेलो के समान भीड़ प्रातः 7 बजे से ही दिखाई देने लगती ।
ये परिस्थितिया हमारे बच्चो पर बहुत ही बुरा प्रभाव डालती है ।
अतः छत्तीसगढ़ में तत्काल पूर्ण शराब बंदी की अव्यस्कता है ।
*उपरोक्त चार्ट में बिहार 0.9% गुजरात 3.9% आंकड़े स्पष्ट संकेत है कि पूर्ण शराब बंदी वास्तव में इफेक्टिव है।*
(5) हम सम्मानीय श्री रतन टाटा जी के इस सुझाव का समर्थन करते है । कि सभी प्रकार की देशी व अंग्रेजी शराब दुकानों ,ठेको ,अहातो,व बार मे *शराब की बिक्री व उसके बिल का भुगतान आधार कार्ड से लिंक किया जावे* व केवल आधार कार्ड होल्डर के बैंक खातों/वॉलेट से ही भुगतान एक्सेप्ट किया जावे ।
योजना के प्रथम चरण में जो परिवार प्रति माह ₹500 से अधिक की शराब खरीदता है उसे मुफ्त अनाज देना बंद किया जावे ।
इस योजना की शुरुआत छत्तीसगढ़ से हो व इसे भी शराब की खपत कम करने के जनजागृति अभियान का छत्तीसगढ़ मॉडल के रूप में प्रचारित किया जावे ।,
*मेरे निजी विचार से जो व्यक्ति अपने पैसे से शराब खरीद कर पी सकता है ।उसके परिवार को मुफ्त अनाज योजना का लाभ नही दिया जाना चाहिये ।
(6) *भारत की राज्य सरकारे आसान राजस्व के माया जाल में फस कर देश की युवा पीढ़ी के साथ साथ आम मेहनत कस जनता को नशे में जान बूझ कर ढकेल रही है ।जबकि सरकार से नेंट राजस्व में कोई इजाफा नही होता है यह केवल रिस्वत के रूप में सभी को बटने वाली काली कमाई का तंत्र है जो इसे बंद करने से सभी राजनीतिक दलों को रोकता है ।*
सभी शराब ठेको पर मेलो की तरह एकत्रित दिन प्रतिदिन बढ़ती भीड़ जिसमे 80% लोगों की उम्र 18 वर्ष से 35 वर्ष होती है ।
*क्या संकेत दे रही है .............…*
शराब जनित कारणो से सरकार का निम्न मदो में खर्च शराब से मिलने वाले राजस्व की तुलना में काफी अधिक करना पड़ता है ।
(1) दुर्घटना होने पर सरकारी मदद
(2)स्वस्थ बजट
(3) मुफ्त अनाज
(4) कर्जा माफी पर
(5) मानव श्रम के नुकसान
(6)शिक्षा पर
(7)कानून व्यवस्था बनाये रखने पर
(8) बेरोजगारी भत्तों पर
इत्यादि इत्यादि
*शराब के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान :- विजय गोयल रायपुर*
(1) पूरे परिवार की शांति भंग हो जाती है।
(2) मानव श्रम का बहुत नुकसान होता है जिसकी रुपये में कीमत शराब के राजस्व से कई गुना अधिक है ।
(3) देश की सुरक्छा हमेशा खतरे में बनी रहती है नशा करवाकर संवेदनशील जानकारियो का लीक होना बहुत आसान होता है ।
(4)मानवीय भूल के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में 90% से ज्यादा दुर्घटनाएं नशे के कारण होती है । जिससे निर्दोष लोगों को भी जान माल की हानि उठानी पड़ती है ।
(5) शराबी का स्वास्थ्यगत खर्चा आम आदमी बिना शराब पीने वालों की तुलना में कई गुना अधिक है
(6) महिलाओं को शराब का दंश सबसे अधिक झेलना पड़ता है । 90% केसों में घरेलू हिंसा ,बलात्कार ,मारपीट ,हत्या , की घटनाएं नशे के हालत में होती है। व चोरी की घटनायें नशा खरीदने के लिये होती है ।
(7) गरीब मजदुरो की कमाई का 33%हिस्सा शराब में खर्च ही जाता है ।
जिससे वे अपने बच्चों के ठीक से पालन पोषण नहीं कर पाते है और उनके बच्चे पौष्टिक आहार ,शिक्षा, से वंचित हो जाते है ।
इत्यादि इत्यादि .....…....
देश मे पूर्ण शराब बंदी व ड्रग्स के कारोबार को ध्वस्त किये बगैर मानव श्रम यू ही व्यर्थ होता रहेगा । और मासूम गरीब बच्चो का भविष्य बर्बाद होता रहेगा ।
*गंभीरता से विचार कर शराबबंदी को एक चुनौती व जन जागृति अभियान के रूप में लिया जावे तो सब संभव है ......*
आपश्री के सार्थक सुझाव ,विचार व प्रतिक्रिया आमंत्रित है